LOKSABHA ELECTION 2024: बरेली मंडल में मुस्लिमों को भूली सपा को बसपा का अल्पसंख्यक कार्ड दे सकता है तगड़ा सियासी झटका, पूरा गणित जानने के लिए देखें ये सियासी खबर

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बरेली में आठ बार के सांसद संतोष गंगवार एक बार फिर पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन को देंगे मात

बरेली मंडल की किसी सीट पर सपा ने नहीं उतारे हैं मुस्लिम कैंडीडेट, क्या खड़ा होगा विरोध

क्या बसपा मुस्लिम कार्ड खेलकर सपा कांग्रेस को बरेली मंडल में दे पाएगी तगड़ा झटका

मंडल की चारों लोकसभा सीटों पर क्या इस बार भी कब्जा बरकरार रखेगी भारतीय जनता पार्टी

बरेली, बदायूं, आंवला सीट पर बसपा ने मुस्लिम कार्ड खेला तो क्या बिगड़ेगा सपा भाजपा गणित

न्यूज टुडे नेटवर्क। लोकसभा चुनाव को लेकर प्रदेश भर में सियासी गोटियां बिछ रही हैं। सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस अपने अपने दांवपेंच से एक दूसरे को सियासत के खेल में मात देने की रणनीति बना रहे हैं। सपा कांग्रेस इंडिया गठबंधन के तहत एक साथ मिलकर चुनाव मैदान में हैं तो वहीं बसपा अकेले लोकसभा के समर में दम भर रही है। उधर भाजपा बूथ स्तर मजबूत रणनीति बनाकर ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने पर फोकस कर रही है। इस पूरी घटनाक्रम के बीच रूहेलखंड की सियासत में नए नए उतार चढ़ाव हो रहे हैं। धर्म जाति संप्रदाय के आधार पर चल रही चुनावी राजनीति में पार्टियां भी इसी परिपाटी पर उम्मीदवार घोषित कर रही हैं।

इस बार सपा ने बरेली मंडल की किसी सीट पर मुस्लिम चेहरे को टिकट नहीं दिया है। जिसके बाद अब बसपा ने मुस्लिमों पर दांव लगाने की रणनीति बना ली है। बरेली बदायूं और आंवला लोकसभा सीटों पर बसपा मुस्लिम कार्ड के जरिए सपा और कांग्रेस की चुनावी राह में रोड़े अटकाने की रणनीति बना रही है। बरेली लोकसभा सीट पर जहां एक ओर समाजवादी पार्टी ने इंडिया गठबंधन के तहत पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन को प्रत्याशी घोषित कर दिया है तो वहीं भाजपा से आठ बार के सांसद पूर्व केन्द्रीय मंत्री संतोष गंगवार का चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है।

इसी तरह आंवला लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने नीरज मौर्य को प्रत्याशी बना दिया है। बदायूं में सपा ने वरिष्ठ सपा नेता शिवपाल सिंह यादव को मैदान में उतारकर सबको चौंकाया है। शाहजहांपुर में भी समाजवादी पार्टी ने राजेश कश्यप को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। बरेली मंडल की इन चारों ही सीटों पर अब बसपा की नजर बनी हुयी है। उधर मुस्लिमों पर दांव लगाने के लिए ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने भी रणनीति तैयार कर रही है। समाजवादी पार्टी ने मंडल की चार सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं, लेकिन हैरत की बात है कि इस बार समाजवादी पार्टी प्रत्याशी चयन में मुस्लिम चेहरों को भूल गयी है।

जिसके बाद अब बसपा बरेली मंडल में बड़ा अल्पसंख्यक दांव खेलकर सपा कांग्रेस समेत दूसरे दलों को भी झटका दे सकती हैं। दमदार मुस्लिम नेताओं पर बसपा की नजर बनी हुयी है। माना जा रहा है कि भाजपा के अगले कदम के बाद बसपा बरेली मंडल की सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतार सकती है। इस बार सपा ने जहां ओबीसी और सवर्णों पर दांव लगाया है तो वहीं बसपा और ओवैसी की पार्टी पर अब अल्पसंख्यक वोटरों के ध्रुवीकरण के लिए प्रत्याशी तलाशने में जुटे हैं। राजनैतिक विश्लेषकों के मुताबिक अगर बसपा ने बरेली, बदायूं, आंवला समेत दूसरी सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे तो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लिए चुनावी समर में पार उतरना बेहद मुश्किल हो सकता है। वहीं ओवैसी भी सपा और कांग्रेस की राह में रोड़े अटकाने का प्रयास जरूर करेंगे।

अब देखना यह होगा कि सपा कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार घोषित होने के बाद बसपा मुखिया मायावती और ओवैसी किन मुस्लिम चेहरों पर दांव लगा रहे हैं। माना जा रहा है कि मायावती का अल्पसंख्यक कार्ड सपा कांग्रेस का चुनावी खेल बिगाड़ने के लिए काफी होगा।

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