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अब शासन को भी पता रहेगा, बच्चों को पोषाहार और गरीबों को राशन मिला या नहीं, जानिए, क्या हुई है व्यवस्था

न्‍यूज टुडे नेटवर्क। सार्वजनिक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए शासन स्तर से पहल शुरू हो गई है। अब गरीबों में बंटने वाले राशन और बच्‍चों को मिलने वाले पोषाहार वितरण की शासन सीधे निगरानी करेगा। पोषाहार वितरण के लिए व्‍यवस्‍था लागू कर दी गई है। बच्‍चों का पोषाहार अब कोटेदार हजम नहीं कर पाएंगे। इसके लिए राशन कार्ड धारकों का मोबाइल नंबर और फोटो पहचान पत्र की कॉपी जुटाई जा रही है। दिया पोर्टल पर लभार्थियों का यह सभी डाटा फीड किया जाएगा।

15 जनवरी तक सूचना न भेजने पर संबंधित अधिकारियों का वेतन रोकने के भी निर्देश शासन ने दिए हैं। नई व्यवस्था से गरीबों का राशन हजम करने वाले कोटेदारों में हड़कंप है। आंगनबाड़ी सेन्‍टरों पर दर्ज सभी बच्‍चों और किशोरियों का डाटा शासन ने तलब किया है। गौरतलब है कि कोरोना काल के बाद पोषाहार वितरण व्‍यवस्‍था बेपटरी हो गई थी। इसे सुचारू करने के लिए शासन ने दोबारा प्रक्रिया दुरूस्‍त करनी शुरू कर दी है।

पोषाहार प्राप्‍त करने वाले बच्‍चों का डाटा, मोबाइल नम्‍बर नाम और पता शासन के पोर्टल पर फीड किया जाएगा। पोषाहार के वितरण के बारे में समय समय पर शासन सीधे लाभार्थियों से फीड बैक लेगा। बाल विकास सेवा एवं पुष्‍टाहार विभाग के निदेशक की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। डीपीओ को इस संबंध में निर्देश मिल गए हैं।

इससे पहले भी शासन ने कोटेदारों से क्षेत्र के दस दस लाभार्थियों के मोबाइल नम्‍बर मांगे गए थे। तब कोटेदारों ने केवल चहेतों के नम्‍बर शासन को भेज दिए। फीडबैक के समय कोटेदार के अनुसार ही उन लाभार्थियों ने फीड बैक दे दिया। अब शासन ने सभी लाभार्थियों के मोबाइल नम्‍बर और नाम पता आदि मांगा है। शासन के इस फरमान के बाद कोटेदारों में हड़कंप मचा हुआ है। उधर, बीपीएल और एपीएल कार्ड धारकों का भी डाटा शासन ने तलब कर लिया है। तमाम जिलों से गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को सुचारू खाद्यान्‍न ना मिलने की शिकायतें मिल रही थीं।

उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ के खाद्य आयुक्त ने प्रदेश के सभी जिलापूर्ति अधिकारियों से अन्तोदय, बीपीएल और एपीएल कार्ड धारकों का मोबाइल नंबर और आईडी मांगी है। खाद्य आयुक्त ने 15 जनवरी तक सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर आपूर्ति विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का वेतन रोकने का निर्देश दिया है। उल्लेखनीय है कि गरीबों को कम दाम पर मिलने वाले अनाज की कालाबाजारी की निरंतर शिकायत रही है। बीते वर्ष अनाज वितरण की निगरानी को शासन ने हर गांव के 10 कार्ड धारकों का मोबाइल नंबर मांगा था।

इसमें से अधिकत्तर कोटेदारों ने अपने चहेते 10 कार्ड धारकों का मोबाइल नंबर भेज दिया। यह मोबाइल धारक शासन से वितरण के बाबत पूछताछ होने पर कोटेदारों के मनमाफिक जवाब दे रहे थे। इस बार शासन ने सभी कार्ड धारकों का मोबाइल नंबर मांगा है। जिलापूर्ति अधिकारी ने सभी पूर्ति निरीक्षकों को जनवरी के पहले सप्ताह में सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

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