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Prayagraj : अरैल तट पर श्री राम कथा सुनकर भावविभोर हो गए भक्त 

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प्रयागराज। अरैली तट पर मानस अक्षयवट रामकथा में श्रोताओं (Audience) का सैलाब उमड़ रहा है। श्रीराम के जन्मोत्सव की कथा सुनकर भक्त (Devotees) भावविभोर हो गए। पंडाल में श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे।
कथा के दौरान मोरारी बापू ने मानस और मुक्ति की महिमा बताते हुए कहा कि मानस विश्व का हृदय है। परामात्मा सबके हृदय में विद्यमान हैं। लोग मुझसे पूछते हैं गुरु की क्या जरूरत है? गुरु वह है जो अंधेरे से पहले दिया जला देता है। अहंकार को मिटा देता है। गुरु अनावरण करता है। तमस नष्ट कर देता है। ईश्वर रूपी गुरु सर्वश्रेष्ठ है। बिना तन चाप के गुरु का अहसास हो जाता है। व्यासपीठ में मुझे ऊर्जा मिलती है। चिंता मुक्त रहिए।
बापू ने कहा मेरे भाई-बहनों संवाद (Dialogue) के जरिए मैं आपको अपने निकट लाना चाहता हूं। तुलसी ने लिखा है मन को छिपाओ नहीं बाहर लाओ। मन से तकरार न करो, यह बहुत चंचल है, मन बहुत प्यारा है। मन के दर्पण को प्रभु के रज से साफ करना चाहिए।

मोरारी बापू ने बताई मनुज की व्याख्या
मोरारी बापू ने कहा कि कुछ लोगों को मनुवादी करते हैं। हम सब मनु से पैदा हुए हैं, इसलिए मनुज कहलाए। हम जिस के मनु की संतान हैं वह स्वंय मन हैं। बापू ने कहा मैं मनुवादी नहीं मनवादी हूं। मैं बुद्धिवादी भी नहीं हूं।

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