मिशन 2024: मोदी नाम सहारे भाजपा तैयार, विपक्ष के पास कैसे हथियार?
मोदी की लोकप्रियता की बरकरार, भाजपा में खुशी अपार
विपक्ष दे रहा मुद्दों को धार, अब अदाणी इश्यू पर छेड़ा वार
सबसे बड़े राज्य यूपी को लेकर किए जा रहे लश्कर तैयार
भाजपा व सपा-कांग्रेस के बीच जमकर हो रहा वार-पलटवार
चुनावी सीजन में जुबानी जंग और तेज होने के दिखे आसार
न्यूज टुडे नेटवर्क। उदय प्रताप सिंह यादव समाजवादी पार्टी के थिंकटेंक माने जाते हैं। वह सपा संरक्षक स्व. मुलायम सिंह यादव के गुरु रहे हैं। बड़े कवि हैं। राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं। यूपी में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के बीच उदय प्रताप यादव ने ट्वीट कर अदाणी इश्यू पर अपने अंदाज में ‘अदाणी गीत’ गाते जा रहे हैं। अकेले उदय प्रताप सिंह नहीं, समाजवादी बिग्रेड से लेकर केन्द्र की राजनीति में नंबर-2 कांग्रेस अदाणी-अदाणी के gh शोर उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं मगर सरकार व भाजपा नो टेंशन की मुद्रा में दिखाई दे रही है। भाजपा की नो टेंशन का बड़़ा कारण प्रधानमंत्री की लोकप्रियता है, जो जनता के दिलों में बरकरार है। मिशन 2024 की तैयारी में जुटी भाजपा मोदी नाम सहारे अपने विजय रथ को आगे ले जाने की तैयारी में है और विपक्ष को अपना रंग जमाने को अब भी मुद्दों की तलाश है।
मुद्दे राजनीति की दिशा बदलते हैं। पक्ष हो या विपक्ष मुद्दे राजनीति को धार देते हैं। केन्द्र और यूपी की सत्ता पर काबिज भाजपा जोरशोर से मिशन-2024 की तैयारी में जुटी है तो विपक्ष अदाणी इश्यू को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। अदाणी मामले की तरह ही केन्द्र में मुख्य विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार के खिलाफ राफेल सौदे में गड़बड़ी का बहुत शोर उठाया था मगर राफेल कांग्रेस के लिए संजीवनी नहीं बन सका। विपक्ष के तेवर और तैयारी देखकर ऐसा लगता है कि अब उनको अदाणी इश्यू से चुनावी सीजन में चमत्कार की आस है, इसलिए सब एक सुर में सरकार को घेरने के लिए अदाणी फार्मूले पर काम करते दिखाई दे रहे हैं।
दूसरी ओर, विपक्ष की घेराबंदी के बाद भी भाजपा सरकार और संगठन नो टेंशन के मूड में नजर आ रही है। दरअसल, भाजपा की खुशी का राज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता पहले की तरह ही बरकरार रहने की खबर है। पोलिंग एजेंसी सी-वोटर की तरफ से कराए गए सर्वे में भाजपा को खुशी और उतना ही ज्यादा शायद विपक्ष को टेंशन हो रही होगी। सर्वे में दो तिहाई लोगों ने मोदी सरकार के कामकाज पर संतोष जताया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सर्वेक्षण में शामिल करीब 50 फीसदी लोगों ने कह कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कामकाज से बहुत ज्यादा संतुष्ट हैं। 30 फीसदी लोगों ने पीएम मोदी के काम से बहुत हद तक सतुष्ट होने की बात कही है। यह दोनों ही रेटिंग उसी तरह की है, जैसी पिछले साल नवंबर में कराए गए सर्वेक्षण में थी। इसका सीधा मतलब ये माना जा सकता है कि अभी भी मोदी की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। दूसरी ओर, विपक्ष सड़क से लेकर सदन तक अदाणी-अदाणी के शोर उठाकर इसी मुद्दे के सहारे आगे चुनावी इम्तिहान पास करने की उम्मीद लगा रहा है।
2014 से पहले की सियासी तस्वीर चाहे जैसे भी रही हो मगर उसके से देश में भगवा बिग्रेड का विजय रथ लगातार आगे ही बढ़ता देखा जा रहा है। सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में पहले 2017 और उसके बाद 2022 में डबल इंजन मोदी-योगी के नेतृत्व में भाजपा ने कमाल करके दिखाया है। विपक्ष इस बात को जानता है कि उत्तर प्रदेश में रोके बिना, केन्द्र में भाजपा को रोकना संभव नहीं होगा। यूपी की बात करें तो यहां भाजपा के बाद सपा दूसरे नंबर की पार्टी है। कांग्रेस की राज्य में अति कमजोर कहानी किसी से छिपी नही है। सपा चुनावी मुकाबलों में कांग्रेस को टक्कर तो दे रही है मगर नतीजों को अपने पक्ष में मोड़ने में 2017 के बाद से कामयाब नहीं हो रही। आजमगढ़, रामपुर जैसे अपने गढ़ भी सपा लोकसभा चुनाव में नहीं बचा सकी। नेताजी मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली हुई मैनपुरी सीट पर उप चुनाव में डिंपल यादव ने बड़े अंतराल से जीत जरूर दर्ज की मगर उसके बाद हुए एमएलसी चुनावों में सपा की गाड़ी फिर बेपटरी ही दिखाई दी है।
विपक्ष इस बात को बखूबी जानता है कि भाजपा संगठन से लेकर चुनावी तैयारियों तक हर मामले में आगे है। सपा कई महीनों से राज्य में अपना भंग संगठन खड़ा नहीं कर पा रही है और भाजपा केन्द्र से लेकर राज्य और जिला शहर तक अपने नए संगठन पर तेजी से कदम आगे बढ़ा रही है। चुनावी साल से पहले मोदी-2 सरकार के आखिरी बजट पर विपक्ष निगाहें जमाए थीं मगर सरकार बेहद चतुराई से बजट में ऐसी राह पर चली है कि विपक्ष बहुत ज्यादा आलोचना और विरोध की स्थिति में नहीं आ सका है। देश में सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें रखने वाले यूपी में डबल इंजन की सरकार अब ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के जरिए देश में औद्योगिक विकास की नई इबारत लिख रही है और देश दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। वहीं, योगी सरकार के विपक्षी पार्टियां ग्लोबल समिट पर भी सवाल उठा रही है। यूपी के अंदर अप्रैल-मई में निकाय चुनाव प्रस्तावित है और उसके बाद यूपी समेत पूरे देश में लोकसभा चुनाव की कवायद शुरू होने वाली है। देखना ये है कि सपा, कांग्रेस समेत दूसरी विपक्षी पार्टियां सरकार के खिलाफ मुद्दों का कैसा ज्वार उठाने में कितनी कामयाब रहती है।

