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देवभूमी में मिलने वाले इस पेड़ से पैदा होगी 150 मेगावाट बिजली, मिलेगा हजारों लोगो को रोजगार

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Uttarakhand Pirul Neeti, (उत्तराखंड सरकार पिरुल निति 2018) उत्तराखंड में रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार निरंतर ठोस कदम उठा रही है। जिसके लिए अब त्रिवेंद्र सरकार ने बेहद ने नये कार्य को अपनी मंजूरी दे दी है। दरअसल देवभूमी के पहाड़ों में मिलने वाले पिरूल से अब बिजली बनाई जाएगी, जिससे गांव रौशन होंगे, त्रिवेंद्र सरकार ने 21 उद्यमियों को प्लांट लगाने और बिजली उत्पादन की मंजूरी दी है। जिसके बाद से प्रदेश में अब पिरूल से बिजली पैदा करने की योजना सफल होती नजर आ रही है।

जिसकी शुरूआत 21 से हो रही है। उत्तराखंड में करीब 6 हजार पिरुल लंयंत्र स्थापित करने की योजना है। अगर एक संयंत्र से 10 लोगों को भी रोजगार मिलता है तो 6 हजार संयंत्रों से 60 हजार लोगों को रोजगार मिलना तय है। यानि अब पिरूल से पैदा होने वाली बिजली से गांव को रोशनी के साथ-साथ क्षेत्रीय लोगो को रोजगार भी मिलेगा।

CM uttarakhand

चीड़ की पत्तियां यानि पिरूल से बिजली पैदा करना त्रिवेंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है। वही एक्सपर्ट्स की माने तो इस नीति के लागू होने से उत्तराखंड को पिरूल से 150 मेगावाट बिजली मिल सकती है। इस योजना पर तेजी से काम हो रहा है। जिसके लिए सरकार ने 21 उद्यमियों को पिरूल से बिजली बनाने के लिए प्लांट लगाने की अनुमति भी प्रदान कर दी है। सभी उद्यमियों को सरकार की तरफ से लेटर ऑफ अवॉर्ड भी जारी किया गया। जिसके लिए सरकार सभी कंपनियों के लिए कई सुविधायें भी मुहैया कराएगी।

वैज्ञानिकों को हालिस की सफलता

बता दें कि अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों को इस प्रयास में सफलता हासिल की है। अब पहाड़ में पिरूल से कैरी बैग, फोल्डर, फाइल, लिफाफे और डिस्प्ले बोर्ड जैसी चीजें बनाई जाएंगी, अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों ने इसकी तरकीब खोज निकाली है। जीबी पंत पर्यावरण संस्थान ने कोसी में पाइन पत्ती प्रसंस्करण इकाई बनाई है। जिसमें चीड़ की पत्तियों को इकट्ठा कर इससे कई तरह के प्रोडक्ट्स बनाए जाएंगे। पाइन पत्ती प्रसंस्करण इकाई में सबसे पहले पिरूल को रैग चैपर में डालकर उसके छोटे-छोटे टुकड़े किए जाते हैं। बाद में इसकी कुटाई करने के बाद इसे अलग-अलग प्रोसेस से गुजारा जाता है, तब तैयार होता है पिरूल से बना गत्ता, जिससे कई प्रोडक्ट्स बनाए जा सकते हैं।

employment in uttarakhand

240 मीट्रिक टन पिरूल किया इकट्ठा

जंगलों से पिरूल इकट्ठा करने की जिम्मेदारी वन पंचायतों और स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। योजना के तहत प्रदेश में अलग-अलग जगह प्लांट लगाए जाएंगे, जिनसे फिलहाल 675 किलोवाट बिजली का उत्पादन होगा। पिरूल का इससे अच्छा इस्तेमाल हो ही नहीं सकता। अब तक उत्तराखंड में करीब 240 मीट्रिक टन पिरूल इकट्ठा किया जा चुका है। जंगलों से जो पिरूल साफ होगा, उससे बिजली बनेगी। इससे रोजगार तो मिलेगा ही, साथ ही जंगलों को आग से बचाना भी संभव होगा।

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