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उत्तराखंड के प्रमुख तीथस्थलो में सबसे प्रमुख है “हरि का द्वार”, हरिद्वार

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हरिद्वार-न्यूज टुडे नेटवर्क। हरिद्वार जहां से पतित पावनी, पाप नाशनि मां गंगा पर्वतो को छोड़ धरती पर आती हैं। दूर से दिखते अडिग पर्वत, कलकल कर बहती पवित्र मां गंगा, दूर दूर से आए श्रद्धालु और चारो ओर गूंजते गंगा मईया के जय कारे। ये रमणीय दृश्य आँखों के द्वार से होता हुआ सीधा मन में बस जाता है। हरिद्वार को उत्तराखंड के पवित्र चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। ये भगवान शिव और भगवान विष्णु की भूमि भी है इसलिए इसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। देवभूमि हरिद्वार में कई अति मनोरम मंदिर व दर्शनीय स्थल है। यहाँ के बाजार बड़े ही लुभावने है, जहां हर तरफ रोशनी है और रौनक भी।

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हरिद्वार का प्राचीन नाम है मायापुरी

हरिद्वार का प्राचीन पौराणिक नाम “मायापुरी” है। यह पवित्र शहर भारत की जटिल संस्कृति और प्राचीन सभ्यता का खजाना है। भारत के हर प्रांत के लोग यहाँ आते है और गंगा जी के पवित्र जल को अपने साथ घर ले जाते है। गंगा घाट व बाजारों में रंग बिरंगी बोतलों से सजी दुकाने देखीं जा सकती हैं। पवित्र गंगा नदी के किनारे बसे “हरिद्वार” का शाब्दिक अर्थ “हरी तक पहुचने का द्वार” है। कहा जाता है कि पौराणिक समय में समुन्द्र मंथन में अमृत की कुछ बुँदे हरिद्वार में गिर गयी थी। इसी कारण हरिद्वार में “कुम्भ का मेला” आयोजित किया जाता है। बारह वर्ष में मनाये जाने वाला “कुम्भ के मेले ” का हरिद्वार एक महत्वपूर्ण स्थान है।

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सायं काल की गंगा आरती है बड़ी मनोरम

सायं काल की गंगा आरती का दृश्य बड़ा ही मनोरम होता है। गंगा आरती एक धार्मिक प्रार्थना है , जो हरिद्वार में हर-की-पौड़ी घाट पर पवित्र गंगा नदी के किनारे पर्यटक और भक्त इस आरती का आनंद लेते हैं। यह प्रकाश और ध्वनि का एक अनुष्ठान है ,जहां पुजारी आरती के साथ मंदिर की घंटी बजने के साथ प्रार्थना करते हैं। गंगा जल में दिखती आरती की अग्नि की ज्वालाऐंं यूँ लगती है जैसे सैकडों दीपक गंगा जल में डुबकियां लगा रहे हों। इस पवित्र नदी में स्नान का समारोह “कुम्भ मेला” के रूप में जाना जाता है , जो कि हर 12 वर्ष में हर की पौड़ी घाट में होता है । गंगा नदी के बारे में यह कहा जाता है कि लोग नदी में स्नान करते हैं , वे “मोक्ष” (निर्वाण) प्राप्त करते हैं ।

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चंडी देवी मंदिर

चंडी देवी मंदिर उत्तराखण्ड की पवित्र धार्मिक नगरी हरिद्वार में नील पर्वत के शिखर पर स्थित है। यह गंगा नदी के दूसरी ओर अवस्थित है। यह देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। चंडी देवी मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है।किवदंतियों के अनुसार चंडी देवी ने शुंभ-निशुंभ के सेनापति ‘चंद’ और ‘मुंड‘ को यहीं मारा था। जबकि एक अन्य लोककथा के अनुसार नील पर्वत वह स्थान है, जहाँ हिन्दू देवी चंडिका ने शुंभ और निशुंभ राक्षसों को मारने के बाद कुछ समय आराम किया था।

