नीति आयोग के गवर्निंग काउंसिल की बैठक में सीएम ने किया प्रतिभाग, बोले मिड-डे-मील में शामिल हो पहाड़ का मंडुवा और झंगोरा

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देहरादून- आज मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में प्रतिभाग किया। हिमालयी स्टेट रीजनल काउंसिल, केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना, चारधाम महामार्ग परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना व नमामि गंगे परियोजना के लिए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा है कि उत्तराखण्ड को अपनी पर्यावरणीय सेवाओं के लिए प्रोत्साहन के रूप में वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए। मिड-डे मील में मंडुवा, झंगौरा भी शामिल किए जाएं। उत्तराखण्ड के सीमांत क्षेत्रों में रोड़ कनेक्टिविटी के साथ एयर व रेल कनेक्टिविटी भी विकसित की जाएं।

 

जलशयों का हो रहा निर्माण

राज्य सरकार द्वारा वर्षा जल संवद्र्धन के लिए विभिन्न जनपदों में जलाशयों का निर्माण किया जा रहा है। देहरादून में आगामी 30 वर्षों से भी अधिक समय तक निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित किये जाने के लिए सौंग बांध पेयजल परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार के द्वारा वर्ष 2022 तक 5000 समस्याग्रस्त प्राकृतिक जल स्त्रोत को पुनर्जीवित एवं सवंद्र्धित करने का कार्य किया जायेगा। राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा वर्ष 2018-19 में वर्षा जल संचय हेतु कुल 19.22 लाख संरचनायें निर्मित की गयीए जिसमें 11,730 लाख लीटर जल संचय की क्षमता विकसित हुई है। राज्य सरकार द्वारा बिल्डिंग बाईलॉज में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया गया है।

पहाड़ के अनाजों से कुपोषण दूर किया जाय

कुपोषण की समस्या दूर करने के लिए महिलाओं के द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से स्थानीय उपज मंडुवा, चौलाई, झिंगौरा इत्यादि से विनिर्मित पोषक आहार ऊर्जा को जिलों में ही तैयार करके, अतिकुपोषित बच्चों को पूरक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने हेतु रूरल ग्रोथ सेन्टर्स पर कार्य किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक न्याय पंचायत क्षेत्र में उस क्षेत्र की मुख्य आर्थिकी के अनुरूप नियोजित आर्थिक विकास किया जायेगा। कृषि के क्षेत्र में कई अभिनव प्रयोग जैसे ट्राउट फार्मिंगए हैम्प कल्टिवेशन एवं प्रोडक्शन, एकीकृत फार्मिंग मॉडलए फार्म मशीनरी बैंक एंव कस्टम हायरिंग सेन्टर्स इत्यादि के माध्यम से कृषि क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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