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केदारनाथ में सामने आया जनता की रक्षक पुलिस का ये भयानक चेहरा, मुख्यमंत्री ने दिये जांच के आदेश

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Kedarnath Dham, देवभूमि के केदारनाथ धाम में लोगो की सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस अपनी गलत हरकतों की वजह से सुर्खियों पर है। दरअसल सोशल मीडिया में वायरल हो रहे एक वीडियो में केदारनाथ आये श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया गया है कि मंदिर के अंदर पुलिस ने उनके साथ मारपीट और अभद्रता की। वीडियो में तीर्थ पुरोहित भी आरोप लगाने वाले व्यक्ति का समर्थन करते नज़र आ रहे हैं। पुलिस अधीक्षक ने आरोप का खंडन करते हुए इसे पुलिस की छवि खराब करने का षड्यंत्र बताया है और जल्द ही सीसीटीवी फ़ुटेज की मदद से मामले का खुलासा करने का दावा किया है। माना जा रहा है कि पुलिस और पंडा समाज में तनातनी की वजह से यह मामला उछला है। बता दें कि पूरे मामले को संज्ञान में लेने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भी जांच के आदेश दे दिये है।

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आखिर क्या है पूरा मामला

बता दें कि गुरुवार को सोशल मीडिया में एक वायरल वीडियो में एक युवक ने आरोप लगाया कि वह मंदिर में दर्शन करते हुए जल चढ़ा रहे थे तभी एक पुलिसकर्मी ने एक बच्ची का सिर पकड़कर उसे बाहर की तरफ धकेला। एक युवक को घसीटकर बाहर लाया गया। युवक के अनुसार एक अन्य युवती और उसकी मां व मौसी के साथ भी पुलिस ने अभद्र व्यवहार किया है। रुद्रप्रयाग के पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने एक बयान जारी कर स्पष्टीकरण दिया कि केदारनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में दिन -प्रतिदिन वृद्धि हो रही है और यात्रियों की लंबी लाइन लग रही है। कुछ दिनों पहले व्यवस्था की गई है कि मंदिर के गर्भ-गृह में बिना चक्कर लगाए ही श्रद्धालु बाहर आएंगे और अत्यधिक समयावधि तक मंदिर के अंदर खड़े नहीं रहेंगे। इसके लिए मंदिर के गर्भ गृह के अंदर महिला उपनिरीक्षक और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की गई है। कुछ लोगों को यह व्यवस्था उनके निजी स्वार्थ पूरे न होने के कारण सही नहीं लग रही है।

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सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से होगी जांच

वीडियो में युवक के आरोप का जवाब देते हुए बयान में कहा गया कि एक परिवार ने अपने को मध्य प्रदेश के किसी वीआईपी का हवाला देते हुए मंदिर के अंदर जाने की ज़िद की और पूजा में अत्याधिक समय लिया गया। उन्होंने झूठ भी बोला कि उनके साथ अन्य बुजुर्ग लोग भी हैं। जिस बालिका (14 साल) को उठाकर फेंकने का आरोप लगाया गया है, उसका पैर भी किसी अन्य श्रद्धालु की वजह से दब गया था। पुलिस अधीक्षक के अनुसार यह परिवार ने वहां पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करते हुए अंदर गया था और ड्यूटी पर तैनात उपनिरीक्षक उन्हें बाहर लाए थे और बताया था कि नियमों के हिसाब से ही बाबा केदार के दर्शन हो रहे हैं। परिवार के सदस्यों द्वारा मन्दिर दर्शन के अनुरोध पर उक्त परिवार को दर्शन कराने में पुलिस ने मदद भी की थी। पुलिस अधीक्षक के अनुसार प्रथम दृष्टया लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है फिर भी केदारनाथ में नियुक्त क्षेत्राधिकारी को जांच दे दी गई है। सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से एवं अन्य लोगों से पूछताछ कर जांच की जाएगी।