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तो फिर… अब उत्तराखंड में भी बंद होने जा रहे 15 वर्ष पुराने वाहन, सबसे पहले इन शहरों में लागू होगा नियम

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आज के समय में सडक़ों पर बढ़ते वाहन और साथ में पुराने वाहन से हो रहा वायु प्रदूषण दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। प्राय: देखा जा रहा है कि आज हर घर में 2 या 2 से अधिक वाहन हैं, चाहे चार पहिया हो या दोपहिया। लगातार बढ़ती वाहनों की संख्या ने वातावरण का दम घोट कर रख दिया है। जिसके चलते इस प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने ज रही है। यदि ऐसा हुआ तो  दिल्ली की तर्ज पर उत्तराखंड के इन तीनों शहर से एक लाख से अधिक वाहन प्रचलन से बाहर हो जाएंगे।

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21 हजार वाहनों को सडक़ों से बाहर करने की योजना

बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सरकार बड़ा कदम उठा सकती है। उत्तराखंड की सडक़ों पर अब दिल्ली की तर्ज पर 15 साल से पुराने डीजल वाहन नहीं चल सकेंगे। एनजीटी के निर्देश पर बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए उत्तराखंड पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसका प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है, जिसे राज्य सरकार की मंजूरी के बाद केंद्र को भेजा गया है। केंद्र से इस पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। निर्णय आने के बाद इसके तहत पहले चरण में 21 हजार वाहनों को सडक़ों से बाहर करने की योजना बनाई गई है।

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कॉमर्शियल वाहनों को किया जाएगा बाहर

पहले चरण में कॉमर्शियल वाहनों को बंद किया जाएगा। प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए पहले देहरादून, हरिद्वार, और ऋषिकेश में ही ये नियम लागू होगा। इसके बाद एक-एक कर अन्य शहरों में कॉमर्शियल डीजल वाहन बंद किए जाएंगे।

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए मिल सकती है सब्सिडी

क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत डीजल व पेट्रोल चालित वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया जा सकता है। इस योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को सब्सिडी भी मिलेे, ताकि उसे खरीदने के लिए लोग प्रोत्साहित हों।