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उत्तर प्रदेश के इस अद्भुत कुंए में स्नान करने मात्र से दूर हो जाते हैं सारे रोग! मिलता है समस्त तीर्थों का पुण्य

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आज हम आपको एक ऐसे अद्भुत कुएं के बारे में बताने जा रहे हैं जिस पर शायद आपको को विश्वास न हो, लेकिन जब आप वहां जाएंगे तो आपको वहां के बारे में जानकर हैरानी जरूर होगी। यहां पर आस्था का सैलाब देखकर इस अद्भुत कुएं से जुड़ी कहानियों पर यकीन करने को आप मजबूर हो जाएंगे। इस अद्भुत कुएं के पानी को सेवन करने के लिए सिर्फ उत्तर प्रदेश के लोग ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रदेशों से भी लोग यहां पहुंचते हैं।

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बांदा और चित्रकूट के मध्य है यह कुआं 

यदि आप इस कुएं को देखना चाहते हैं तो आपको उत्तर प्रदेश के जिले बांदा पहुंचना होगा। यह अनोखा कुआं जिला बांदा से चित्रकूट की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित है। जब आप इस कुएं के पास पहुचंगे तो आप खुद ही हैरान रह जायेंगे। आप विचार करेंगे कि एक छोटे से गांव में आखिर लोगों की इतनी बड़ी भीड़ क्यों और कैसे है। आपको बता दें कि जिस गांव में यह अद्भुद कुआं स्थित है उसको “भरतकूप गांव” के नाम से जाना जाता है। वैसे तो यह छोटा सा गांव है पर यहां हर समय लोगों की भीड़ लगी रहती है ताकि वे इस कुएं के जल से स्नान कर सकें। दरअसल, भारत के कोने-कोने से यहां पर लोग इस अद्भुत कुएं के पानी और स्नान करने के लिए आते हैं।

कुष्ठ रोग एवं असाध्य रोग हो जाते हैं ठीक

दिनभर भरतकूप गांव में मेला सा लगा रहता है। लोग यहां पर मौजूद मंदिर के दर्शन कर भरतकूप के पानी से स्नान किए बगैर नहीं जाते हैं। यहां पर आने वाले लोगों की अगर मानें तो इस कुएं के पानी से स्नान करने के बाद कुष्ठ रोग एवं अन्य असाध्य रोग ठीक हो जाते हैं। इसी गांव के निवासी का कहना है कि जीवन में कोई भी दिन ऐसा नहीं गया, जब उन्होंने इस कूप पर स्नान न किया हो।

उन्होंने बताया कि जब से उन्होंने होश संभाला है, तब से वह इस अद्भुत कुएं को देख रहे हैं। कहा कि उनके पूर्वज बताया करते थे कि जब प्रभु श्रीराम 14 वर्ष का वनवास काटने के लिए चित्रकूट आए थे, उस समय भरत जी अयोध्या की जनता के साथ उन्हें यहां मनाने आए थे। साथ में प्रभु का राज्याभिषेक करने के लिए समस्त तीर्थों का जल भी लाए थे, लेकिन भगवान राम 14 वर्ष वन में रहने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ थे।

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इस पर भरत जी काफी निराश हुए और जो जल व सामग्री प्रभु के राज्याभिषेक को लाए थे। उसको इसी कूप में छोड़ दिया था और भगवान राम की खड़ाऊ लेकर लौट गए थे। तब से ही इस कुएं को भरतकूप के नाम से जाना जाता है। यहां पर बना भरतकूप मंदिर भी अत्यंत भव्य है। इस मंदिर में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न की मूर्तियां विराजमान हैं। सभी प्रतिमाएं धातु की हैं। वास्तुशिल्प के आधार पर मंदिर काफी प्राचीन है।

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मकर संक्रांति पर यहां लगता है मेला

यहां बुंदेली शासकों के समय मंदिर का निर्माण हुआ था। इस कूप में स्नान से समस्त तीर्थों का पुण्य तो मिलता ही है साथ ही शरीर के असाध्य रोग भी दूर होते हैं। इसका कुएं का वर्णन तुलसीदासजी ने रामचरित मानस में भी किया है। वैसे तो यहां पर साल भर भक्तों का आना जाना लगा रहता है, लेकिन सबसे अधिक श्रद्धालु मकर संक्रांति पर यहां आते हैं। मकर संक्रांति पर यहां पांच दिवसीय मेला भी लगता है। प्रत्येक अमावस्या को भी यहां पर श्रद्धालु स्नान करने के बाद चित्रकूट जाते हैं और फिर मंदाकिनी में स्नान कर कामदगिरि की परिक्रमा लगाते हैं।

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