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हल्द्वानी- गुम होती बच्चों को खेल कराने वाली पहाड़ की ये कविता, इसे पढ़कर अपने बचपन में खो जायेंगे आप

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हल्द्वानी-न्यूज टुडे नेटवर्क-(जीवन राज)-अक्सर पहाड़ों में बच्चों को खेलने के लिए गाये जाने वाला गाना घुघुती बासुती कुमाऊंनी गीत (कविता) अब गुम हो गया है। पहाड़ के बीच अब ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार बोलने लगे है। पहले पहाड़ों में बच्चों को दादा-दादी और नाना-नानी घुघुती बासुती कुमाऊंनी गीत (कविता) से बच्चों को खेलने के अलावा रात में सुलाते का काम भी करती थी। दादा-दादी बच्चे को पैरों पर बैठाकर झुलाते थे तो रोते हुए बच्चा भी खुश हो जाता था। आज पहाड़ से घुघुती बासुती गुम हो चुकी है। इसका मुख्य करण पहाड़ों में लगातार हो रहा पलायन है। पलायन से पहाड़ के लोग मैदानी क्षेत्र में प्रवेश कर गये है। आज के दौर में हर कोई अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहता है ऐसे में पहाड़ की संस्कृति का अभिन्न अंग रहे घुघुती बासुती की गीत जैसे गुम हो गया है। इसकी जगह ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार अर्थात (टिम टिम करते नन्हें तारे) ने अपना कब्जा जमा लिया है। पहाड़ के कहानी और किस्से लगातार गुम होते जा रहे है।

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90 प्रतिशत युवा भूल गये घुघूती बासुती

आज के दौर में युवावर्ग घुघुती बासुती को भूल गया है। घुघुती-बासुती को लेकर न्यूज टुडे नेटवर्क ने कई लोगों से बात की तो दो शब्द घुघुती-बासुती के अलावा 90 प्रतिशत युवा आगे की लाइने नहीं बोल पाया। इसमें से अधिकांश युवाओं ने कहा कि उन्होंने इसे बचपन में खूब सुना लेकिन अब भूल गये हैं। इसका असर आजकल के बच्चों में देखने को मिला। जिन्हें घुघुती-बासुती क्या और कैसा है का कोई ज्ञान ही नहीं है। हालांकि कुछ उत्तराखंडी गायकों ने घुघुती-बासुती को जिंदा रखने की कोशिश की है लेकिन पहाड़ से बढ़ता पलायन इसे फिर पीछे धकेल देता है। या फिर साफ शब्दों में कहे तो घुघुती-बासुती ने भी पहाड़ से पलायन कर शहर में ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार अपना बचपन का गाना बना लिया है।

कुछ इस तरह था ये कुमांऊनी गीत-
घुघूती बासुती
आम काछू-आमा कहां है
बूब काछी-दादा कहा है
माम का छूं, मामा कहां है
मालकोटी, मामा के घर
के ल्यालो, क्या लाएँगे
दूध भाती, दूध भात
को खालो, कौन खाएगा
फिर बच्चे का नाम लेते थे
खालो कहती है और बच्चा खुशी से किलकारियां मारता है ।