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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर जारी होगा डाक टिकट व सिक्‍का, एक मंच पर होंगे मोदी और ममता

न्‍यूज टुडे नेटवर्क। आजाद हिन्‍द फौज के संस्‍थापक और आजाद भारत के निर्माता नेताजी सुभाष चन्‍द्र बोस की 125वी जयंती पर केन्‍द्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी बंगाल में नेताजी की याद में डाक टिकट और सिक्‍का जारी करेंगे। दरअसल पश्चिम बंगाल में अप्रैल और मई में विधानसभा चुनाव होने हैं। लिहाजा बंगाल में राजनैतिक सरगर्मियां तेजी से बढ़ रही हैं। भाजपा इस बार बंगाल चुनावों में ममता बनर्जी की तृणमूल कांगेस को मात देकर सत्‍ता पर काबिज होना चाहती है। इसके लिए भाजपा चुनावी माहौल के शुरू से ही ऐड़ी चोटी का जोर लगा रही है।

आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी खुद कोलकाता पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि नेताजी की 125वीं जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ भाजपा की धुर विरोधी नेता पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी मंच साझा करेंगी। केंद्र सरकार नेताजी सुभाष बोस की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मना रही है। आज पीएम मोदी कोलकाता में दो कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वे नेताजी की स्मृति में सिक्का और डाक टिकट जारी करेंगे।

स्‍थानीय और पारंपरिक कार्यक्रमों के जरिए राजनैतिक दल बंगाली मानुष को मनाने और रिझाने का हर संभव प्रयास समय समय पर करते रहते हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में चुनावों के नजदीक होने से अब राजनैतिक माहौल कुछ ज्‍यादा ही गर्म है।

तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सामाजिक-सांस्कृतिक फ्रंट पर बंगाली मानुष को लुभाने की होड़ यूं तो पिछले साल दुर्गा पूजा से ही शुरू हो गई थी। साल 2021 के शुरू होते ही 12 जनवरी को विवेकानंद जयंती पर भी दोनों दलों के बीच जलसे-जुलूस को लेकर मुकाबला जैसा हुआ था। लेकिन तृणमूल के कार्यक्रमों के आगे भाजपा के आयोजन शायद थोड़े फीके रह गए। यही कसर निकालने के लिए नेताजी की जयंती पर अब खुद पीएम मोदी मैदान में उतर गए हैं।

कोलकाता में मोदी दो कार्यक्रमों में भाग लेंगे। नेशनल लाइब्रेरी में नेताजी सुभाषचंद्र बोस पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में संबोधन के बाद वे विक्टोरिया मेमोरियल हॉल में मुख्य कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। यहां आजाद हिंद फौज के सदस्यों का सम्मान किया जाएगा। इसी कार्यक्रम में उनके साथ मंच पर ममता भी रहेंगी। प्रधानमंत्री से पहले उनका भी संबोधन होगा। अब तक राज्य में सांस्कृतिक मोर्चे पर दोनों दलों के कार्यक्रम अलग-अलग होते रहे हैं।

आमतौर पर केंद्र के कार्यक्रमों और बैठकों में ममता मौजूद नहीं रही हैं। अपनी पार्टी के मंच से भाजपा को खरी-खोटी सुना चुकीं ममता के सामने इस बार पद की गरिमा के साथ-साथ पार्टी की छवि बचाने की चुनौती है। बंगाल में राज्य के इतिहास और संस्कृति से जुड़े महापुरुषों के प्रति खासा सम्मान रहा है। यहां जनता इसे बंगालियत से जोड़कर देखती है। यहां खेल और कला की शिक्षा हर घर में दी ही जाती है।

यही वजह है कि जनता सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सीधे तौर पर जुड़ी होती है। विक्टोरिया मेमोरियल हॉल के मंच पर भी मोदी और ममता दोनों का मकसद इसी बंगालियत से खुद को करीब दिखाना होगा। यह भी तय है कि इसी बंगाली सेंटिमेंट को जीतने वाले का पलड़ा आने वाले विधानसभा चुनाव में भारी होगा।

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