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रुद्रपुर-जो ईमानदारी और बेचैनी के साथ लिख रहा वही सच्चा साहित्यकार-भारद्वाज

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रुद्रपुर- प्रख्यात साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर टीएलसी गांधी कालोनी में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें राजस्थान साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष, अक्सर पत्रिका के संपादक एवं प्रसिद्ध साहित्यकार हेतु भारद्वाज ने कहा कि समाज को समझते हुए जो ईमानदारी और बेचैनी के साथ लिख रहा है, वही सच्चा साहित्यकार है। प्रेमचंद ने भी जीवनपर्यंत यही कार्य किया।

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मुंशी प्रेमचंद के जीवन-संघर्ष और उनके साहित्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रेमचंद गरीबी की नस-नस से परिचित थे। तभी उन्होंने सामाजिक कुरीतियों, विद्रूपताओं और जनमानस की समस्याओं को जनभाषा में ढाल कर कहानियों का स्वरूप प्रदान किया। यह उनकी लेखनी की ताकत थी कि परतंत्र देश और समाज में आबादी का बहुसंख्यक भाग भयंकर रूप से शोषित था, तब शोषित वर्ग का व्यक्ति उनकी कहानियों का मुख्य नायक हुआ करता था। इसी कारण उन्होंने जनमानस को यथार्थ से जुड़े साहित्य से परिचय करवाकर अपना एक विस्तृत पाठकवर्ग तैयार किया।

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भारद्वाज ने कहा कि उस दौर में जब प्रिंट सामग्री आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती थी और अच्छा साहित्य एवं साहित्यकारों का ब्रिटिश सरकार द्वारा निरंतर दमन किया जाता था, फिर भी लोगो में साहित्य पढऩे और साहित्यिक चर्चाएं और बैठकों की एक स्वस्थ परंपरा थी, परंतु आज सब कुछ की सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद भी अफसोस कि यह सब देखने को नहीं मिलता। लोगों की एकजुटता की कमी दिखती है। उन्होंने 17 उपन्यास और 300 से अधिक कहानियां हिंदी साहित्य को दिया, जिनका अनुवाद विश्व की लगभग सभी भाषाओं में हो चुका है।

कार्यक्रम में अपने विचार वरिष्ठ कवयित्री-कथाकार किरण अग्रवाल, युवाकवि खेमकरण सोमन, संजय श्रीनत, एपी भारती, प्रियंवद अजात, मो अजाम, रेशु पनेरू, कमला बिष्ट और अश्विनी पाटिल ने भी विचार रखें। कार्यक्रम का संचालन चर्चित कवि-कथाकार शैलेय ने किया। इस अवसर पर नीरज भारद्वाज, सीमा नैथानी, सुमन रानी, बीना श्रीवास्तव, मनोज कुमार, दीपा पांडेय, मनोज पांडेय, अर्श, सबाहत हुसैन खान, नवीन, अविनाश कुमार, कयूम अंसारी आदि शिक्षक-कवि मौजूद थे।