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मुनस्यारी : बरबस ही पर्यटकों का मन मोह लेता है यह उत्तराखंड का “छोटा कश्मीर”, एक बार जरूर करें यहां की यात्रा

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मुनस्यारी-न्यूज टुडे नेटवर्क : अगर आप शांति के दो पल प्रकृति के साथ रहकर हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं के पंचचूली पर्वत को और करीब से देखना चाहते हैं या त्रिशूल पर्वत की छवि अपनी आंखों में बसा लेना चाहते हैं। और हरे-भरे बुग्यालों में शांति से बैठकर मोनाल पक्षी का गीत सुनना चाहते हैं, या कस्तूरी मृग को चौकड़ी भरते हुए देखना चाहते हैं। गिरती हुई बर्फ को देखना चाहते हैं या फिर ग्लेशियरों के आसपास अपना समय बिताना चाहते हैं। ऊंचे-नीचे घुमावदार पहाड़ी रास्तों पर ट्रैकिंग का मजा लेना हो या पंचाचूली पर्वत पर चढऩा या माउंटेनियरिंग का मजा लेना चाहते हैं तो इस बार चले आइए मुनस्यारी। बहुत ही खूबसूरत व सुंदर जगह है मुनस्यारी।

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“छोटा कश्मीर” के नाम से प्रसिद्ध मुनस्यारी

लगभग 2200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह जगह पिथौरागढ़ जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। चारों तरफ से पर्वतों से घिरे मुनस्यारी में अक्सर देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। शहरी कोलाहल से बहुत दूर यह पिथौरागढ़ जिले का एक सीमांत क्षेत्र है जिसकी एक सीमा नेपाल से मिलती है तो दूसरी तिब्बत से मिलती है। और तिब्बत जाने का मार्ग भी यह़ी से होकर जाता है। इसीलिए एक समय पर भारत व तिब्बत व्यापार के लिए यही प्रमुख मार्ग था। मुनस्यारी का मतलब है “मुनियों का डेरा” यानी “तपस्वियों का तपोभूमि”। हिमालय के करीब होने के कारण इसका एक हिस्सा हमेशा बर्फ से ढका ही रहता है। वैसे पूरा मुनस्यारी नवंबर से लेकर मार्च के महीने तक पूरी तरह से बर्फ से ढक जाता है। तब यहां की खूबसूरती देखते ही बनती है चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर ओढ़े प्रकृति बेहद खूबसूरत नजर आती है। उस वक्त यहां पर कुछ लोग स्किइंग का मजा लेने आते हैं तो कुछ लोग रोमांचक व साहसी खेल खेलने। और कुछ लोग आसमान से गिरती हुई इस मखमली सफेद बर्फ को देखने के लिए। मुनस्यारी के आस पास ऐसे कई जगहें है जहां पर आप उनकी खासियत के हिसाब से वहां का मजा ले सकते हैं जैसे..

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कालामुनी टॉप

मुनस्यारी शहर के रास्ते में पडऩे वाला कालामुनि टॉप स्थल भी यहां ने नजदीकी पर्यटन स्थलों में से एक है। यह स्थल ऊंचाई पर बसा है। इसलिए इसे कालामुनि टॉप के नाम से जाता है। मुख्य शहर से 14 किमी के फासले पर स्थित पर पहाड़ी गतव्य 9600 फीट की ऊंचाई पर बसा है। प्राकृतिक दृश्यों से भरा यह स्थान अपने धार्मिक महत्व के लिए भी काफी विख्यात है। यहां मां काली को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है जिस वजह से यह स्थान आस-पास शहरों और गांवों में एक पवित्र स्थान के रूप में जाना जाता है। धार्मिक महत्व के अलावा पंचाचूली पर्वती श्रंृखला के अद्भुत दृश्य इस स्थान को खास बनाने का काम करते हैं। यहां के मंदिर में एक पारंपरिक मान्यता का पालन किया जाता है। जिसके अंतर्गत श्रद्धालु मंदिर परिसर में घंटी बांधकर देवी से अपने मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्राथना करते हैं।

