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सीमा पर दुश्मनों की अब खैर नही, क्योंकि निगरानी करने आ गया ये रोबोट….

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नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : लगातार सीमा पर आतंक के खतरे से जुझते हमारे जवानों को अब राहत मिलेगी। डिफेंस क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इस तरह के रोबोट के विकास पर काम कर रही है। बतादें, बेल के इस रोबोट में ऐसे सेंसर और प्रोग्राम होंगे, जो कंट्रोल सेंटर को तत्काल कोई जानकारी भेज सकेंगे। फिलहाल बेल की बेंगलुरु और गाजियाबाद स्थित सेंट्रल रिसर्च लाइब्रेरी और बेंगलुरु के बेल सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी सेंटर (BSTC) के 80 वैज्ञानिक और इंजीनियर निगरानी रोबोट तैयार करने में लगे हुए हैं।

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सरहद की निगरानी

भारत और पाकिस्तान का अभी भी 146 किमी का बॉर्डर एरिया ऐसा है जहां तारबंदी कर पाना मुमकिन नहीं है। हाल में ही सरहद की निगरानी के लिए स्मार्ट फेंसिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत हो गई है। इसका नाम है कॉप्रीहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम यानी CIBMS। इस सिस्टम में एक अदृश्य लेजर वॉल रहेगी, जो सरहद की निगरानी करेगी। यह रोबोट श्रीलंका में हाल में हुई आतंकवादी घटनाओं जैसे हालात को रोकने के लिए भी कारगर हो सकता है। सीमा पर गश्ती के लिए ऐसे रोबोट तैनात करने का सबसे ब?ा फायदा यह होगा कि इससे सीमा पर हमारे जांबाज सैनिकों की शहादत या उनके घायल होने की घटनाएं कम होंगी।

70-80 लाख रुपए होगी कीमत

सीमा पर गश्ती के लिए ऐसे रोबोट तैनात करने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे सीमा पर हमारे जांबाज सैनिकों की शहादत या उनके घायल होने की घटनाएं कम होंगी। छोटे ऑर्डर के लिए इन रोबोट की अनुमानित लागत 70 से 80 लाख रुपये की होगी। लेकिन ज्यादा संख्या में ऑर्डर मिलने पर इस रोबोट की लागत और कम हो जाएगी। फिलहाल बेल की बेंगलुरु और गाजियाबाद स्थित सेंट्रल रिसर्च लाइब्रेरी और बेंगलुरु के बेल सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी सेंटर (BSTC) के 80 वैज्ञानिक और इंजीनियर निगरानी रोबोट तैयार करने में लगे हुए हैं।

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खबर के अनुसार, बेल की योजना दिसंबर के पहले हफ्ते में तैयार हो जाने वाले पहले प्रोटोटाइप रोबोट की आंतरिक समीक्षा करने की है। इसके लिए यूजर ट्रायल फरवरी 2020 तक शुरू हो सकता है। बेल इस साल के अंत तक कई और एआई क्षमता वाले उत्पाद तैयार करेगा। हालांकि ऐसे उत्पादों के लिए उसे सेना से कोई मांग नहीं मिली है, लेकिन वह खुद ही ऐसे उत्पाद कर रही है जो कि सेना के लिए उपयोगी हो सके।

रोबोट तैनात करने का फायदा

करीब सवा तीन हजार किमी का बॉर्डर भारत को पाकिस्तान से अलग करता है। इसमें से ज़्यादातर एरिया को भारत ने फेंसिंग लगाकर महफूज कर रखा है। मगर 146 किमी का बॉर्डर एरिया अभी भी ऐसा है जहां तारबंदी कर पाना मुमकिन नहीं है। और यही वो जगह हैं जहां से घुसकर आतंकी भारत में अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देते हैं।

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हाल में ही सरहद की निगरानी के लिए स्मार्ट फेंसिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत हो गई है। इसका नाम है कॉप्रीहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम यानी CIBMS। इस सिस्टम में एक अदृश्य लेजऱ वॉल रहेगी, जो सरहद की निगरानी करेगी. इस दौरान एक साथ कई सिस्टम काम कर रहे होंगे, जो हवा, जमीन और पानी में देश की सीमा की रक्षा करेंगे।