उन्‍नाव से अखिलेश का चुनावी उद्घोष: कहा भाजपा के लोग लड़वाने का काम करते हैं

लखनऊ से रथ लेकर उन्‍नाव पहुंचे सपा मुखिया, कई स्‍थानों पर हुआ स्‍वागत, निषाद समाज के नेता मनोहर लाल की प्रतिमा का अनावरण किया 

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न्‍यूज टुडे नेटवर्क। यूपी में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने चुनावी उद्घोष कर दिया है। अखिलेश ने आज उन्‍नाव से चुनावी अभियान शुरू किया। लखनऊ से रथ लेकर उन्‍नाव पहुंचे अखिलेश यादव करीब 120 जगहों पर स्‍वागत किया गया। यहां अखिलेश ने निषाद समाज के नेता मनोहर लाल की प्रतिमा का अनावरण किया।

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जनसभा को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग लड़वाने का काम करते हैं। भाजपा ने सरकारी संस्थानों को बेच दिया। पंचायत चुनाव में भाजपा ने नोट का इस्तेमाल किया। सपा सरकार ने सबसे अच्छी पुलिसिंग दी थी। मगर भाजपा सरकार में खराब हो गई।

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा के रहने से बेरोजगारी बढ़ेगी। महंगाई के लिए भाजपा जिम्मेदार है। साढ़े 4 साल में कोई फैक्ट्री नहीं लगी। नवजवानों को भुखमरी के कगार पर खड़ा किया। सपा सरकार बनी तो लोहिया आवास देंगे। लोहिया आवास में बिजली मुफ्त देंगे। लोगों को ब्लैक में दवाएं लेनी पड़ी थी। आज सरकार कहती है कि कोविड से मौतें नहीं हुई। अब तो आंकड़े नहीं बता रही सरकार। बीजेपी कभी सही आंकड़े नहीं बताएगी। मदद न देना पड़े इसलिए आंकड़े छिपाए। BJP ने कहा था कि किसानों की आय दोगुनी कर देंगे। डीजल-पेट्रोल महंगाई कितनी बढ़ी है? आय किसानों की घट गई बढ़ी नहीं।

सपा प्रवक्ता सुनील साजन ने बातचीत में कहा कि अखिलेश यादव उन्नाव में समाज के बड़े नेता मनोहर लाल के कार्यक्रम में शामिल हुए। सपा ने हमेशा से निषाद समाज का सम्मान किया है। इस समुदाय के नेताओं को राजनीतिक स्थान भी दिया है। जबकि भाजपा सिर्फ निषाद समुदाय के साथ होने का दिखावा करती है। यूपी में निषाद, मल्लाह और कश्यप वोट बैंक करीब 4 फीसदी है। अगले साल 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश का यह दांव निषाद वोट बैंक की सियासत से जोड़ कर देखा जा रहा है।

मुलायम के करीबी रहे हैं मनोहर लाल

मनोहर लाल साल 1993 में मुलायम सिंह यादव की सरकार में मत्स्य पालन मंत्री भी रहे थे। मनोहर लाल तब चर्चित हुए थे जब 1994 में फूलन देवी की रिहाई को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे। निषाद के अधिकारों की मांग करने लगे मनोहर लाल ने ही सबसे पहले रेती में खेती का मुद्दा उठाया था। मनोहर लाल को निषाद-बिंद-मल्लाह-कश्यप और लोध जातियों को एकजुट करने के लिए भी जाना जाता है।

मनोहर लाल के बड़े बेटे रामकुमार कहना है कि मनोहर लाल जी ने इन जातियों के बीच रोटी-बेटी का संबंध भी स्थापित किया था। उसके आगे की राजनीति की चर्चा करें तो साल 1994 में मनोहर लाल के निधन के बाद उन्नाव में उनके बेटे दीपक कुमार ने उनकी राजनीतिक विरासत को संभाला। दीपक कुमार सपा से कई बार विधायक और सांसद भी रहे। दीपक के निधन के बाद अब मनोहर लाल की विरासत मनोहर लाल के बड़े बेटे रामकुमार और उनके भतीजे अभिनव संभाल रहे हैं।