नंदा देवी मंदिर

लगभग 7500 फीट की ऊंचाई पर स्थित शहर से सिर्फ 3 किलोमीटर दूरी पर है मां नंदा देवी का प्रसिद्ध व प्रमुख मंदिर। यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और माता के दर्शन करते हैं। विशेष पर्वो और त्योहारों के अवसर इस पावन जगह पर अत्यधिक भीड़ रहती है। पंचचूली पर्वत यहां से देखने में और भी सुंदर दिखाई देता है।

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मैडकोट

मुनस्यारी से 5 किमी. के फासले पर स्थित मैडकोट की यात्रा का प्लान बना सकते हैं। मैडकोट अपने गर्म पानी के प्राकृतिक कुंड के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि भूमि से उत्पन्न गर्म पानी का स्रोत त्वचा संबंधी रोग, बदन दर्द और गठिया जैसी बीमारियों को ठीक करने में सक्षम है। यह खूबसूरत स्थल शहरी भीड़भाड़ से अलग एक शांत परिवेश में स्थित है, जहां सैलानियों का आना बहुत ही अच्छा लगता है। मुनस्यारी से मैडकोट आप कैब सेवा के माध्यम से पहुंच सकते हैं। ये थे मुनस्यारी के आसपास स्थित कुछ आकर्षक स्थल, जहां का प्लान आप साल के किसी भी माह बना सकते हैं।

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बिर्थी वाटरफॉल

बिर्थी वाटरफॉल पहुंचने के लिए आपको मुख्य शहर से 35 किमी का सफर तय करना पड़ेगा। अपने अद्भुत दृश्यों के साथ यह जलप्रपात कुमाऊं मंडल के चुनिंदा सबसे खास पिकनिक स्पार्ट के रूप में जाना जाता है। पहाड़ी परिदृश्य के साथ ही यहां हरा-भरा वातावरण सैलानियों को आनंदित करने का काम करता है। इस सब के अलावा यह स्थान लंबी पैदल यात्रा और टै्रकिंग के लिए भी जाना जाता है, क्योंकि अस से कुछ किमी का सफर तय करने के बाद आपको यहां तक पहुंचने के लिए ट्रकिंग का सहारा लेना होगा। ट्रेकिंग सफर के बीच आप आसपास के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद भी ले सकते हैं।

दरकोट

शहर से सिर्फ 6 किलोमीटर की दूरी पर मदकोट रोड पर स्थित यह छोटा सा प्यारा सा गांव जो अपने लकड़ी के घरों व दरवाजों तथा उन पर खूबसूरत की गई पारंपरिक नक्काशी के लिए बहुत प्रसिद्ध है।यहां पर अक्सर पर्यटक भोटिया व शौका जनजाति की पारंपरिक तथा उनके पूर्वजों की अनमोल कारीगरी को देखने के लिए पहुंचते हैं जो यहां के लोगों ने आज भी बड़े शौक से करते है। कालीन बुनना तथा शाँल बनाना।ये लोग अपनी बारीक कारीगरी से बेहद खूबसूरत डिजाइनों को इन कालीनों तथा शाँलों में उतारते हैं कि पहली नजर में आपको यकीन ही नहीं आएगा कि हाथ से बने हुए हैं। यह इनकी पारंपरिक कला हैं जो ये पीढी दर पीढी सीखते हैं।

