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इस जगह स्थित है ‘चौकीदार मंदिर’… जहां सदियों से श्रृद्धालु करते आ रहे ‘चौकीदार’ की पूजा

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नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : ‘चौकीदार’ शब्द सुनते ही सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के नेताओं का नाम जहन में आने लगता। इन दिनों लोकसभा चुनाव में क्चछ्वक्क नेता इस चौकीदार शब्द का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं देश के जहां चौकीदार की पूजा होती हो? चौकीदार के नारे के बीच आज हम आपको गुजरात के नर्मदा जिले में स्थापित एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका नाम ही चौकीदार मंदिर है. जहां सदियों से एक ‘चौकीदार’ की पूजा होती आ रही है।

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देवी के मंदिर के पास बना चौकीदार का मंदिर

लोक मान्यताओं के अनुसार, देवी पंडोरी ने नाराज होकर घर छोड़ दिया था। राजा पंडादेव ने उनकी तलाश करनी शुरू की और अपना घोड़ा देव मोगरा गांव में रोका। इसी वजह से यह जगह स्थानीय लोगों के लिए पूजनीय हो गई और बाद में वहां पंडोरी माता का मंदिर बनवाया गया। इस मंदिर से कुछ दूरी पर देवदरवनिया चौकीदार के लिए भी एक प्रार्थना स्थल बनाया गया।

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तीन राज्यों में है अलग-अलग नाम

तीनो राज्यों के आदिवासी समाज के लोग इस देव मंदिर को अलग-अलग नाम से बुलाते हैं. महाराष्ट्र के आदिवासी इस देव को देवदर वाणीया कहते है. रूक्क के आदिवासी श्रद्धालु कलियाभूत मामा के नाम से बुलाते है और गुजरात के श्रद्धालु चौकीदार के नाम से संबोधित करते हैं. इस देव मंदिर का नाम आदिवासियों के लिए अलग-अलग नाम से से जना जाता हो लेकिन यहां आने वाले भक्तों की आस्था इस मंदिर में एक जैसी है.

दूसरे राज्यों से भी आते हैं श्रद्धालु

क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, मान्यता है कि देवदरवनिया चौकीदार देवी और हमारे गांव की रक्षा करते हैं। जो भक्त पंडोरी माता की पूजा करने आते हैं, उन्हें पहले चौकीदार मंदिर के दर्शन करने होते हैं। यहां सिर्फ गुजरात से ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्यप्रदेश से श्रद्धालु आते हैं।

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चौकीदार को प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती है ‘शराब’

दिवाली और नवरात्र के दौरान माता के मंदिर में भीड़ बढ़ जाती है। चौकीदार मंदिर में भी श्रद्धालु बराबर आते हैं।’ दिलचस्प यह है कि गुजरात में वैसे तो श’राब की बिक्री बैन है लेकिन देवदरवनिया चौकीदार को लोग देशी श’राब प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं।