अब पेंशनधारियों को चिंता की जरूरत नहीं, घर बैठे ऐसे जमा होगा ई-जीवन प्रमाण पत्र

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वरिष्ठ नागरिकों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। पेंशनभोगियों को सेवानिवृत्ति के बाद बैंक जैसे अधिकृत पेंशन संवितरण एजेंसी में अपना जीवन प्रमाण-पत्र जमा कराना पड़ता है, जिसके बाद ही उन्हें पेंशन दी जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया की मुहिम को आगे बढ़ाने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने पेंशनरों को जीवन प्रमाणपत्र के मामले में बड़ी राहत दी है। अब डिजिटल माध्यम से ई-जीवन प्रमाणपत्र दिया जायेगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आइएफएमएस सॉफ्टवेयर का लोकार्पण कर दिया।

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अब उत्तराखंड के पेंशनर देश-विदेश कहीं से भी ई-जीवन प्रमाणपत्र ऑनलाइन जमा कर सकेंगे। कॉमन सर्विस सेंटर से भी यह सुविधा मिलेगी। पेंशनर अपने नजदीकी सीएससी से ई-जीवन प्रमाणपत्र ऑनलाइन जमा करा सकेंगे। दूर-दराज के क्षेत्रों से बुजुर्गों को चलकर आना पड़ता है। जिसे देखते हुए ई-जीवन प्रमाणपत्र की व्यवस्था की गई है। ई-जीवन प्रमाण पत्र को कोषागार, उपकोषागार, सीएससी, पर्सनल कंप्यूटर, टैब और मोबाइल एप से भी भरा जा सकेगा। प्रमाणपत्र के स्वीकृत होने पर इसकी सूचना मोबाइल नंबर और मेल आइडी पर उपलब्ध रहेगी। राज्य के करीब 1.52 पेंशनरों और न्यू पेंशन स्कीम को भी ई-गवर्नेंस से जोड़ा गया है।

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क्या है विशेषतायें-

ई-जीवन प्रमाण पत्र पूर्णत: सुरक्षित है।
आधार व्यवस्था से क्रियांन्वित होने के फलस्वरूप ई-जीवन प्रमाण पत्र त्वरित जनरेट होता है।
ई-जीवन प्रमाण पत्र प्रदेश के किसी भी कोषागार/उपकोषागार से भरा जा सकता है।
ई-जीवन प्रमाण पत्र देश के किसी भी सीएससी केन्द्र, जीवन प्रमाण पत्र केन्द्र तथा बैंक से भर सकते है।
ई-जीवन प्रमाण पत्र स्वयं घर बैठे भी भरा जा सकता है।
ई-जीवन प्रमाण पत्र कम्प्यूटर/टेबलेट/मोबाइल एप के माध्यम से भी भरा जा सकता है।
ई-जीवन प्रमाण पत्र जारी/स्वीकृत होने पर पेंशनर के पंजीकृत मोाबइल नंबर एवं ई-मेल पर सूचना उपलब्ध हो जायेंगी।
ई-जीवन प्रमाण पत्र हेतु किसी भी प्रकार के प्रपत्र जमा करने की आवश्यकता नहीं है।
ई-जीवन प्रमाण पत्र किसी भी दिन/समय भरा जा सकता है।
ई-जीवन प्रमाण पत्र आवश्यकतानुसर कभी भी देखी एवं प्रिन्ट लिया जा सकता है।

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