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नैनीताल- अब आसाराम बापू को उत्तराखंड हाईकोर्ट से लगा बड़ा झटका, कोर्ट ने दिये ये आदेश

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नैनीताल-न्यूज टुडे नेटवर्क- राजस्थान में नाबालिग से रेप केस में आजीवन कारावास की सजा काट रहे संत आसाराम बापू को उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय से भी बड़ा झटका लगा है। न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने ऋषिकेश मुनि की रेती ब्रह्मपुरी निरगढ़ में वन भूमि पर कब्जे को अतिक्रमण मानते हुए हटाने तथा वन विभाग को कब्जे में लेने के आदेश पारित किए हैं। अब वनभूमि खाली होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं । उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने 4 दिसंबर को जारी अपने आदेश में उच्च न्यायालय के पूर्व के स्टे आदेश को स्थगित कर दिया है । इस आदेश के बाद अब वन विभाग की भूमि को आश्रम के कब्जे से खाली कराने का रास्ता साफ हो गया है ।

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अब खाली हो सकेंगी कब्जे की जगह

गौरतलब है कि 23 फरवरी 2013 को अपर मुख्य मुख्य वन संरक्षक राजेन्द्र कुमार ने रेन फारेस्ट हाउस निवासी स्टीफन व तृप्ति के शिकायती पत्र पर कार्रवाई के आदेश डीएफओ नरेंद्रनगर को दिए थे। शिकायत में कहा था कि आशाराम आश्रम के कर्मचारियों द्वारा अतिक्रमण कर नाले में दीवार बना दी है। जिस भूमि पर कब्जा किया था उसकी लीज लक्ष्मण दास के नाम थी, जो कालातीत हो गई, मगर आशाराम के कर्मचारियों ने अतिक्रमण कर डाला। इसके बाद नौ सितंबर को वन विभाग की ओर से वन भूमि खाली करने का नोटिस आशाराम को दिया गया तो 17 सितंबर 2013 को हाईकोर्ट ने नोटिस पर रोक लगा दी। इसके बाद वन विभाग द्वारा मामले में इंटरवेंशन डाली गई। वन विभाग की ओर से अधिवक्ता कार्तिकेय हरीगुप्त ने अदालत को बताया कि लीज 1970 में समाप्त हो चुकी है और कानूनी रूप से लीज ट्रांसफर नहीं हो सकती। जस्टिस तिवारी की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद स्टे ऑडर निरस्त कर दिया।