‘’हल्द्वानी-बिड़ला स्कूल में एल्केमी 2025 का हुआ 'आत्मबोध' आयोजन, स्टूडेंट्स के शानदार प्रदर्शन देख रही हुए मंत्रमुग्ध ‘’
हल्द्वानी -( जिया सती ) आर्यमान विक्रम बिड़ला इंस्टिट्यूट ऑफ़ लर्निंग में वार्षिकोत्सव एल्केमी 2025 का आयोजन भव्यता और उत्साह के साथ हुआ। इस वर्ष कार्यक्रम का केंद्रीय विषय “आत्मबोध – स्वयं की खोज” रखा गया, जिसे विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से अद्भुत रूप से प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में आए वरिष्ठ रक्षा वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार जोशी और उनकी धर्मपत्नी डॉ. चेतना तिवारी जोशी ने अन्य विशिष्ट अतिथियों के साथ मिलकर समारोह का उद्घाटन किया।
विद्यालय के प्रबंध तंत्र के प्रमुख सदस्यों — प्रधानाचार्य श्री प्रवेश मेहरा, उप प्रधानाचार्य श्री प्रकाश कुमार, प्रधानाध्यापिका श्रीमती वंदना टम्टा और श्री सुरेश बाजपेयी — ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की शुरुआत को औपचारिक रूप दिया।
अतिथियों में जॉइंट मजिस्ट्रेट पौड़ी एवं पूर्व छात्रा सुश्री दीक्षिता, सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. गोविंद सिंह तितियाल, गृह मंत्रालय की उप निदेशक और पूर्व छात्रा सुश्री प्रीति तिवारी तथा सेंचुरी पल्प एंड पेपर के वरिष्ठ पदाधिकारी भी सम्मिलित रहे।
विद्यालय की हेड गर्ल मनस्विनी परगाईं ने सभी सम्मानित अतिथियों का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। उनके स्वागत भाषण ने आयोजन के प्रारम्भिक माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया।
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत विद्यालय के ऑर्केस्ट्रा ने शानदार स्वागत गीत और सुनने वालों में देशभक्ति की भावना जगाने वाले ‘वंदे मातरम’ के सुमधुर स्वरों से की। इसी क्रम में प्रसिद्ध रेन सॉन्ग और अर्थ सॉन्ग की मनमोहक प्रस्तुति भी दी गई।
इसके बाद छात्रों द्वारा प्रस्तुत देव आवाहन की शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया। दर्शकों ने इस प्रस्तुति की भरपूर सराहना की।
प्रधानाचार्य श्री मेहरा ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि विद्यालय हर क्षेत्र में छात्रों के सर्वांगीण विकास हेतु समर्पित है। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को अपने भीतर छिपी प्रतिभाओं को मंच मिलता है।
कार्यक्रम का अगला हिस्सा “माटी की गूँज” के नाम से प्रस्तुत किया गया, जिसमें भारत की विविध संस्कृति और एकता का आकर्षक चित्रण किया गया। छात्रों ने अलग-अलग राज्यों के लोकनृत्यों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत को मंच पर उतारा।
गुजरात के गरबा, डांडिया, कर्नाटक के यक्षगान, महाराष्ट्र के कोली नृत्य और उत्तराखंड की नंदा राजजात जैसी झांकियों ने दर्शकों को विविध रंगों से भरपूर यात्रा पर ले लिया। विशेषकर नंदा राजजात की प्रस्तुति ने भक्तिभाव का अद्भुत वातावरण बनाया।
माँ को समर्पित समसामयिक नृत्य ने सभी दर्शकों को भावुक कर दिया। इस नृत्य में माँ और बच्चे के पवित्र रिश्ते, वात्सल्य और निस्वार्थ प्रेम को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ मंचित किया गया।
इसके पश्चात विद्यालय के इंटरैक्ट क्लब द्वारा वीरांगना बिशनी देवी पर आधारित पुरस्कृत डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। यह फिल्म 3110 इंटरैक्ट क्लब द्वारा आयोजित तिरंगा डॉक्यूमेंट्री प्रतियोगिता में 142 प्रविष्टियों में से प्रथम स्थान प्राप्त कर चुकी है।
अंग्रेजी नृत्य-नाटिका “द विजर्ड ऑफ ओज़” कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही। इस नाट्य प्रस्तुति में डोरोथी की साहसिक यात्रा के माध्यम से आत्मबोध यानी स्वयं को पहचानने की प्रक्रिया को बहुत रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. संजीव जोशी ने अपने संबोधन में विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों द्वारा मिलकर किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की प्रतिभा, अनुशासन और समर्पण ही ऐसे कार्यक्रमों की वास्तविक सफलता है।
अंत में हेड बॉय तेजस जोशी ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, पूर्व छात्रों, पुलिस प्रशासन, मीडिया और आयोजन दल का धन्यवाद किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ, साथ ही कला विभाग द्वारा लगाई गई शानदार पेंटिंग और कलाकृतियों की प्रदर्शनी ने सभी का मन मोह लिया।
