बरेली में जयपुर अड्डायूपी टू राजस्थान थाने-थाने कमाई में हिस्सा, देखें ये खास खबर (VIDEO)...

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न्यूज टुडे नेटवर्क। बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, ये कहावत अब पुरानी हो गई है। माफिया के खेल में मोटा-माटी कमाई से सीधा समुंदर भरता है। याद होगा, पंचायत चुनाव में बरेली में नवाबगंज क्षेत्र के गांव जरेली में खून-खराबा हुआ था। टकराव तो चुनाव में दम दिखाने को लेकर था मगर उसके पीछे बस माफिया का पैसा बोल रहा था। वही बस माफिया जो नवाबगंज, हाफिजगंज, बरेली से जयपुर को बसों की बेहिसाब डग्गमारी कराते हैं। दिल्ली के कोशांबी बस अड्डे की तरह कायदे-कानून की हदें लांघकर सवारियों को जबरन बसों में ठूंस कर गुलाबीनगर भिजवाते हैं। कमाई के चक्कर में कई बार माफिया के गुर्गे आपस में भी भिड़ जाते हैं और एक दूसरे का सिर फोड़ते हैं। गोलियां चलाते हैं।

प्रशासन की सूची में भले ये नाम न हो मगर बरेली, नवाबगंज, हाफिजगंज में आप किसी से भी जयपुर अड्डे का पता पूछ सकते हैं। बरेली महानगर में जयपुर अडडे का मतलब शहामतगंज बोला जाता है, जहां से एक मंजिला ही नहीं, बल्कि डबल डेकर बसों तक में जयपुर शाम से रात तक सवारियों की लोडिंग-अनलोडिंग करती हैं। सूत्र बताते हैं कि अवैध डग्गामार बसों का बरेली से जयपुर तक संचालन सिर्फ रात में किया जाता है। दिन के उजाले में थाने-चौकी, आरटीओ की सेटिंग से चोरी भी सिस्टम को बुरा लग सकती है, इसलिए बसों के अवैध संचालन से हर महीने होने वाली लाखों-करोड़ों की काली कमाई का खेल सिर्फ रात में खेल जाता है।

सूत्र बताते हैं कि बरेली महानगर और नवाबगंज-हाफिजगंज से रात में रोज ही डग्गमार बसें जयपुर के फेर लगाती है और पकड़ा-धकड़ी न हो, इसके लिए 400 किमी सफर में रास्ते भर पड़ने वाले हर थाने में चढ़ावे जाते हैं। इसके लिए बाकायदा माफिया के लोग मासिक कलेक्शन करते हैं और एडवांस में ही थाने-थाने पहुंचाकर 30-31 दिन के लिए बेफिक्र हो जाते हैं। बरेली से जयपुर तक रास्ते में पड़ने वाले यूपी-राजस्थान के थानों की पुलिस मासिक पेमेंट मिलने के बाद फिर बसों की डग्गामारी की ओर से आंखें बंद रखती है। बता देना जरूरी है कि अवैध रूप से डग्गामारी करने वाली बसें अक्सर हादसे का शिकार होती हैं। रात-रात में मंजिल पर पहुंचने की होड़ होती है, तो इसके लिए ड्राइवर ओवरस्पीड़ दौड़ लगाते हैं और इसी चक्कर में लगातार अनहोनियां करते हैं। रोड एक्सीडेंट के अलावा ऐसी डग्गामार बसों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं मगर पुलिस की सेहत पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

बताया जाता है कि बरेली से जयपुर जाने वाली बसों में जिले के ज्यादातर जरी-जरदोजी करने वाले परिवार होते हैं। जयपुर में बरेली और आसपास के जिलों के हजारों लोग जरी का काम करते हैं। सवारियों की भीड़ का फायदा अपराधी तत्व भी उठाते हैं और डग्गामार बसों में सफर करके बगैर चेकिंग के कुछ भी गलत-सलत यूपी टू राजस्थान या राजस्थान टू यूपी पहुंचाते रहते हैं। उम्मीद की जा रही है कि अपराधी और माफिया की कमर तोड़ने में लगे बरेली के तेजतर्रार एसएसपी प्रभाकर चौधरी की नजर एक बार जयपुर अड्डे पर भी जरूर पड़ेगी। और जिस दिन कप्तान की नजर पड़ेगी, उसी दिन माफिया का खेल खत्म होना शुरू हो जाएगा। अवैध बस और टैक्सी स्टेंडों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सीएएम योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बरेली वासियों को उसी दिन का इंतजार है, जब बरेली टू जयपुर की अवैध कमाई का खेल खत्म होगा।