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नई दिल्ली-जीएसटी पर कारोबारियों को बड़ा तोहफा, लेकिन इन राज्यों ने किया विरोध

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नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क-गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स काउंसिल ने छोटे कारोबारियों को बड़ा तोहफा दिया है। छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी से छूट की सीमा को दोगुना कर 40 लाख रुपये कर दिया। अब डेढ़ करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाली इकाइयां एक प्रतिशत दर से जीएसटी भुगतान की कम्पोजिशन योजना का फाायदा उठा सकेंगी। यह व्यवस्था एक अप्रैल से प्रभावी होगी। पहले एक करोड़ रुपये तक के कारोबार पर यह सुविधा प्राप्त थी। वही राज्यों को 20 लाख रुपये या 40 लाख रुपये की छूट सीमा में से किसी को भी चुनने का विकल्प होगा। क्योंकि कुछ राज्य छूट सीमा बढ़ाने को राजी नहीं थे। अब 40 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाली कंपनियों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन से मुक्तिमिल गई है।इसी तरह जीएसटी काउंसिल ने पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों की कंपनियों के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट की सीमा 10 लाख रुपये से दोगुना कर 20 लाख रुपये सालना टर्नओवर करने का ऐलान किया।

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छूट सीमा 20 लाख से 40 लाख सालाना

वही काउंसिल ने कंपोजिशन स्कीम का चयन करने वाली कंपनियों को रिटर्न भरने पर भी बड़ी राहत दी है। बताया जा रहा है कि अब कंपोजिशन स्कीम में जाने वालों को टैक्स तो हर तिमाही देना होगा, लेकिन रिटर्न साल में एक बार ही भरना होगा। कंपोजिशन स्कीम से जुड़े दोनों फैसले नए वित्त वर्ष की पहली तारीख यानी 1 अप्रैल 2019 से लागू होंगे। वही वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि छोटे कारोबारियों के लिये जीएसटी छूट सीमा को 20 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रुपये सालाना कर दिया गया है जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में इसे बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया गया है। पूर्वोत्तर राज्यों के व्यवसायियों के लिये पहले यह सीमा दस लाख रुपये थी। जीएसटी परिषद की इस पहल से पंजीकृत 1.17 करोड़ कारोबारियों में से करीब 70 प्रतिशत का फायदा होगा।

कांग्रेस शासित राज्यों ने किया जीएसटी में राहत का विरोध

उधर छत्तीसगढ़ समेत कांग्रेस शासित राज्यों के मंत्रियों का रुख अलग है। जीएसटी काउंसिल की बैठक में जब छोटे व्यापारियों को राहत देने का प्रस्ताव रखा तो कांग्रेस शासित राज्यों ने एतराज जताया। काउंसिल ने जब सेवा क्षेत्र के कारोबारियों के लिए जीएसटी की दर पांच फीसद तय करने का प्रस्ताव किया तो छत्तीसगढ़ ने इसका विरोध करते हुए इसे आठ फीसद रखने की मांग की। बाद में काउंसिल ने इसकी दर छह फीसद तय की। छत्तीसगढ़ ने जीएसटी से छूट की सीमा 20 लाख से बढक़र 75 लाख रुपए करने का भी विरोध किया। यह सीमा आखिर में 40 लाख रुपए तय की गई।