उत्तराखंड-मिठाइयों में मिलाए जा रहे है ऐसे हानिकारक केमिकल, जानिए मिलावटी मिठाईयों का ये राज

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त्योहारों का समय आते ही मीठाइयों का सीजन भी बड़ जाता है जिस कारण अक्सर मिठाइयों में मिलावट काफी मात्रा में होती है। इन अवसरों पर व्यापारी दुकानों में मिठाइयों को ज्यादा केमिकल से भरपूर बना देते है और मिठाइयों में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थो का उपयोग कर देते है। मिठाइयों को ताजा रखने के लिए दुकानदार उनमें स्टार्च, सोडा, यूरिया, डिटर्जेंट जैसे पदार्थो को मिला देते है।

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ये मिलावटे ज्यादातर बडे़ त्योहारों जैसे दिपावली व होली आदि पर देखने को मिलती है। होली जैसे त्योहारों में प्रत्येक घर में मिठाइया बनाई जाती है। जिसके लिए हर घर में करीब एक किलो मावा खरीदा जाता है। और सस्ते के चक्कर में पढ़कर लोग मिलावटी मिठाइयां ले आते है। बड़े त्योहारों में अकेले हल्द्वानी में ही पांच क्विंटल तक मावे की खपत होती है। कुछ समय पहले सुरक्षा विभाग एवं प्रशासन ने मिलावटी के दौरान छापेमारी का कार्य किया था। जिस दौरान टीम ने कई मात्रा में लावारिस मावा बरामद किया। जानकारी के अनुसार यह मावा उत्तरप्रदेश से अल्मोड़ा को भेजा जा रहा था। मिठाइयों में मिलावटों से शरीर को काफी नुकसान होता है। जो फूड प्वाइजनिंग जैसी बिमारियों को जन्म देता है जिससे किडनी व लीवर में काफी नुकसान हो जाता है। और त्वचा से सम्बंधित रोग भी हो जाते है।

ऐसे करे मिलावटी मिठायों की पहचान

शुद्ध मावा पानी में आसानी से घुल जाता है जबकी पानी में सिंथेटिक मावा मिलता है तो उसके कई टुकडे हो जाते है। इसके अतिरिक्त मिलावटी मिलावटी मिठाईयों को पहचानने के का एक और तरीका भी है। अगर मावे को हाथ में रगडकर वह दानेदार जैसा प्रतीत होता है तो वह मावा असली है उसमें कोई भी मिलावट नही है और जब मावे को हाथ में मसलकर उसमें कुछ भी नही बचता तो वह मावा शत प्रतिशत मिलावटी है।

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