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नई दिल्ली-कल से शुरू हो रहे नवरात्रि, जानिये किन-किन चीजों को खरीदने का है शुभ समय

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नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क- चैत्र नवरात्र इस वर्ष छह अप्रैल को शुरू होकर 14 अप्रैल को समाप्त होंगे। नवरात्र में कोई तिथि क्षय नहीं है। इस बार चैत्र नवरात्र पूरे नौ दिन के ही रहेंगे। इस साल नवरात्र में कई शुभ ही इस साल नवरात्र में पांच सर्वार्थ सिद्धि योग रवियोग और रवि पुण्य योग का संयोग बन रहा है। इसलिए यह नवरात्र देवी साधकों के लिए विशेष रहेंगे। नवरात्र का समापन 14 अप्रैल को होगा। वही नवरात्र के पहले दिन यानि प्रतिपदा को मंगल ग्रह की शांति के लिये पूजा की जाती है। इसके साथ ही मंगल की शांति के लिये प्रतिपदा को स्कंदमाता के स्वरूप की पूजा करनी चाहिये। इस वर्ष घटस्थापना प्रात: काल 7.20 से 8.53 तक शुभ चौघडिय़ा में सर्वोत्तम है। किसी कारण नहीं कर पाए अभिजीत मुहूत्र्त एवं मध्याह्न 11.30 से 12.18 तक किया जाना उत्तम होगा। वैसे इस वर्ष घटस्थापना सुबह सूर्योदय से दोपहर 02.58 से पूर्व प्रतिपदा तिथि में किया जा सकता है।

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भूमि मकान खरीदना उत्तम

चतुर्थ नवरात्र नौ अप्रैल को सर्वार्थ सिद्धि योग भूमि मकान की खरीदारी के लिए उत्तम होगा। पंचम नवरात्र 10 अप्रैल के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग जो कि लक्ष्मी पंचमी से भी जाना जाता है। धन धान्य संबंधी कार्य के लिए अच्छा है। छठा नवरात्र 11 अप्रैल के साथ रवि योग संतान सुरक्षा के लिए अति उत्तम है। सातवां नवरात्र 12 अप्रैल के सर्वार्थ सिद्धि योग नए संबंध को बनाने उन पर चर्चा करने के लिए श्रेष्ठ रहेगा। वही आठवां नवरात्र 13 अप्रैल को कुल देवी पूजन के लिए ठीक है साथ में स्मनि अनुसार 11.48 बजे तक अष्टमी है और इसके बाद नवमी शुरू हो जाएगी। नवम नवरात्र 14 अप्रैल को रवि पुण्य व सर्वार्थ सिद्धि योग होना बहुत उत्तम है। वैष्णव मवानुसार सुबह 9.37 तक नवमी होने से इस मत के लोग 14 अप्रैल को राम नवमी मनाएंगे।

ऐसे करें पूजा

शुद्ध पवित्र आसन पर बैठक माता का मंत्र जाप करना चाहिए। रुद्राक्ष या चंदन की माला से पांच या कम से कम एक माला जप करना चाहिए। कलश पर नारियल रखना चाहिए। कलश स्थापना का यह उद्देश्य तभी सफल होता है। जब कलश पर रखा हुआ नारियल का मुख पूजन करने वाले व्यक्ति की ओर हो। नारियल का मुख नीचे होने से शत्रुओं की वृद्घि होती है। नारियल खड़ा और मुख ऊपर की ओर होने से रोग बढ़ सकते हैं।

नौ देवियों की होती है पूजा
नवरात्र प्रथम – शैलपुत्री
नवरात्र द्वितीय – ब्रह्मचारिणी
नवरात्र तृतीय – चंद्रघंटा
नवरात्र चतुर्थी – कुष्मांडा
नवरात्र पंचमी – स्कंदमाता
नवरात्र षष्ठी – कात्यायनी
नवरात्र सप्तमी – कालरात्रि
नवरात्रि अष्टमी – महागौरी
नवरात्र नवमी – सिद्धिदात्री