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तिलक लगाने के जबर्दस्त फायदे, जानिए तिलक के चमत्कारिक प्रभाव और महत्व

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ज्यादातर हम तभी तिलक लगाते हैं, जब मंदिर जाते हैं या फिर पूजा-पाठ करते हैं। लोग चंदन, हल्दी, भस्म और कुमकुम का टीका अपने माथे पर लगाते हैं। पर क्या आप जानते हैं ऐसा करने के पीछे सिर्फ धार्मिक कारण ही नहीं कई जबरदस्त वैज्ञानिक कारण भी हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही उन खास कारणों के बारे में जिन्हें जानने के बाद आप घर से निकलने से पहले माथे पर टीका लगाना कभी नहीं भूलेंगे।

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तिलक लगाने के स्थान

सिर, ललाट, कंठ, हृदय, दोनों बाहुं, बाहुमूल, नाभि, पीठ, दोनों बगल में, इस प्रकार बारह स्थानों पर तिलक करने का विधान है। मस्तक पर तिलक जहां लगाया जाता है वहां आत्मा अर्थात हम स्वयं स्थित होते हैं। तिलक मस्तक पर दोनों भौंहों के बीच नासिका के ऊपर प्रारंभिक स्थल पर लगाए जाते हैं जो हमारे चिंतन-मनन का भी स्थान है। यह स्थान चेतन-अवचेतन अवस्था में भी जागृत एवं सक्रिय रहता है, इसे आज्ञा-चक्र भी कहते हैं। इन दोनों के संगम बिंदु पर स्थित चक्र को निर्मल, विवेकशील, ऊर्जावान, जागृत रखने के साथ ही तनावमुक्त रहने हेतु ही तिलक लगाया जाता है। इस बिंदु पर यदि सौभाग्यसूचक द्रव्य जैसे चंदन, केशर, कुमकुम आदि का तिलक लगाने से सात्विक एवं तेजपूर्ण होकर आत्मविश्वास में अभूतपूर्ण वृद्धि होती है, मन में निर्मलता, शांति एवं संयम में वृद्धि होती है।

उदासी दूर होती है

यह बात बहुत ही कम लोग जानते हैं कि चंदन की टीका माथे पर लगाने से दिमाग में सेराटोनिन और बीटा एंडोर्फिन का स्त्राव संतुलित तरीके से होता है। जिसकी वजह से व्यक्ति उदासी भूलकर खुश रहने की कोशिश करता है। जिसकी वजह से मनुष्य खुद को अच्छे कामों में व्यस्त रखने की कोशिश करता रहता है। जिसकी वजह से तनाव और सिरदर्द में भी काफी हद तक कमी आती है।

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शांति और सुकून

माथे के बीच में तिलक लगाने से शांति और सुकून का अनुभव होता है। तिलक लगाने से मानसिक उत्तेजना पर भी काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। हल्दी में एंटी बैक्टीरियल तत्व होते हैं, जो रोगों से मुक्ति दिलाने में हमारी मदद करते हैं।

दिमाग रहता है शांत

माथे पर चंदन का तिलक लगाने से दिमाग शांत रहता है और तनाव भी नहीं होती है। इसलिए जिन लोगों को तनाव अधिक रहता है वो लोग चंदन को घिसकर अपने माथे पर लगा लें। दरअसल तिलक लगाने से सेरेटोनिन और बीटा एंडोर्फिन का स्राव संतुलित होता है और तनाव की समस्या नहीं होती है।

सिर दर्द से मिले आराम

सिर में दर्द होने पर दवाई खाने की जगह आप चंदन को लगा लें। चंदन का तिलक लगाने से सिर का दर्द सही हो जाएगा और आराम मिलेगा। आप चंदन को अच्छे से घिस लें और इसके अंदर थोड़ा सा तेल मिला दें। इसके बाद इस लेप को अपने माथे पर लगा लें।

नकारात्मक ऊर्जा रहे दूर

जो लोग रोज माथे पर तिलक लगाया करते हैं उनसे नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और उनके अंदर आत्मविश्वास बढ़ाता है। तिलक लगाने से जुड़ा ये लाभ मनोवैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भी हो रखा है। इसलिए आपके अंदर अगर आत्मविश्वास की कमी है तो रोज आप माथे पर तिलक को लगाया करें।

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मन रहें शांत

तिलक लगाने से मन को शांति मिलती है और ऐसा होने से मानसिक विकार होने का खतरा बेहद ही कम हो जाता है।

त्वचा समस्या रहे दूर

माथे पर हल्दी का तिलक लगाने से त्वचा से जुड़ी समस्या नहीं होती है। दरअसल हल्दी के अंदर एंटीसेप्टिक और एंटी-बैक्टीरियल होती है, जो कि त्वचा की रक्षा कई तरह के बैक्टीरियल से करते हैं।

थकान हो खत्म

शारीरिक थकान को भी दूर करने में चंदन का तिलक सहायक होता है और इस तिलक को माथे पर लगाने से थकान एकदम दूर हो जाती है और चैन भरी नींद आती है। जिन लोगों को अनिद्रा की समस्या है वो लोग भी रोज रात को सोने से पहले माथे पर चंदन का तिलक जरूर लगाएं।

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ग्रह रहते हैं शांत

ज्योतिष के अनुसार कुंडली में अगर कोई ग्रह भारी है या ग्रहों की दिशा सही नहीं चल रही है। तो माथे पर चंदन का तिलक लगाना उत्तम साबित होता है। चंदन के तिलक में सरसों का तेल मिलाकर इसे माथे पर लगाने से ग्रह शांत हो जाते हैं और कष्ट दूर हो जाते।

अन्न और धन में हो बरकत

ऐसा माना जाता है कि माथे पर तिलक लगाने से व्यक्ति की किस्मत खुल जाती है और घर में अनाज और धन की कभी भी कमी नहीं होती है। घर में धन और अनाज की बरकत बनी रहे इसके लिए आप रोज माथे पर चंदन का तिलक लगाया करें।

किस अंगुलि से तिलक लगाने का क्या महत्त्व है –

अनामिका अंगुली से तिलक करने से मन और मस्तिष्क को शांति मिलती है, मध्यमा से आयु बढ़ाती है, अंगूठे से तिलक करना पुष्टिदायक कहा गया है और तर्जनी से तिलक करने पर मोक्ष मिलता है। विष्णु संहिता के अनुसार देव कार्य में अनामिका, पितृ कार्य में मध्यमा, ऋषि कार्य में कनिष्ठिका तथा तांत्रिक कार्यों में प्रथमा अंगुली का प्रयोग होता है।

मान्यता है कि विष्णु आदि देवताओं की पूजा में पीत चंदन, गणेश पूजा में हरिद्रा चंदन, पितृ कार्यों में रक्त चंदन, शिव पूजा में भस्म, ऋषि पूजा में श्वेत चंदन, मानव पूजा में केसर और चंदन, लक्ष्मी पूजा में केसर एवं तांत्रिक कार्यों में सिंदूर का प्रयोग तिलक के लिए करना चाहिए।

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