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मथुरा के इस चमत्कारी कुंड में नहाने मात्र से गर्भवती हो जाती हैं महिलाएं…

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मथुरा-न्यूज टुडे नेटवर्क : जब स्त्री मातृत्व ग्रहण कर एक बच्चे को जन्म देती है, तभी वास्तविक रूप में उसका अस्तित्व और जिम्मेदारी पूर्ण होती है। लेकिन कई ऐसी स्त्रियां भी हैं जो इस पूर्णता से अछूती रह जाती है, लाख चाहने के बाद भी वह मां बनने का सुख प्राप्त नहीं कर पाती। ऐसी स्थिति में वे मानसिक और भावनात्मक तौर पर तो टूट ही जाती हैं साथ ही उसका विवाहित जीवन भी तलवार की नोंक पर आ जाता है। इसके अलावा हमारा समाज जो एक महिला से यही अपेक्षा करता है कि वह अपना हर कर्तव्य पूरा करेगी, वह भी उस महिला को सम्मान नहीं दे पाता जो मां बनने का कर्तव्य पूर्ण नहीं कर पाती।

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राधा कुंड में स्नान करने से भर जाती है सूनी गोद

ऐसे में डॉक्टरी उपाय के साथ साथ लोग भगवान को भी याद करते हैं। महिलाओं की कोख भरने के लिए कृष्ण औऱ राधा को ही ध्यान किया जाता है। मथुरा में एक स्नान कुंड भी है जो इसी दुख से उबरने के लिए प्रसिद्ध है। दरअसल मथुरा के एक मंदिर में मौजूद एक कुंड में अगर नि:संतान दंपत्ति एकसाथ अहोई अष्टमी यानी कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्य रात्री यानी आधी रात को राधा कुंड में स्नान करता है तो जल्द ही उनकी गोद भर जाती हैं।

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ये है मान्यता

यहां जो भी महिलाएं संतान की चाह में स्नान करती हैं वह नहाते समय अपने बाल खोले रहती हैं और राधा जी को श्रद्धा पूर्वक याद करती हैं। इसके साथ वह प्रार्थना करती हैं कि हे राधारानी मेरी यह सूनी कोख भर दो। ऐसा माना जाता है कि राधा कुडं में स्नान करने वाली महिलाएं मां बन जाती हैं। दरअसल इस कुंड के पीछे एक पौराणिक कथा हैं।

पौराणिक कथा

एक बार अरिष्टासुर नाम का एक राक्षस था। वह कृष्ण को मार देना चाहता था। कृष्ण भगवान गोवर्धन के पास गाय चरा रहे थे। राक्षस ने उन्हें गाय चराते देखा तो बछड़े का रुप धरकर उन पर हमला कर दिया। कृष्ण भगवान उससे लड़ते रहे और अंत में राक्षस का वध कर दिया। चूंकि जब राक्षस का वध हुआ तो वह बछड़े स्वरुप में था और इसलिए उन पर गौहत्या का पाप लग गया।

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यहां राधा कृष्ण ने किया था महारास

श्रीकृष्ण ने अपने पाप का प्रायश्चित करने के लिए अपने बांसुरी से कुंड बनवाया और तीर्थ स्थानों के जल को वहां एकत्रित किया। राधा वही मौजूद थीं। उन्होंने अपने कंगल की सहायता से कुंड खोदा और सभी तीर्थ जल को वहीं एकत्रित कर लिया। कहा जाता है कि कुंड में जल भर जाने के बाद राधा कृष्ण ने महारास किया था। राधा के साथ प्रस्नन होकर कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि जो भी नि:संतान दंपत्ति अहोई अष्टमी की मध्य रात्री में स्नान करेगा उसे साल भरे के भीतर संतान सुख प्राप्त होगा।