हल्द्वानी- रोशनी सोसाइटी ने ऐसे मनाया आटिज्म जागरूकता दिवस, जाने 2 अप्रैल ही क्यों है खास

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हल्द्वानी- न्यूज टुडे नेटवर्क: रोशनी सोसाइटी द्वारा विश्व आटिज्म जागरूकता दिवस के अवसर पर सभी ऑटिस्टिक एवं स्पास्टिक बच्चों एवं उनके अभिभावकों ने मिलकर एक जागरूकता कार्यक्रम नैनीताल रोड स्थित इम्पलसो रेस्तरां में आयोजित किया गया। जिसमे विशेषज्ञ विनीता वर्मा एवं कैलाश जोशी ने आटिज्म के विभिन्न पहलुवों में अपने विचार रखे। सभी विशिस्ट बच्चों ने आटिज्म पर आधारित विभिन्न खेल खेले तथा केक काटकर आटिज्म दिवस मनाया।

ऐसे किया आटिज्म जागरूकता

वही आटिज्म जागरूकता के लिए इम्पलसो रेस्तरां को नीली रोशनी से सजाया गया। कार्यक्रम में एम.बी.पी.जी के विद्यार्थियों द्वारा प्रतिभाग भी किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिवानी पाल द्वारा की गई। जबकि इस खास अवसर पर गोविंद मेहरा, हेमा परगाई , सचिन साह, कैलाश जोशी , विनीता वर्मा , शेखर कांडपाल , मधु शर्मा, प्रताप बिष्ट तथा रोशनी के सभी सदस्य तथा अभिभावक उपस्थित रहे।

क्या है आटिज्म जागरूकता दिवस

आपको बता दें ऑटिज़्म जागरूकता दिवस दुनियाभर में प्रत्येक वर्ष 2 अप्रॅल को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2007 में 2 अप्रैल के दिन को विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस घोषित किया था। इस दिन उन बच्‍चों और बड़ों के जीवन में सुधार के कदम उठाए जाते हैं, जो ऑटिज़्म ग्रस्‍त होते हैं और उन्‍हें सार्थक जीवन बिताने में सहायता दी जाती है। नीला रंग ऑटिज़्म का प्रतीक माना गया है। वर्ष 2013 में इस अवसर पर ऑटिज़्मग्रस्‍त एक व्‍यक्ति कृष्‍ण नारायणन द्वारा लिखित एक पुस्‍तक और ‘अलग ही आशा’ शीर्षक एक गीत जारी की गई।

भारत के सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार प्रति 110 में से एक बच्‍चा ऑटिज़्मग्रस्‍त होता है और हर 70 बालकों में से एक बालक इस बीमारी से प्रभावित होता है। इस बीमारी की चपेट में आने के बालिकाओं के मुकाबले बालकों की ज्‍यादा संभावना है। इस बीमारी को पहचानने का कोई निश्चित तरीका ज्ञात नहीं है, लेकिन जल्‍दी निदान हो जाने की स्थिति में सुधार लाने के लिए कुछ किया जा सकता है। दुनियाभर में यह बीमारी पाई जाती है और इसका असर बच्‍चों, परिवारों, समुदाय और समाज पर पड़ता है।