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जहां भगवान शिव “बाघ” में रूप में हुए थे अवतरित, एक बार जरूर करें भगवान बागनाथ के दर्शन

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अगर आप घूमने फिरने के शौकीन हैं तो उत्तराखण्ड में बागेश्वर जिले के ज्ञानधुरा में लोगों ने पर्यटकों के लिये ऐसे इन्तजाम किये हुए हैं। एकान्त में शीतल शान्ती,अद्भुत सूर्योदय और मनो हारी सूर्यास्त,नामिक ग्लेशियर और राम गंगा के सुन्दर दृश्य,पक्षियों का कलरव, प्रवासी पक्षियों का आवागमन, रहन-सहन और संस्कृति, वनों में अध्ययनात्मक भ्रमण, नामिक ग्लेशियर तक ट्रैक करने की व्यवस्था, उबड-खाबड़ मार्गों में बाइस्किलिंग, राम गंगा की सैर, सच कह रहा हूं बागेश्वर में खूब जानने सीखने को मिलेगा यहां।

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जहां भगवान शिव “बाघ” में रूप में हुए थे अवतरित

बागेश्वर हिमालय का एक खूबसूरत गहना है, जो बर्फीली घाटियों, पहाड़ और आरामदायक मौसम के लिए जाना जाता है। एक शानदार अवकाश के लिए यह स्थल एक आदर्श विकल्प है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव यहां बाघ के रूप में रहने आए थे। यही कारण है कि इस शहर को बागेश्वर कहा जाता है जिसका अर्थ है ‘बाघ की भूमि’। उत्तराखंड के अन्य आकर्षणों की भांति यहां भी कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं। इनके अलावा यह पर्वतीय स्थल विभिन्न वनस्पतियों और जीव-जन्तुओं को सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है। प्राकृतिक स्थलों के अलावा आप यहां एडवेंचर का रोमांचक आनंद ले सकते हैं। जानिए यहां के चुनिंदा दर्शनीय स्थलों के बारे में, जो आपकी बागेश्वर यात्रा को सुखद बना सकते हैं।

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प्रकृति की अनूठी धरोहर है सुंदरढुंगा का देवीकुंड

पिंडारी ग्लेशियर की यात्रा सुन्दरढूंगा ग्लेशियर से ज्यादा सरल मानी जाती है। ये दोनो ही स्थल रोमांचक ट्रेकिंग के लिए प्रसिद्ध हैं, जो दूर-दराज के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करने का काम करते हैं। बागेश्वर जिला मुख्यालय से 161 किमी दूर विश्व प्रसिद्ध सुंदरढुंगा ग्लेशियर के पास खूबसूरत देवीकुंड प्रकृति की अनूठी धरोहर है। हरी-भरी पहाडय़िों के बीच स्थित इस कुंड के पवित्र जल को दुर्गा पूजा में भी प्रयुक्त किया जाता है। देवीकुंड की पैदल यात्रा अत्यधिक साहसिक और रोमांचकारी होती है।

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देवीकुंड : देवीकुंड समुद्र की सतह से 13500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए बागेश्वर से 44 किमी दूर सोंग लोहारखेत तक वाहन से यात्रा की जाती है। इसके बाद देवीकुंड हिमालय की पैदल यात्रा शुरू होती है। पहले दिन नौ किमी दूर धाकुड़ी, दूसरे दिन आठ किमी दूर खाती में विश्राम किया जाता है। यहां से तीसरे दिन सात किमी दूर जातोली, चौथे दिन 16 किमी पैदल यात्रा के बाद देवीकुंड पहुंचा जा सकता है। यहां पहुंचते ही कुंड की छटा लोगों का मन मोह लेती है। लगभग 110 मीटर लंबे और 50 मीटर चौड़े इस प्राकृतिक कुंड में आसपास की हरियाली का प्रतिबिंब चार चांद लगा देता है। कुंड के चारों ओर खिले ब्रह्मकमल के सफेद फूल इस स्थल की रमणीयता को और भी बढ़ा देते हैं।

