iimt haldwani

Ramzan : खजूर से ही क्यों खोला जाता है रोजा, जाने इसके पीछे की वजह

178

नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : मुस्लिम धर्म में पवित्र महीना माना जाने वाला रमजान शुरू हो चूका है। रमजान में खजूर की अहमियत काफी बढ़ जाती है।। दरअसल, रोजेदारों के लिए खजूर से रोजा खोलना इस्लाम में सुन्नत माना जाता है।   मुस्लिम सम्प्रदाय के लोग इस पूरे महीने अल्लाह की इबादत करते हैं और खुद को गलत काम करने से दूर रखते हैं। शाम में इफ्तार के समय खजूर से रोजा खोला जाता हैं। आज हम आपको इसके पीछे की जानकारी देने जा रहे है कि आखिर खजूर से ही क्यों खोला जाता है रोजा। रमजान के महीने में हमें बाजार बहुत तरह के खजूरों से सजे दिखते हैं।

drishti haldwani

ramzan

यह भी पढ़ें- हल्द्वानी-(बड़ी खबर) सरकार ने तय किया स्कूल बैग का वजन, कक्षा 1 से 10 तक अब इतने किलोग्राम का हुआ स्कूली बस्ता

 खजूर में होता है फाइबर

रोजा खोलने में खजूर के इस्तेमाल का पहला कारण है स्वास्थ्य। रोजा खोलने के वक्त कई लोग बहुत ज्यादा खाना खा लेते हैं। इससे कई सारी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे में खजूर खाने से शरीर को काफी ऊर्जा मिलती है। इससे भूख कम लगती है। खजूर में काफी मात्रा में फाइबर होता है, जो बॉडी के लिए जरूरी होता है। खजूर खाने से पाचन तंत्र मजबूत रहता है। पूरे दिन कुछ न खाने से शरीर में कमजोरी आ जाती है, ऐसे में खजूर के सेवन से शरीर को ताकत मिलती है।

khajoor-3

खजूर में पोटैशियम की मात्रा भरपूर

खजूर का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम होता है, जिससे दिल की बीमारीयां होने का खतरा नहीं रहता है। साथ ही इसमें आयरन पाया जाता है, जो कि खून से संबंधित बीमारियों से निजात दिलाता है। इसके अलावा खजूर में पोटैशियम भारी मात्रा में होता है, वहीं सोडियम की मात्रा कम होती है, ये नर्वस सिस्टम के लिए फायदेमंद होता है।

khajur-1

पैगम्बर मोहम्मद साहब खजूर से खोलते थे रोजा

खजूर के इस्तेमाल का दूसरा कारण है आध्यात्मिक जिसके अनुसार इफ्तार में खजूर खाना इस्लामी सुन्नत में शुमार होता है। मान्यता है कि इस्लाम धर्म के पैगम्बर मोहम्मद साहब को खजूर बहुत पसंद थे इसलिए रमजान के दिनों में खजूर खाकर ही रोजा खोला जाता है। लोगों का मानना है कि इस्लाम अरब से शुरू हुआ था और वहां पर खजूर आसानी से उपलब्ध फल था। तभी से इफ्तार में खजूर खाने का चलन शुरू हुआ। अरब में खजूर बहुतायत मात्रा में पाया जाता है और इसकी पौष्टिकता को ध्यान में रखकर इसे इफ्तार में खाया जाता है।