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थमरी कुंड

पहाड़ी खूबसूरती के अलावा आप यहां थमरी कुंड की सैर का प्लान बना सकते हैं। थमरी कुंड एक बारहमासी झील है जो कुमाऊं घाटी के अंतर्गत सबसे ताजे पानी की झील मानी जाती है। पेपर के मोटे वृक्षों से घिरा एक रोमांचक ट्रेक के माध्यम से मुख्य शहर से इस झील तक पहुंचने के लिए लगभग 8 घंटों का समय लगता है। इसलिए अगर आप यहां आना चाहें तो शहर से सुबह तडक़े ही निकलें। थमरी कुंड अल्पाइन के पेड़ों से घिरा हुआ है जो इस जगह का शानदार दृश्य प्रदान करते हैं। किस्मत अच्छी रही तो आप यहां कस्तूरी मृग को यहां पानी पीते हुए भी देख सकते हैं।

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महेश्वरी कुंड

मुनस्यारी से कुछ दूर स्थित महेश्वरी कुंड एक प्राचीन झील है, जिसके साथ पौराणिक मान्याताएं भी जुडी हुई हैं। माना जाता है कि जब प्रतिशोध लेने के लिए मुनस्यारी के ग्रामीणों ने इस झील का सुखा दिया था तब यक्ष ने उनसे बदला लेने का फैसला किया। जिसके बाद यह पूरा शहर सूखे की चपेट में आ गया। गांव को बचाने के लिए ग्रामीणों ने यक्ष से माफी मांगी। माफी मांगने की परंपरा का पालन आज भी यहां किया जाता है। महेश्वरी कुंड की पंचाचूली पर्वत श्रृंखला के अद्भुत रूप पेश करती है। हिमालय रेंज होने के कारण तथा बड़े भू -भाग का बर्फ से ढके रहने के कारण यहां पर कई तरह की दुर्लभ वनस्पतियां व वन्य जीव पाए जाते हैं। इन्हीं उच्च हिमालयी रेंजों में यारसागुम्बा जैसी दुर्लभ वनस्पति पाई जाती है। जो बाजार में आजकल काफी महंगी बिकती है।साहसिक व रोमांचकारी यात्रा के शौकीन लोगों के लिए यह जगह स्वर्ग है।

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पंचाचूली पर्वत

सूरज की पहली किरण के साथ पंचाचूली पर्वत को निहारना तथा ढलते सूरज के साथ भी पंचचूली पर्वत को निहारना सच में ऐसा लगता है मानो पंचाचूली पर्वत पर किसी ने सोने का आवरण लगा दिया हो। प्रकृति की गोद में बैठकर शांति से खूबसूरत फूलों को निहारना, रंग-बिरंगे पक्षियों को देखना सच में एक शानदार और यादगार है। कहते हैं कि पंचचूली पर्वत से ही पांडवों ने अपना स्वर्गारोहण किया था और अंतिम बार भी इसी पर्वत के नीचे बैठकर खाना खाया था। सीजन टाइम पर यहां पर देश-विदेश के पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है।तथा हर जगह पर पर्यटक ही पर्यटक दिखाई देते हैं । यहां पर लोग ज्यादातर अपनी स्थानीय भाषा या हिंदी का ही अधिक प्रयोग करते हैं। हिमालय क्षेत्र होने के कारण यहां पर ग्लेशियर बहुत अधिक संख्या में है।जिनको ग्लेशियर देखना पसंद हो उनको अवश्य मुनस्यारी की एक बार यात्रा करनी चाहिए।

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कितनी है दूरी

  • काठगोदाम से मुनस्यारी तक की दूरी है -295 किलोमीटर।
  • पिथौरागढ़ से मुनस्यारी तक- 128 किलोमीटर।
  • यहां पर सिर्फ बस या टैक्सी से ही आपको पहुंचना होगा।

कब आए

  • अगर बर्फबारी का मजा लेना हो तो नवंबर से लेकर मार्च तक।
  • ट्रैकिंग के लिए सबसे बेहतर समय है मार्च से जून तक ।

अपने साथ क्या लायें

  • गर्म कपड़े लाना ना भूलें। खूबसूरत तस्वीरें उतारने के लिए कैमरा।
  • जरुरी बात : जाने से पहले होटल बुक करना ना भूलें।