Kailash Mansrovar Yatra - जानिए कहां से शुरू होती है कैलाश मानसरोवर यात्रा, इन सावधानियों को बरतना है जरुरी 

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Kailash Mansrovar Yatra - कैलाश मानसरोवर यात्रा (Kailash Mansrovar Yatra) अगर आप देश के भी किसी कोने से आदि कैलाश या ऊँ पर्वत (Om Parvat) के दर्शन करने के लिए आ रहें हैं, तो आपको रास्तों की सही जानकारी होना बहुत जरूरी है. इसलिए आज हम आपको अपने इस आर्टिकल में बताएँगे कि कैसे आप देश के किसी भी कोने से आदि कैलाश और ऊँ पर्वत तक कैसे पहुँच सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले आपको कुमाऊँ के द्वार हल्द्वानी पहुँचना होगा, आप देश की राजधानी दिल्ली से हल्द्वानी तक ट्रेन या बस के द्वारा पहुँच सकते हैं। अगर हवाई मार्ग से आना चाहते है तो आपको पंतनगर एयरपोर्ट सबसे नजदीक पड़ता है।


कैलाश मानसरोव यात्रा  की पिथौरागढ़ जनपद से होकर जाती है कुमाऊं मण्डल (KMVN) विकास निगम द्वारा संचालित कैलाश मानसरोवर (Kailash Mansrovar Yatra KMVN) यात्रा चीन की सीमा में स्थित होने के कारण श्रद्वालुओं कैलाश मानसरोवर के दर्शन यात्रा करने के लिए नई दिल्ली (New Delhi) स्थित विदेश मंत्रालय से अनुमति लेनी पड़ती है। जिन यात्रियों को अनुमति मिल जाती है उनके यात्रा की व्यवस्था कुमाऊं मण्डल विकास निगम नई दिल्ली से भारत की सीमा लीपूपास तक यात्रा करता है। उसके बाद चीन सीमा में चीन की (China Border) सरकार के द्वारा व्यवस्था की जाती है। 


यात्रा प्रारम्भ करने से पूर्व नई दिल्ली में स्वास्थय परीक्षण किया जाता है उनमें से जिन यात्रियों को स्वस्थ होने का प्रमाण पत्र मिलता है उन्हें यात्रा की अनुमति नपलच्यों गुंजी तक मिलती है। गुंजी पहुँचने पर पुनः गुंजी में आईटीबीपी के डाक्टरों के द्वारा स्वास्थ परीक्षण किया जाता है तथा स्वस्थ पाये जाने पर ही आगे की यात्रा करने के की अनुमति मिलती है। यात्रियों की सुरक्षा हेतु भारतीय सीमा में आई टी बी पी के जवान यात्रियों के साथ चलते है। 


कैलाश मानसरोवर यात्रा के रूट - 
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए दिल्ली के बाद यात्रियों का पहला पड़ाव हल्द्वानी के काठगोदाम (Haldwani - Kathgodam) होता है। यात्रियों का रात्रि विश्राम अल्मोडा जिले  में होता हैं। फिर यात्री डीडीहाट से पिथौरागढ़ में प्रवेश करते हैं। जहां उनको धारचूला से तवाधाट में मनमोहक नजारें देखने को मिलते हैं। कुमाऊ मण्डल विकास निगम की यह यात्रा सिरखा से घट्टाबगड,ज्योलिंगकांग, नपलच्यों से गुंजी (Gunji) पहुंचता है। यात्रियों का दल कुटी में स्थित पंडव किला को दिखाने के बाद आदि कैलाश के दर्शन कराया जाता है। कालापानी, नाभिढ़ाग से तकलाकोट कैलाश मानसरोवर (चीन) पहुँचती है। यहाँ सड़क बनने के कारण अब नदी किनारे तक जाया जा सकता है। 


ओम पर्वत (Om Parvat) - इसे आदि कैलाश या छोटा कैलाश भी कहा जाता है। यह स्थान पिथौरागढ़ (Pithoragarh) के सुदूर उत्तर में तिब्बत की सीमा गर्बियाग पर स्थित है। यहाँ जाने के लिए पहले नपलच्यों गुंजी के आगे 24 किमी पहले पैदल चलना पड़ता था। एकान्त क्षेत्र में स्थित शिव का यह स्थल बहुत रमणीय हैं। यहाँ पार्वती कुंड, गौरी कुण्ड भीम की खेती, पाण्डव किला और (कुटी में) हैं। छियालेख गब्र्याग में चेक पोस्ट भी है जहाँ हमारी आईडी की चेंकिग होती है। आधे रास्तों मे और मनेला, गुंजी तथा कालापानी में भी चेंकिग होती है। कालापानी में - व्यास गुफा,ओम,पर्वत,नागपर्वत (शेषनाग की पहाड़ी) जोलिकांग में गणेश पर्वत, कालापानी से ही काली नदी का उदगम् स्थल है। नाभीढ़ाग-ऊँ पर्वत जाने में पहले जब पैदल जाते थे तब उन दिनों में 8 पड़ाव आते थे। पहला-पांगू ,नारायण आश्रम ,सिर्खा,गाला, मालीपा, मालपा ,बुदी, गर्ब्याल ,नपलच्यों गुंजी, कालापानी हैं।


आदि कैलाश एवं ऊँ पर्वत भारतीय सीमा में स्थित है। आदि कैलाश ज्योंलिंगकांग से आगे उच्च हिमालय में स्थित है, तथा ऊँ पर्वत लीपू पास के निकट नाबीढ़ाग के  सामने के उच्चे पहाड़ में स्थित है। यहाँ की यात्रा के लिए पहले धारचूला से ईनर लाईन पास बनाया जाता है। ईनर लाईन पास मिलने के बाद यात्रा प्रारम्भ की जाती है। सीमान्त क्षेत्र में सुरक्षा ऐजेन्सियों के द्वारा पास माँगे जाने पर उन्हें पास दिखाना जरूरी है। यात्रा टैक्सी व पैदल जैसे यात्री चाहे कर सकता है। रहने खाने के लिए धारचूला ,बुदी,नपलच्यों,गुंजी,नाबी व कुटी में होमस्टे बने है। 


कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए जरूरी सलाह होती है की वह सामान कैलाश मानसरोवर आदि कैलाश एवं ऊँ पर्वत अत्यधिक ऊचाई में होने के कारण यहाँ की यात्रा में जाने से पहले पर्याप्त मात्रा में गरम कपड़े अपने साथ रखना जरूरी है। यात्रियों को विषेशकर पैदल यात्रियों को रेनकोट, छाता, टार्ज आदि जरूरी सामान अपने साथ रखना चाहिए।