बरेली: बीबीएल स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रम स्पंदन में झूमे दर्शक, छात्र छात्राओं ने स्टेज पर दिखाए प्रतिभा के हुनर

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न्यूज टुडे नेटवर्क। बरेली के पीलीभीत रोड पर बीबीएल पब्लिक स्कूल में हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम स्पंदन में छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियां देखकर लोगों का तन-मन झूम उठा। भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित इस कार्यक्रम में नन्हें-मुन्नों और बड़े बच्चों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम इतना शानदार था कि अभिभावकों के साथ अतिथिगण भी हर प्रस्तुति के बाद खुद को तालियां बजाने से नहीं रोक सके।  

कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि व विद्यालय प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंघल ने किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रतिभा को निखारने के लिए इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन जरूरी है। विद्यालय के प्रबंधक सर्वेश अग्रवाल ने कहा कि कार्यक्रम के बहाने बच्चों को देश के गौरवशाली इतिहास और शानदार वर्तमान से रूबरू कराने की कोशिश की गई है। प्रबंध समिति के राघव अग्रवाल और माधव अग्रवाल ने शानदार कार्यक्रम के लिए विद्यालय के समस्त स्टाफ को धन्यवाद दिया। 

कार्यक्रम की शुरुआत में देववंदना हुई। देवादिदेव महादेव और अन्य देवी देवताओं के रूप में मंच पर आए बच्चों ने दर्शकों को भक्तिरस में डु़बो दिया। इसके बाद बारी थी फिट रहने के फायदे बताने की। मंच पर शानदार प्रस्तुतियों के साथ बच्चों ने संदेश दिया के स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का निवास होता है।

कठपुतली नृत्य ने जहां भारत की प्राचीन परंपराओं को मंच पर जीवंत किया वहीं दर्शकों को ताली बजाने के लिए भी विवश कर दिया। कठपुतलियों के बाद मंच पर ममता की छांव बिखरी। बच्चों की प्रस्तुति देखकर हर इंसान कुछ देर के लिए अपने बचपन के दिन और दोस्तों की याद में खो गया।

बचपन के दिनों की याद ताजा करने के बाद बारी थी गोआ के सैर सपाटे की। इसी बहाने बच्चों ने यह संदेश दिया- सैर कर दुनिया की गाफिल, जिंदगानी फिर कहां, जिंदगानी गर रही तो, नौजवानी फिर कहां। घूमने-फिरने के बाद बारी थी योगा जी। योग केवल व्यायाम नहीं, जीने की पद्धति भी है। बच्चों ने बड़े लोगों को यह बात बखूबी समझाई।

योगा के बाद मंच पर गुजरात की संस्कृति जीवंत हुई और फिर दर्शक सुर-लय-ताल की त्रिवेणी में देर तक गोते लगाते रहे। गीत संगीत के बाद बच्चों ने संदेश दिया कि एक छोटी सी आशा बड़ी से बड़ी निराशा को समाप्त कर सकती है। सपने देखो और उनके पीछे पूरी शिद्दत से भागो तो वो जरूर पूरे होते हैं।

इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर कुछ देर के लिए विराम लगा और स्कूल की प्रिंसिपल डॉक्टर अल्पना जोशी ने अपनी रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बीबीएल स्कूल के संस्थापकों को याद किया और कहा कि स्कूल सदैव शिक्षाक्षेत्र में नए कीर्तिमान गढ़ेगा।

इसके बाद फिर से गीत-संगीत का सिलसिला शुरू हुआ और मंच पर जीवंत हुई प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य से सजे राज्य उत्तराखंड की संस्कृति। हमारी पहचान उत्तराखंड के बहाने बच्चों ने पहाड़ की कला और संस्कृति से सबको रूबरू कराया। पहाड़ के बाद राजस्थान और पंजाब की संस्कृति के दर्शन हुए। मंच पर थिरके बच्चों को दर्शकों ने तालियों की  गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।

इसके बाद कार्यक्रम समापन की ओर बढ़ा। मधुरम में आत्यात्मिकता के दर्शन कराने के बाद सबने वंदेमारतम गाया। प्रधानाचार्य डॉ़ अल्पना जोशी ने कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों का आभार जताया। उन्होंने विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट भी पढ़ी। उन्होंने कहा कि बीबीएल पब्लिक स्कूलों छात्रों को आधुनिक शिक्षा देने के साथ ही अपनी जड़ों से जोड़े रखने का प्रयास भी कर रहा है। यह कार्यक्रम उसी की एक झलक है। शिक्षकों के संयुक्त प्रयास से बच्चों ने जो प्रदर्शन किया वह वाकई लाजवाब है। बाकी अतिथियों ने भी कार्यक्रम की जमकर तारीफ की।