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हल्द्वानी-बाज मुरूली बाज हुडूका हाई रे घमा घम के प्रोमो ने मचाई धूम, गोपुली के बाद फिर चला रमेश बाबू का जादू

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Uttarakhandi Songs (Jeevan Raj)-उत्तराखंड के सुर सम्राट स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी के सुपुत्र सुपरस्टार लोकगायक रमेश बाबू गोस्वामी ने एक बार फिर अपने सुरों का जादू दर्शकों पर चलाया है। गोपुली गीत के बाद रमेश बाबू का यह सबसे बड़ा गीत है। आज उनके चैनल आरबीजी (गोपाल बाबू गोस्वामी) RBG (Gopal Babu Goswami) से इस गीत का प्रोमो जारी हो चुका है। गीत के बोल है बाज मुरूली बाज हुडूका हाई रे घमा घम। जिसे दर्शकों बाद सुन सुर सम्राट स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी की यादें ताजा हो गई। इस गीत के प्रोमो के पूरे प्रदेशभर से लोगों ने जमकर सराहना की। साथ ही उन्होंने लोकगायक रमेश बाबू को बधाईयां भी दी।

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80 के दशक का सुपरहिट गीत

बता दें कि वर्ष 1982-83 के दशक में सुर सम्राट स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी के इस गीत लोग दीवाने थे। स्व. गोपाल बाबू द्वारा लिखा गया यह गीत उस समय के सुपरहिट गीतों में से एक था। आज उनके पुत्र लोकगायक रमेश बाबू गोस्वामी ने इस गीत को नये अंदाज में गाकर दर्शकों के बीच रखा है। इसके अंतरे रमेश बाबू ने अपने नये जमाने के हिसाब से लिखे है जबकि पूरा गीत उनके पिता स्व. गोपाल बाबू द्वारा रचित है।

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इससे पहले उन्होंने अपने पिता स्व. गोपाल बाबू के गीत गोपुली को नये अंदाज में गाकर सबका दिल जीत लिया था। इस गीत ने उन्हें उत्तराखंड के संगीत जगत में एक बड़ी पहचान दिलाई थी। यू-ट्यूब पर इस गीत को अभी तक 85 लाख से ऊपर व्यूज मिल चुके हैं। शीघ्र यह गीत करोड़पति की लिस्ट में शामिल होने वाला है।

पुराने गीत को नये अंदाज में लाये रमेश बाबू

एक बार फिर सुपरस्टार लोकगायक रमेश बाबू गोस्वामी ने अपने पिता के गीत को नये अंदाज में गाया है। प्रोमो को लोगों ने खूब पसंद किया है। रमेश बाबू के फैंस इस गीत को लगातार सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। यह गीत आगामी 8 दिसम्बर को उनके चैनल आरबीजी (गोपाल बाबू गोस्वामी) से रिलीज होगा। रमेश बाबू ने बताया कि अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्हें बड़ा हर्ष होता है। आज वह अपने पिता के आर्शीवाद की बदौलत ही इस मुकाम पर खड़े है। उन्होंने बताया कि दर्शकों को यह गीत काफी पसंद आयेगा। ज्योति प्रकाश ने इस गीत संगीत दिया है, रिदम का काम किया सुभाष पाण्डे ने जबकि रिकॉडिग की विक्की जुयाल ने। साथ ही इस गीत में सबसे बड़ा सहयोग जगदीश गोस्वामी व वैष्णवी गोस्वामी ने किया है। उम्मीद है इस गीत को गोपुली से भी ज्यादा प्यार मिलेगा।

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