‘’हल्द्वानी - मंडाण,दि आनन्दा एकेडमी में उत्तराखण्ड की संस्कृति का शानदार प्रदर्शन’’
हल्द्वानी - ( जिया सती ) 09 नवम्बर 2025 को दि आनन्दा एकेडमी, हल्द्वानी में उत्तराखण्ड स्थापना दिवस और राज्य की रजत जयंती बड़े हर्षोल्लास के साथ “मंडाण: Celebration of Foundation Day” के रूप में मनाई गई। विद्यालय परिसर में बच्चों के उत्साह और सांस्कृतिक जोश ने एक विशेष वातावरण बना दिया। इस अवसर पर विद्यालय को उत्तराखण्ड की लोक परंपरा और रंगों से सजाया गया था।
कार्यक्रम की शुरुआत माता नंदा भवानी और नारायणी देवी की वंदना से हुई, जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद छोटे-छोटे बच्चों ने उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, लोकगीतों, और प्रेम कथाओं पर आधारित सुंदर प्रस्तुतियाँ दीं। साथ ही नुक्कड़-नाटक के माध्यम से उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, “पेड़ बचाओ – पेड़ लगाओ” जैसे महत्वपूर्ण संदेश भी दिए।
कक्षा 3 से 5 तक के विद्यार्थियों ने मंच पर नृत्य, गीत और नाट्य प्रस्तुतियों के जरिए अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया। बच्चों की प्रस्तुतियों में जहाँ उत्तराखण्ड की परंपरा झलक रही थी, वहीं आधुनिकता का संगम भी देखने को मिला। दर्शक बच्चों के उत्साह और आत्मविश्वास से प्रभावित होकर तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गुंजायमान करते रहे।
विद्यालय के प्रबंधक श्री भूपेन्द्र सिंह बिष्ट ने कहा कि “मंडाण” जैसे आयोजन न केवल बच्चों की प्रतिभा को मंच प्रदान करते हैं बल्कि उन्हें अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़े रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में सांस्कृतिक मूल्यों का विकास आवश्यक है, ताकि वे समाज के प्रति संवेदनशील और जागरूक नागरिक बन सकें।
मुख्य अतिथि, ‘सेवा संकल्प फाउंडेशन’ की सचिव अधिवक्ता श्रीमती सुखप्रीत कौर ने बच्चों के प्रयासों की सराहना की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
विद्यालय की निदेशिका श्रीमती दीक्षा बिष्ट और प्रधानाचार्या श्रीमती माया बिष्ट ने भी सभी विद्यार्थियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों से विद्यालय और अभिभावकों का मान बढ़ाया है। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों, अभिभावकों और शिक्षकों ने बच्चों के प्रदर्शन और विद्यालय के प्रयासों की प्रशंसा की। “मंडाण” समारोह ने बच्चों को न केवल सांस्कृतिक अनुभव दिया, बल्कि समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में उनकी भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया।
