हल्द्वानी- रेनबो एकेडमी के प्रबंधक आर.के शर्मा ने ‘इण्डियन एजुकेशन फेस्टिवल’ में रखे अपने विचार, छात्रों को लेकर कही ये सारी बातें

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हल्द्वानी- न्यूज टुडे नेटवर्क: बरेली रोड स्थित रेनबो एकेडमी के प्रबंधक आर.के शर्मा द्वारा छात्रों को शिक्षा का बेहतर माहौल उपल्बध कराने के लिए स्कूल में निरंतर नये-नये प्रयास किये जाते है। जिसके परिणाम स्वरूप रेनबो एकेडमी नगर में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहा है। जिसको देखते हुए सेन्टर फ़ॉर एजुकेशन एण्ड ग्रोथ,नई दिल्ली द्वारा आयोजित ‘इण्डियन एजुकेशन फेस्टिवल’ में हल्द्वानी के रेनबो स्कूल के प्रबंधक आर.के शर्मा को आज मुख्य वक्ता के रूप में बुलाया गया। राष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में उनके द्वारा स्कूली शिक्षा से जुड़े कई बिंदुओं पर अपने विचार रखे गए।  इस मौके पर उनकी पत्नी रूचि शर्मा को शिक्षक गौरव पुरस्कार 2019 से नवाजा गया।

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इस दौरान आर.के शर्मा ने कहा कि बच्चे की छुपी हुई प्रतिभा को उकेरने के लिए जरूरी है कि उन्हें प्रेक्षण,अवलोकन और अनुभव से परिपूर्ण क्लास रूम टीचिंग दी जाए। एक अध्यापक की भूमिका व्यक्तिश अपने शिष्य को एकैक पद्धति से शिक्षा प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तेज़ी से बदलती हुई चुनौतियों के समय अध्यापक को अपने शिष्य में सवाल पूछने,सतत जिज्ञासा बनाए रखने और उत्सुकता भाव को उत्पन्न करने की नींव रखने की बेहद आवश्यकता है। विषय को गंभीरता से पढ़ाने से कहीं महत्वपूर्ण विषय में रुचि जाग्रत होती है। सम्मेलन में उन्होंने का कि ये बेहद जरूरी है कि शिक्षक छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में आरही हर प्रकार की चुनौतियों के लड़ना सिखाएं न कि मार्ग बदलकर चुनौती को आसान कर उन्हें कमजोर बनायें। आर.के शर्मा ने कहा कि विद्यालय कौशलपूर्ण होने चाहिए न कि कुशल पाठ्यक्रम से परिपूर्ण। इस मौके पर उनकी पत्नी रूचि शर्मा को शिक्षक गौरव पुरस्कार 2019 से नवाजा गया। पत्नी की तरफ से उन्होंने अवार्ड ग्रहण किया।

10 वर्ष से ही विद्यार्थियों को प्रदान करें कौशल शिक्षा

राष्ट्रीय स्तरी इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में उन्होंने 10 वर्ष की आयु से ही विद्यार्थियों को कौशल शिक्षा प्रदान करे जाने की शुरूआत करने बात कहीं, उनके अनुसार इसी अवस्था में बच्चों की इन्द्रियों में सीखने की चेतना का संचार आरम्भ हो जाता है। साथ ही मानव जीवन की अधिकांश अच्छी या बुरी आदतों की नींव पड़ने लगती है। इसी अवस्था से किसी देश के ज़िम्मेदार नागरिक अथवा उस देश पर बनने वाले बोझ,अकर्मण्य जनसंख्या का निर्माण भी शुरू हो जाता है।

 

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में इस दौरान प्रो. अनिल डी सहस्रबुद्धे, अध्यक्ष, एआईसीटीई, प्रो.केके अग्रवाल, अध्यक्ष, नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडिटेशन, प्रो. ए.पी मित्तल, अध्यक्ष, सीईजीआर और सदस्य सचिव, एआईसीटीई, प्रो. हरि हरन, सलाहकार (अनुमोदन), एआईसीटीई, डॉ. कैलाश बंसल, निदेशक (कौशल विकास), एआईसीटीई, डॉ. रमेश उन्नीकृष्णन, निदेशक, एआईसीटीई, डॉ. बिस्वजीत साहा, निदेशक, सीबीएसई, कुंवर शेखर विजेंद्र, कुलपति, शोभित विश्वविद्यालय और वरिष्ठ उपाध्यक्ष, CEGR,अनंत सोनी, कुलपति, एकेएस विश्वविद्यालय, डॉ. अश्वनी लोचन, चांसलर, अरुणाचल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडीज व अन्य उपस्थित रहे।

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