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मनसा देवी मंदिर

मनसा देवी मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है जो हरिद्वार शहर से लगभग 3 किमी दूर स्थित है। यह मंदिर हिंदू देवी मनसा देवी को समर्पित है , जो ऋषी कश्यप के दिमाग की उपज है । कश्यप ऋषी प्राचीन वैदिक समय में एक महान ऋषी थे। मनसा देवी, सापों के राजा नाग वासुकी की पत्नी हैं। यह मंदिर शिवालिक पहाडय़िों के बिल्व पर्वत पर स्थित है और इस मंदिर में देवी की दो मूर्तियाँ हैं। एक मूर्ति की पांच भुजाएं एवं तीन मुहं है एवं दूसरी अन्य मूर्ति भुजाएं हैं।

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सप्तऋषि आश्रम

हर-की-पौड़ी से 5 किमी दूर स्थित यह आश्रम हरिद्वार के प्रसिद्ध आध्यात्मिक विरासत स्थलों में से एक है। एक हिंदू लोककथा के अनुसार, यह आश्रम सात ऋषियों का आराधना स्थल था 7 वैदिक काल के ये प्रसिद्ध सात साधू महा ऋषि- कश्यप, वशिष्ठ, अत्री, विश्वमित्र, जमदादी, भारद्वाजा और गौतम की मेजबानी के लिए प्रसिद्ध है 7 इस आश्रम को ध्यान के लिए और शांत माहौल आदर्श के लिए जाना जाता है । यह भी माना जाता है कि गंगा इस स्थान पर सात धाराओं में खुद को विभाजित करती है ।

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अन्य मंदिर भी हैं यहां

हरिद्वार में न जाने कितने ही मंदिर है, सबकी अपनी अपनी महिमा है। इन में से कुछ है माया देवी मंदिर जो की माया देवी को समर्पित है, दक्ष महादेव मंदिर , जो भगवान शिव को समर्पित है और कहा जाता है की यहीं पर दक्ष प्रजापति ने वह यज्ञ किया था जिस में महादेव को आमंत्रित न करने पर तथा यज्ञ स्थल पर शिव का अपमान किये जाने से देवी सती अपने पिता दक्ष पे क्रोधित हो कर यज्ञ की अग्नि में देह त्याग कर दिया था। भारत माता मंदिर जो की आधुनिक युग का एक मंदिर है। यह एक आठ मंजिला भव्य मंदिर है।

कब और कैसे जाएं हरिद्वार

  • हरिद्वार में श्रद्धालु हर मौसम, हर महीने में आते है पर गर्मियों की छुट्टियों में, सावन के महीने में व कुम्भ के मेले के दौरान यहाँ काफी भीड़ रहती है।
  • हरिद्वार रेलवे स्टेशन देश के सभी मुख्य शहरों द्वारा रेल और बस द्वारा जुड़ा हुआ है। सबसे नजदीक हवाई अड्डा जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून है।
  • हरिद्वार में रहने के उचित प्रबंध है। अनेक धर्मशाला, लॉज व होटल है जिनमे आराम से रहा जा सकता है। यात्री अपने खर्चे के अनुसार जगह ढूँढ़ सकते हैं।
  • हर की पौड़ी पर महिलाओं के लिए अलग घाट बना हुआ है। यह एक निशुल्क घाट है जिसका रख रखाव गंगा सभा की ओर से किया जाता है।
  • मनसा देवी व चंडी देवी जाने के लिए उडऩ खटोला एक अच्छा मार्ग है। मनसा देवी मंदिर के उडऩ खटोला की टिकट लेते समय चंडी देवी में टिकट की कतार में लगने से बचने के लिए मनसा देवी से चंडी देवी तक जाने की ट्रांसपोर्ट की सयुंक्त टिकट लें। मनसा देवी मंदिर और चंडी देवी मंदिर प्रांगण में खाने पीने की उचित व्यवस्था है।