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बागनाथ मंदिर

बागनाथ मंदिर एक पौराणिक मंदिर है , जो कि भगवान शिव को समर्पित उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित सबसे प्रसिद्ध मंदिर है , इसी कारण बागेश्वर जिले का नाम इसी मंदिर के नाम पड़ा। बागनाथ मंदिर के समीप सरयू और गोमती नदी का संगम होता है । शैलराज हिमालय की गोद में गोमती सरयू नदी के संगम पर स्थित मार्केंडेय ऋषि की तपोभूमि के नाम से जाना जाता है । बागनाथ मंदिर 7 वीं शताब्दी से ही अस्तित्व में था और वर्तमान नगरी शैली का निर्माण 1450 में चंद शासक “लक्ष्मी चंद” ने कराया था।  यहां आने का सबसे अच्छा समय शिवरात्रि है। इस दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु यहां जल चढ़ाने के लिए पहुंचते हैं।

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बैजनाथ

बागनाथ मंदिर के अलावा आप यहां बैजनाथ मंदिर के दर्शन का भी प्लान बना सकते हैं। बागेश्वर से 26 किमी की दूर स्थित यह मंदिर एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है जो अपनी प्राचीन मूर्तियों के लिए जाना जाता है। इतिहास के पन्ने बताते हैं कि बैजनाथ 7 वीं से 11 वीं शताब्दी ईस्वी के आसपास कत्यूरी राजवंश की राजधानी हुआ करता था, जिसका प्रारंभिक नाम कार्तिकेयपुर था। बैजनाथ मंदिर भी कत्यूरी राजाओ द्वारा बनवाया गया था, जिसमें भगवान शिव, देवी पार्वती, भगवान गणेश, भगवान ब्रह्मा और विभिन्न अन्य हिंदू देवताओं की मूर्तियों को स्थापित किया गया था।

चंडिका मंदिर

उपरोक्त धार्मिक स्थलों के अलावा आप यहां चंदिका मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं। चांदिका मंदिर हिंदू देवी चंडीका माई को समर्पित है जो मां काली का ही एक रूप हैं। यह मंदिर बागेश्वर से केवल आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां नवरात्रों के दिनों में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा लगता है। इसके अलावा चंडिका मंदिरा स्थानीय लोगों के लिए एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभव के लिए आप यहां की यात्रा कर सकते हैं।

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कौसानी

उपरोक्त स्थानों के अलावा आप बागेश्वर से 38 किमी की दूरी पर स्थित कौसानी की यात्रा कर सकते हैं। इस स्थान पर कौशिक मुनि ने कठोर तप किया था इसलिए इस स्थान का नाम “कौसानी” रखा गया। कौसानी क्षेत्र में दो प्रमुख ऐतिहासिक घटनाऐ हुई जो कि वर्तमान समय में भी याद करी जाती है। सर्वप्रथम प्रसिद्ध भारतीय कवि, “सुमित्रानंदन पन्त” जो की सन 1900 में  यहां कौसानी में पैदा हुए थे। महात्मा गांधी ने 1929 में यहां की यात्रा के दौरान इस स्थल को स्विट्जरलैंड कहकर सम्मानित किया था। महात्मा गांधी ने अनासक्ति योग पर अपना कार्य पूरा करने के लिए 12 दिनों तक कौसानी में ठहरे थे। कौसानी प्राचीन परिदृश्य के साथ शानदार घाटियां और सुरम्य हरियाली के लिए जाना जाता है। इस स्थान में एक चाय का बागान भी है, जो कि कौसानी से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर बैजनाथ की तरफ है। इस क्षेत्र की चाय बहुत ही खुशबूदार और स्वादिष्ट होती है। अगर आप प्राकृतिक सौंदर्यता का जी भरकर आनंद उठाना चाहते हैं तो यहां जरूर आएं।

कैसे पहुंचें

हवाई यात्रा- पन्त नगर हवाई अड्डे तक आप हवाई यात्रा कर सकते हैं। वहां से आप बस अथवा कार से आसानी से जा सकते है पन्त नगर से बागेश्वर दूरी लगभग 220 किलोमीटर है।

ट्रेन- काठगोदाम रेलवे स्टेशन तक आप ट्रेन से जा सकते है। वहां से आप बस अथवा टैक्सी से आसानी से जा सकते है। काठगोदाम से बागेश्वर की दूरी लगभग 190 किलोमीटर है।