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पंतनगर- दीक्षान्त समारोह में 1417 छात्रों को मिली उपाधि, पंतनगर विवि के लिए राज्यपाल ने कही ये बड़ी बात

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पंतनगर-न्यूज टुडे नेटवर्क- पंतनगर विश्वविद्यालय को अपने विभिन्न कार्यक्रमों का पुनर्वालोकन व प्राथमिकताओं का पुनर्निधारण करना चाहिए। यह बात आज उत्तराखण्ड की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति बेबी रानी मौर्य ने पंतनगर विवि के 32वें दीक्षांत समारोह में कही। राज्यपाल ने प्रगतिशील कृषक पद्मश्री भारत भूषण त्यागी को विज्ञान वारिधि की मानद उपाधि से विभूषित किया। इसके बाद उन्होंने पीएचडी व अन्य पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की। सर्वोत्तम स्नातक को कुलाधिपति के स्वर्ण पदक व विभिन्न पाठ्यक्रमों के उत्तम विद्यार्थियों को कुलपति के स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक भी प्रदान किये। राज्यपाल ने सर्वप्रथम उपाधि प्राप्तकर्ताओं को बधाई दी एवं उनके उज्जवल भविष्य की कामना की तथा विद्यार्थियों से दीक्षान्त समारोह में ली गयी शपथ को जीवन में उतारने के लिए कहा।

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जैविक खेती को बढ़ाया देने का दिया सुझाव

मौर्य ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रहे पर्यावरण परिवर्तन के परिणामस्वरूप यहां की पारिस्थितिकी, फसलों, जीवों इत्यादि पर पडऩे वाले प्रभावों व परिवर्तनों पर शोध करना विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उत्तराखण्ड की विशिष्ट फसलों को पौष्टिकता एवं औषधीय गुणों के लिए वैश्विक स्तर पर जाना जाता है। इन फसलों के उत्पादन को बढक़र किसानों को अधिक से अधिक लाभ दिलाना भी वैज्ञानिकों के शोध का विषय होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में प्राकृतिक संसाधनों में लगातार हो रही कमी, घटती कृषि भूमि तथा प्रदूषित एवं परिवर्तित हो रहा पर्यावरण वैज्ञानिकों के लिए चुनौती हैं। जिनके समाधान ढूंढने के लिए हमारे वैज्ञानिक तैयार हैं। खेती में बढ़ती लागत को कम करने के लिए पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन, मुर्गीपालन को जोडऩे व जैविक खेती को बढ़ावा देने का उन्होंने सुझाव दिया।

गिनाई विवि की उपलब्धियां

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि प्रगतिशील कृषक व जैविक खेती के प्रख्यात किसान, पद्मश्री भारत भूषण त्यागी थे। त्यागी ने कहा कि कृषि में परिवर्तन से पहले प्राकृतिक व्यवस्था को समग्रता से समझने की आवश्यकता है जिस पर अनुसंधान होना चाहिए। उन्होंने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय में जो शोध हुए उनका उद्देश्य अधिकतम उत्पादन था, जिसे सफलता भी मिली लेकिन, मात्रा बढऩे के जोश में मृदा व मानवीय स्वास्थ्य, पर्यावरण, उत्पाद गुणवत्ता इत्यादि पीछे छूट गये। कुलपति डा. तेज प्रताप ने सभी अतिथियों व विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए विवि द्वारा शिक्षण, शोध व प्रसार के क्षेत्रों में पिछले एक वर्ष में प्राप्त की गयी उपलब्धियों को प्रस्तुत किया। उन्होंने विवि को पिछले दीक्षान्त समारोह के बाद से अबतक मिले विभिन्न अवार्ड व सम्मानों के बारे में बतायाए जिसमें हाल ही में राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं की रेंकिंग में पंतनगर को कृषि विश्वविद्यालयों में सर्वोच्च स्थान तथा सभी विश्वविद्यालयों में 38वां स्थान
मिलने की जानकारी दी।

14 को मिला कुलपति स्वर्ण पदक

दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति बेबी रानी मौर्य ने 1417 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की। साथ ही 36 विद्यार्थियों को विभिन्न पदक प्रदान किये गये, जिनमें सर्वोत्तम स्नातक विद्यार्थी को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 14 विद्यार्थियों को कुलपति स्वर्ण पदक, 11 विद्यार्थियों को कुलपति रजत पदक तथा 11 विद्यार्थियों को कुलपति कांस्य पदक प्रदान किये गये। इनके अलावा 7 विद्यार्थियों को विभिन्न अवार्ड प्रदान किये गये, जिनमें एक विद्यार्थी को पूरन आनन्द अदलखा स्वर्ण पदक अवार्ड, एक विद्यार्थी को सरस्वती पांडा स्वर्ण पदक अवार्ड, एक विद्यार्थी को नागम्मा शान्ताबाई अवार्ड, एक विद्यार्थी को डा. राम शिरोमणी तिवारी अवार्ड, एक विद्यार्थी को डा. बीबी सिंह अवार्ड तथा दो विद्यार्थियों को चौधरी चरण सिंह स्मृति प्रतिभा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।