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नई दिल्ली-जानिये नये विदेश मंत्री सु्ब्रमण्यम जयशंकर के बारे में, कैसे पहुंचे इस मुकाम तक

नई दिल्ली-मोदी सरकार में इस बार सु्ब्रमण्यम जयशंकर को देश का नया विदेश मंत्री की जिम्मेदारी मिली है। पीएम मोदी के इस फैसले ने सबको चौंका दिया। एस जयशंकर जनवरी 2015 से जनवरी 2018 तक विदेश सचिव रहे। जयशंकर ने विदेश सचिव के रूप में अमेरिका, चीन समेत बाकी देशों के साथ भी महत्वपूर्ण बातचीतों में हिस्सा लिया। चीन के साथ 73 दिन तक चले डोकलाम विवाद को सुलझाने में भी जयशंकर का अहम रोल बताया जाता है। इसी का फल उन्हें विदेश मंत्री बनाकर मोदी सरकार ने दिया है। जयशंकर के सामने अमेरिका और ईरान के साथ रिश्तों का संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा पड़ोसी देशों में चीन के बढ़ते प्रभाव से निपटना भी होगा।

अन्य देशों से रिश्ते बनाने में सक्रिय

खबरों की माने तो भारत जी-20, एससीओ, ब्रिक्सए इंडो-आसियान, भारत-अफ्रीका मंच जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेतृत्वकारी भूमिका निभाना चाहता है। इसके लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ेगी। इन सभी संगठनों में भारत के हितों की रक्षा करनी प्रमुख चुनौती होगी। खुद पीएम मोदी दुनिया के विभिन्न देशों से रिश्ते बनाने में काफी सक्रिय रहते हैं, ऐसे में विदेश मंत्री के रूप में एस जयशंकर को हमेशा कमर कसकर रखनी होगी और उनके पास शिथिल होने का मौका नहीं होगा। मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले एस जयशंकर का जन्म दिल्ली में हुआ। उनके दिवंगत पिता के सुब्रमण्यम भारत के प्रमुख रणनीतिक विश्लेषकों में से एक माने जाते रहे हैं। एस. जयशंकर की शिक्षा एयरफोर्स स्कूल और सेंट स्टीफेंस कॉलेज में हुई। उनकी पत्नी का नाम क्योको जयशंकर है और उनके दो पुत्र तथा एक पुत्री हैं। जयशंकर ने पॉलिटिकल साइंस से एमए करने के अलावा एमफिल और पीएचडी भी किया है। वह इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटिजक स्टडी लंदन के भी सदस्य हैं।

मोदी ने परखी उनकी काबिलियत

वर्ष 2013 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री की निगाह में विदेश सचिव पद के लिए दो नाम सामने थे। इनमें सुजाता सिंह और जयशंकर में मुकाबला था, जिसमें सुजाता ने बाजी मारी थी। वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने केंद्र में सत्ता संभाली तब उन्‍होंने एस जयशंकर को विदेश सचिव की जिम्‍मेदारी सौंपी। विदेश सचिव के तौर पर उनका कार्यकाल 017 को समाप्त हो रहा था लेकिन पीएम मोदी ने उनकी काबलियत को देखते हुए ही उनको एक्‍सटेंशन दिया था। इस तरह से जयशंकर साल 2015 से लेकर साल 2018 तक विदेश सचिव रहे। मोदी की वर्ष 2018 तक की लगभग हर विदेश यात्रा के दौरान जयशंकर उनके साथ रहे। 2018 में रिटायर होने के बाद उन्होंने टाटा ग्रुप में बतौर वैश्विक कॉर्पोरेट मामलों के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। भारत और अमेरिका के बीच हुए सिविल न्‍यूक्लियर एग्रीमेंट में जयशंकर की भूमिका काफी अहम थी।

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