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हल्द्वानी-(शाबास)- बेरोजगार युवाओं को ऐसे रोजगार दे रहे बीटेक दंपति, विदेशों तक छायी स्वदेशी उत्तराखंडी बिजली की माला

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Haldwani News- जीवन राज-संघर्ष में आदमी अकेला होता है, सफलता में दुनियां उसके साथ होती है, जिस-जिस पर ये जग हंसा है, उसी ने इतिहास रचा है। ये पंक्तियां चकलुवां के दंपति पर सटीक बैठती है। जिन्होंने युवाओं को एक नया रोजगार का जरिया दिया। जिनकी बदौलत आज कई गरीब घरों के चूल्हे जल रहे हैं। उनके काम की डिमांड इतनी बढ़ गई कि उन्होंने सोचा नहीं था। आज पूरे भारत के अलावा विदेशों में भी उनके काम की वाहवाही हो रही हैं। उनका मुख्य उद्देश्य बेरोजगार युवाओं को रोजगार देना जिससे वह नशे की ओर अपना कदम न बढ़ा सकें। आज वह कई युवाओं का भविष्य संवार रहे है।

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जी हां हम बात कर रहे चकलुवां में रहने वाले पंत दंपति की। वह मूलरूप से पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट के रहने वाले हैं। जो इन दिनों अपने स्वदेशी बिजली की माला के लिए सबसे ज्यादा चर्चाओं मेंं है। चकलुवां निवासी युगल किशोर पंत ने बताया कि उन्होंने बीटैक किया है। उनकी पत्नी बीना पंत भी बीटेक है। पत्नी का सपना था कि वह कुछ ऐसा कार्य करे जिससे गांव के बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिल सकें। काफी संघर्ष के बाद उन्होंने बिजली की लड़ी बनाई की योजना बनाई। एक साधारण परिवार से होने के नाते यहां आर्थिक संकट उनके सामने आया। वर्ष 2015 में बीना पंत ने अपने गहने बेचकर बिजली की माला बनाने का काम शुरू किया। जिसमें उन्होंने कुछ युवाओं को अपने साथ जोड़ा। लेकिन कुशल कारीगर न होने के चलते उनके कारोबार को बड़ा झटका लगा।

पहले लोगों ने उड़ाया मजाक- युगल पंत

युगल किशोर पंत ने बताया कि कई लोगों ने उनके काम का मजाक तक बना डाला कि आज चाइनिज का जमाना है। कौन आपकी लडिय़ा खरीदेगा। लेकिन पंत दंपति ने हार नहीं मानी। एक बार फिर अपने सपने पूरे करने की योजना बनाई। साथ ही जो कार्य उन्होंने शुरू में किया था उसमें सुधार भी किया। इस बार लोन के लिए बैंकों के चक्कर काटे लेकिन एसबीआई कालाढूंगी ने इस कारोबार के लिए लोन देने से साफ इंनकार कर दिया। निराश पंत दंपति घर लौट आये। इसके बाद उन्होंने हल्द्वानी में स्थित इलाहाबाद बैंक के मैनेजर से बात की तो उन्होंने लोन देने के लिए हमी भर दी तो उनके चेहरे पर मुस्कान लौट आयी।

12 युवा को दिया रोजगार

इसके बाद उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया। धीरे-धीरे कारोबार ने मार्केट पकड़ा। गांव के युवाओं को वह अपने साथ जोड़ते रहे। पहली बार उन्होंने 1500 बिजली की स्वदेशी मालाएं तैयार की। इन्हें बाजार में उतारा तो मांग और बढ़ गई। वर्ष 2018 में उन्होंने ग्राहकों की डिमांड पूरी करने की योजना बनाई लेकिन फिर भी एक दिन में 500 मालाएं ही तैयार कर सकें। आज गांव के 12 युवक-युवतियां उनके यहां काम करती है। पंत दंपति ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वदेशी अपनाने पर जोर देना और गांव के लोगों को रोजगार देना है। उन्होंने बताया कि वह भविष्य में माला बनाने की एक बड़ी फैक्ट्री लगाना चाहते है जिससे क्षेत्र के अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार मिल सकें। आज उनके पास जम्मू तक से माला की डिमांड आ रही है। वह पार्सल का पैसा खुद वहन करके लोगों की इच्छानुसार सिंगल माला तक कोरियर कर रहे है।

देश- विदेशों में बढ़ी मांग

युगल पंत ने बताया कि वह अपने ग्राहकों का हर संभव ख्याल रखने की कोशिश करते है। सोशल मीडिया पर प्रचार के बाद कई लोगों ने उन्हें स्वदेशी माला बनाने के नाम पर ट्रोल भी किया लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा बल्कि उनके पास विदेशों तक से डिमांड आ गई। पंत ने बताया कि उन्होंने कनाडा, कतर, श्रीलंका, जर्मनी, ओमान, सऊदी अरब तक अपनी मालाए भेजी है। हर दिन लोगों की डिमांड बढ़ती जा रही है। सरकार और लोकल व्यापारियों का उन्हें बिल्कुल भी सहयोग नहीं मिला। लोग चाइना के माल के पीछे पागल है, सिर्फ सोशल मीडिया पर स्वदेशी अपनाने के दांवे करते है। उनकी माला में दो साल की वारंटी है। साथ कॉपर के तारों का इस्तेमाल किया गया है। माला की खास बात यह है कि अगर कभी आपस में दो तारें टकरा भी गई तो आपकी माला खराब नहीं होगी बल्कि उसमें लगा फ्यूज उड़ जायेगा। फ्यूज दोबारा जोड़ माला जलनी शुरू हो जायेंगी। यह माला कई सालों तक चलेगी।

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अपना नया एप बनाया 

पंत दंपति खुद अपने हाथ से प्रोग्राम लिखते है। उसके बाद नये-नये अविष्कार करते है। उन्होंने अपने साथ से तार काटने की मशीन भी बनाई जो उनके घर पर मौजूद है। इसके अलावा उन्होंने द्वारबंद माला बनाई है जो भारत में पहली बार देखने को मिलेगी। ऐसी माला चाइना भी नहीं बना पाया है। जिसमें 84 राउंड लाइटें जलती है हर बार अलग-अलग अंदाज में। साथ ही पंत दंपति ने अपना एक नया मोबाइल एप भी तैयार किया है। जिसे वह अगले साल लॉच करेंगे। इस एप के माध्यम से बिजली की मालाएं खुद जलेंगी। साथ ही ऐप के माध्यम से आप माला का रंग बदल सकते है और मोबाइल से ही ऑन-ऑफ कर सकते है। उनकी मालाएं 20 फीट से लेकर 60 फीट तक लंबी है। उनकी गणपति इल्कट्रो एंड पावर के नाम से चकलुवां स्थित एक सटीफाइड कंपनी है।