उत्तराखंड की इस लडक़ी ने उगाई ‘औषधि’ कीड़ा जड़ी चाय, बिक रही हजारों में, जानिए क्या है वजह

देहरादून -न्यूज टुडे नेटवर्क : देश में ऐसे कई लोग हैं जो अपने कारनामे से दुनिया को हैरान कर देते हैं। ऐसे ही मशरूम गर्ल के नाम से मशहूर दिव्या रावत ने एक ऐसी खोज की है जिसके बारे में आप सुनकर और जानकर हैरान रह जायेंगे। दिव्या ने बेशकीमती कीड़ा जड़ी को अपनी प्रयोगशाला में उगा कर उससे एक विशेष चाय तैयार की है। गौरतलब है कि कीड़ा जड़ी यानि यारशागुंबा उच्च हिमालयी भूभागों में ही बहुत कम मात्रा में पाई जाती है। इस कीड़ा जड़ी का वैज्ञानिक नाम कॉर्डिसेप्स साइनेसिस है।

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दिव्या के यहां तक पहुंचने का सफर दिलचस्प

उत्तराखंड की दिव्या रावत पूरे प्रदेश में मशरूम गर्ल के नाम से जानी जाती हैं। वे मशरूम उगाकर अच्छी-खासी नौकरी को मात दे रही हैं और साथ ही पहाड़ के लोगों को मशरूम की खेती की ट्रेनिंग देकर उनकी भी जिंदगी संवार रही हैं। हाल ही में दिव्या ने एक टी रेस्टोरेंट खोला है जहां बेशकीमती औषधि ‘कीड़ाजड़ी’ से बनी चाय परोसी जाती है। इस रेस्टोरेंट में दो कप चाय की कीमत 1,000 रुपये है। दिव्या ने बताया कि कीड़ा जड़ी चाय अब तक सिर्फ विदेशों में ही मिलती है। उन्होंने कहा कि प्रति कपल दो कप चाय एक हजार रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है। फिलहाल यह ऑफर अकेले व्यक्ति के लिए नहीं है।

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देश का पहला कीड़ा जड़ी चाय रेस्टोरेंट

दरअसल, दिव्या ने अब शहर में कीड़ा-जड़ी चाय की बिक्री का काम शुरू किया है। इसके लिए दिव्या ने देश का पहला कीड़ा जड़ी चाय रेस्टोरेंट खोला है। जहां एक चाय की कीमत हजारों में है। मशरूम गर्ल दिव्या रावत ने दून में कीड़ा-जड़ी चाय की बिक्री शुरू कर दी है। बता दें, दिव्या रावत का दावा है कि यह देश का पहला रेस्टोरेंट है, जहां इस तरह की चाय मिलेगी। दिव्या के इस रेस्टोरेंट में कीड़ा-जड़ी चाय के साथ-साथ इसके फायदे भी हैं।

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हिमालय में पाई जाती है ये जड़ी, दिव्या ने उगाया लैब में

ये जड़ी 3500 मीटर की ऊंचाई वाले उन हिमालयी इलाकों में पाई जाती है जहां ट्री लाइन ख़त्म हो जाती है यानी जहां के बाद पेड़ नहीं पाए जाते. मई से जुलाई के बीच जब बर्फ पिघलती है तो इसके पनपने का चक्र शुरू जाता है. लेकिन दिव्या रावत ने इसे अपनी लैब में इसे उगाने में सफलता प्राप्त की है.आजकल बाजार में इसकी कीमत आठ से 10 लाख प्रति किलोग्राम हो गई है।

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पोषकों से भरपूर है ये जड़ी

वनस्पतिविदों के अनुसार “इस फंगस में प्रोटीन, पेपटाइड्स, अमीनो एसिड, विटामिन बी-1, बी-2 और बी-12 जैसे पोषक तत्व बहुतायत में पाए जाते हैं। ये तत्काल रूप में ताक़त देते हैं. चीनी –तिब्बती परंपरागत चिकित्सा पद्धति में इसके और भी उपयोग हैं “फेफड़ों और किडनी के इलाज में इसे जीवन रक्षक दवा माना गया है। कीड़ा-जड़ी से अब यौन उत्तेजना बढ़ाने वाले टॉनिक भी तैयार किए जा रहे हैं जिनकी भारी मांग है।

ये होगी कीमत

दिव्या रावत के अनुसार इस चाय की कीमत लगभग 1000 रूपये प्रति कप होगी ऐसा इसलिए क्योंकि कीड़ाजड़ी की ही कीमत करीब 2 लाख रुपये किलोग्राम है। इसकी महीन सी मात्रा ही आपके शरीर में मौजूद हर बीमारी से लडऩे में कारगर होती है।