उत्तराखंड सरकार ने क्रय वरीयता नीति में स्टार्ट को दी छूट, जानिए क्या है खास

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्टार्टअप (नवचार आइडिया) कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए नियमों में ढील देने का फैसला किया है। स्टार्ट अप को प्रोत्साहन देने के लिए क्रय वरीयता नीति में उन्हें विशेष छूट दी है। उत्तराखण्ड में प्राकृतिक संसाधनों से सम्बन्धित स्टार्टअप की प्रबल सम्भावनाएं है। टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए स्टार्ट अप से कोई फीस नहीं ली जाएगी। स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिये कई प्रोत्साहनों की घोषणा की। वहीं, वास्तविक टर्नओवर और अनुभव की शर्त भी नहीं होगी। नीति के मुताबिक सरकारी विभागों को 25 प्रतिशत खरीद एमएसएमई उद्योगों व स्टार्ट अप कंपनियों से करनी होगी। एमएसएमई विभाग ने स्टार्ट अप क्रय वरीयता नीति जारी कर सभी विभागों को अनुपालन करने के निर्देश दिए हैं।

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नवाचार आइडिया (स्टार्ट अप) को बिजनेस के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार उन्हें प्रोत्साहित कर रही है। स्टार्ट अप नीति के बाद सरकार ने स्टार्ट अप कंपनियों के उत्पादों को खरीदने के लिए क्रय वरीयता नीति लागू कर दी है। जिसमें स्टार्ट अप को ने विशेष छूट प्रदान की है। एमएसएमई उद्योगों से माल खरीदने के लिए सरकारी विभाग टेंडर प्रकिया को अपनाते हैं। जिसमें टर्न ओवर, अनुभव प्रतिभूति राशि, टेंडर फीस समेत कई तरह की शर्त रखी है, लेकिन स्टार्ट अप के लिए इन सभी में छूट दी गई है। क्रय विरीयता नीत में सरकारी विभागों में 25 प्रतिशत क्रय एमएसएमई और स्टार्ट अप से करना अनिवार्य किया गया है।  सरकार का मनना है कि प्रोत्साहन मिलने से स्टार्ट अप को अपना बिजनेस करने में मदद मिलेगी। जिसमें दूसरों को भी रोजगार मिल सकेगा। बता दें कि राज्य सरकार ने अब तक 38 स्टार्ट अप को मान्यता दी है। जबकि केंद्र सकार से 60 स्टार्ट अप को मान्यता दी गई है।

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स्टार्ट अप के लिए सुविधा

सूबे में स्टार्ट अप को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने स्टार्ट अप नीति बनाई है। जिसमें ए श्रेणी के जिलों में व्यवसाय स्थापित करने के लिए मासिक भत्ता मिलेगा। जिसमें सामान्य वर्ग को 10 हजार, एससी, एसटी, महिला, दिव्यांग वर्ग को 15 हजार (प्रति स्टार्ट अप) मासिक भत्ता एक साल तक दिया जाएगा। इसके साथ ही नए उत्पाद की मार्केटिंग के लिए सामान्य वर्ग के स्टार्ट अप को 5 लाख और एससी, एसटी व महिला वर्ग को 7.5 लाख तक की सहायता सरकार देगी। एमएसएमई नीति के अनुसार स्टांप ड्यूटी में छूट मिलेगी। स्टार्ट अप उद्यमी की ओर से प्रदेश के भीतर ही माल की आपूर्ति करने पर एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति की जाएगी। मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटरों को तीन साल की अवधि तक संचालन एवं प्रबंधन खर्च के रूप में दो लाख प्रति वर्ष दिया जाएगा।

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स्टार्ट अप के लिए क्रय वरीयता नीति में छूट

उद्योग विभाग के निदेशक सुधरी चंद्र नौटियाल का कहना है कि सरकार ने स्टार्ट अप के लिए क्रय वरीयता नीति में छूट दी है। टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए स्टार्ट अप को न तो टेंडर फीस जमा करनी होगी और न ही प्रतिभूति राशि देनी होगी। टर्नओवर व अनुभव की शर्त स्टार्ट पर लागू नहीं होगी। इससे सरकारी खरीदी में स्टार्ट अप को अपना माल बेचने का मौका मिल सकेगा।

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