पढ़ें, भगवान शिव को प्रसन्न करने वाली कांवड़ की ये सम्पूर्णआरती...
कांवड़ पंथ में इस आरती का है विशेष महत्व
भगवान भोलेनाथ का पवित्र श्रावण मास आरंभ हो चुका है। मान्यता है कि इस पवित्र मास में भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। भगवान शिव को गंगा जल बेहद प्रिय है, इसलिए मात्र एक लोटा जल चढ़ाने से ही भगवान शिव अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते हैं। श्रावण मास में भगवान शिव को कांवड़ में गंगा जल भरकर जल चढ़ाने की परंपरा बड़ी प्राचीन है। अगर आप भी श्रावण मास में गंगा जल कांवड़ में भरकर भगवान शिव को अर्पित करना चाहते हैं तो कांवड़ के नियम और पूजन विधि आदि की जानकारी भी आपको ले लेनी चाहिए।
न्यूज टुडे नेटवर्क। भगवान भोलेनाथ का पवित्र श्रावण मास आरंभ हो चुका है। मान्यता है कि इस पवित्र मास में भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। भगवान शिव को गंगा जल बेहद प्रिय है, इसलिए मात्र एक लोटा जल चढ़ाने से ही भगवान शिव अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते हैं। श्रावण मास में भगवान शिव को कांवड़ में गंगा जल भरकर जल चढ़ाने की परंपरा बड़ी प्राचीन है। अगर आप भी श्रावण मास में गंगा जल कांवड़ में भरकर भगवान शिव को अर्पित करना चाहते हैं तो कांवड़ के नियम और पूजन विधि आदि की जानकारी भी आपको ले लेनी चाहिए।
यहां हम आपको कांवड़ की सम्पूर्ण आरती के बारे में बता रहे हैं। इस संपूर्ण कांवड़ आरती में “साखियां” गायी जाती हैं। जिनका संबंध कांवड़ पंथ की परंपरा से होता है। भगवान भोलेनाथ और मां गंगा को प्रसन्न करने और कांवड़ भरने से लेकर भोले बाबा को जल चढ़ाने तक के बीच के समय में कांवड़िये ये आरती बड़े ही श्रद्धा भाव से गाते हैं।
तो आईए पढ़ें कांवड़ की आरती...
कांवर की आरती (साखी)धूप दीप हम देत हैं, लीजो गंगे माई।
भरा खजाना महादेव का भैंरों लागी थाप।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)
गौमुख से गंगा बहीं, तोड़े सात पहाड़।
हर पौड़ी पूजा भई, पहुंच गए हरिद्वार।।
गंग बड़ी गोदावरी, तीर्थ बड़े प्रयाग।
धारा बड़ी समुद्र की, पाप कटे हरिद्वार।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)कौन तिथि घंटा बजे, कौन तिथि घड़ियाल।
कौन तिथि नौबत बजे, बाबा के दरबार ।।
एकादशी घंटा बजे, द्वादश की घड़ियाल।
तेरस की नौबत बजे, बाबा के दरबार।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)काहे का घंटा बजे, काहे की घड़ियाल।
काहे की नौबत बजे, बाबा के दरबार ।।
सोने का घंटा बजे, चांदी का घड़ियाल।
तांबे की नौबत बजे, बाबा के दरबार।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)कहाँ तुम्हें देवा मिलीं, कहां मिले भगवान।
क्हां तुम्हें भोला मिले, पूरण हों सब काम।।
चंडी में देवा मिलीं, हरिद्वार भगवान।
गोला में भोला मिले, पूरण भए सब काम।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)कौन चढ़ीं देवा मिलीं, कौन चढ़े भगवान।
कौन चढ़े भोला मिले, पूरण होय सब काम।।
सिंह चढ़ी देवा मिली, गरूण चढ़े भगवान।
बैल चढ़े भोला मिले, पूरण भए सब काम।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)भैरों भारी भीड़ में, मैं सुमिरत हू तोय।
जे पथ राखी की, तभी भरोसो मोय।।
महादेव के पंथ में, कोई मत करियो अभिमान।
बूढ़ा बूढ़ा आगे चलें, पीछे चलें जवान।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)सीता पद की कोठरी, चंदन लगे किवाड़।
ताले लागे प्रेम के, खोलो कृष्ण मुरार।।
चित्रकूट के घाट पे, भई संतन की भीड़।
तुलसीदास चंदन घिसे, तिलक देत रघुवीर।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)लाली मेरे लाल की, जित देखूं उत लाल।
लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गयी लाल।।
गुरू गोबिन्द दोउ खड़े, काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरू आपने, गोविन्द दियो बताय।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)राम झरोखे बैठकर, सबका मुजरा लीन्ह।
जैसी जिसकी चाकरी, वैसा बाको दीन्ह।।
राम बढ़ाए सब बढ़े, बढ़कर भयो ना कोय।
बढ़ बढ़ कर रावण, बढ़ा पल में दीन्हो खोय।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)
बाबा सब कहें, मैया कहे ना कोय।
बाबा के दरबार में, मैया कहे सो होय।।
चलत चलत छाले पड़े, कंधा बांस नहीं लेत।
कहियो भोले नाथ से, हाथ पकड़कर खींच।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)तुम दाता मैं मंगता, दिया तुम्हारा खाउं।
तुमसे दानी छोड़कर, किस घर मांगन जाउं।।
भाई बाप के लाड़ले, घी की चुपड़ी खाएं।
महादेव के पंथ में, सूखे टिक्कड़ खाएं।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)तुलसी पर घर जाय के, दुख ना कहियो कोय।
भार गंवायो आपने, बांट सके ना कोय।।
बाबा बुलावे बाग में, हम जानि कछु देत।
जल की छींटा देकर, भैरों धक्का देत।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)शिव समान दाता नहीं, बिपति निवारण हार।
लज्जा सबकी राखियो, वर्धा के ओ सवार।।
हमने तुमसे कब कही, तुम जईयो हरिद्वार।
अपनी मुक्ति कारण, तुम पहुंच गए हरिद्वार।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंछी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।।
दाता दाता मर गए, रह गए मक्खी चूस।
लेना देना कुछ नहीं, लड़ने को मजबूर।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)भजन करूं भोजन करूं, गावहुं ताल तरंग।
श्री महादेव जी के चरण में, मन मेरा लगे अनंत।।
बार बार वर मांगहुं, हरषि देउं श्री रंग।
पा सरोज अनुपाहिनी, भक्ति सदा सत्संग।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)रे मन क्यूं भटकत फिरत, कर अभाव सो ध्यान।
ध्याने भव भय हरण हित, कियो हलाहल पान।।
बार बार विनती करूं, धरूं चरण का माथ।
निज पथ भक्ति भाव, मोहि दियो उमापति नाथ।।
(बोले के भाई बम भोले श्री गंग)हर हर महादेव

