''ग्राफिक एरा अस्पताल की बड़ी उपलब्धि, दुर्लभ सर्जरी से बचाई महिला की जान, गर्भवती महिला के पेट से निकाले 20 फाइब्रॉइड्स''
देहरादून -( जिया सती ) ग्राफिक एरा अस्पताल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक अनोखी उपलब्धि हासिल की है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक गर्भवती महिला के पेट से एक साथ 20 फाइब्रॉइड्स निकालकर सुरक्षित प्रसव कराया, जो अपने आप में एक दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण मामला है।
इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने का श्रेय कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. दिव्या मिश्रा को जाता है। उनकी विशेषज्ञता और अनुभव के कारण यह कठिन सर्जरी संभव हो सकी।
महिला, जिसकी उम्र 34 वर्ष थी, गर्भावस्था के दौरान ही फाइब्रॉइड्स की समस्या से ग्रसित पाई गई थी। हालांकि, शुरुआत में इन गांठों की संख्या का अंदाजा नहीं था, लेकिन बाद में जांच में उनकी संख्या 20 निकली।
गर्भावस्था के लगभग साढ़े आठ महीने में महिला को लेबर पेन होने पर अस्पताल लाया गया। उस समय उसकी स्थिति पहले से ही संवेदनशील थी क्योंकि उसका ब्लड प्रेशर भी हाई था।
डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि सिजेरियन डिलीवरी के साथ-साथ सभी फाइब्रॉइड्स को भी निकालना था। ऐसा करते समय अत्यधिक रक्तस्राव होने का खतरा बना रहता है, जिससे मरीज की जान को खतरा हो सकता था।
ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया और सर्जरी को तेजी से पूरा किया, जिससे रक्तस्राव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सका। यह उनकी सूझबूझ और कौशल का बेहतरीन उदाहरण है।
निकाले गए फाइब्रॉइड्स में सबसे बड़ा आकार 8×6 सेंटीमीटर का था, जबकि सबसे छोटी गांठ 2×2 सेंटीमीटर की थी। इतनी विविधता और संख्या में गांठों को निकालना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
सफल ऑपरेशन के बाद महिला और नवजात शिशु दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। कुछ दिनों की देखभाल के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई।
डॉक्टरों के अनुसार, भारत में इस तरह का यह पहला मामला है, जबकि दुनिया में यह दूसरा ऐसा केस माना जा रहा है। इससे पहले नाइजीरिया में एक महिला के शरीर से 38 फाइब्रॉइड्स निकालने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था।
इस उपलब्धि पर डॉ. कमल घनशाला ने पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि संस्थान का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों और अनुभवी विशेषज्ञों के माध्यम से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है।
