नासा का खुलासा : लगातार सिकुड़ता जा रहा चांद, इसलिए आ रहे हैं भूकंप

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नई दिल्ली। नासा ने चांद से संबंधित चौंका देने वाला खुलासा किया है नासा ने अंतरिक्ष में मौजूद ग्रहों के साथ तस्वीर ली है। जिसमें अध्ययन किया गया तो पाया कि चंद्रमा अब लगातार सिकुड़ता जा रहा है। जो अब वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बना गया है। इससे उसकी सतह पर झुर्रियां पड़ रही हैं। इसी वजह से भूकंप भी आ रहे हैं। यह जानकारी प्रकाशित नासा के लूनर रीकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) द्वारा कैद की गई 12,000 से अधिक तस्वीरों के विश्लेषण से सामने आई है।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक

वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रमा में ऐसी गतिविधि ऊर्जा खोने की प्रक्रिया में 4.5 अरब साल पहले हुई थी। ऊर्जा खोने वाली प्रक्रिया की वजह से भी लाखों वर्षों से चंद्रमा 150 फिट सिकुड़ चुका है। ये प्रक्रिया अब भी जारी है। जिस कारण चंद्रमा के चेहरे पर झुर्रियां पाई गई हैं। इस प्रक्रिया में चंद्रमा पर भूकंप आते हैं।

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उल्लेखनीय है कि कई विशाल बेसिनों में से एक चंद्रमा का ‘मारे फ्रिगोरिस’ भूवैज्ञानिक नजरिये से मृत स्थल माना जाता है। जैसा की धरती के साथ है, चंद्रमा में कोई भी टैक्टोनिक प्लेट नहीं है। इस वजह से यहां की टैक्टोनिक गतिविधियों ने वैज्ञानिकों को भी हैरत में डाल दिया है।

इस वजह से सिकुड़ रहा चांद

  • वैज्ञानिकों का मत है कि ऊर्जा खोने की प्रक्रिया के कारण ही चंद्रमा पिछले लाखों वर्षों से धीरे-धीरे लगभग 150 फिट तक सिकुड़ गया है।
  • यूनिवर्सिटी ऑफ मेरी लैंड के भूगर्भ विज्ञानी निकोलस चेमर ने कहा कि इसकी काफी संभावना है कि लाखों साल पहले हुई भूगर्भीय गतिविधियां आज भी जारी है।
  • सबसे पहले अपोलो अंतरिक्ष यात्रियों ने 1960 और 1970 के दशक में चंद्रमा पर भूकंपीय गतिविधि को मापना शुरू किया था। उनका यह विश्लेषण नेचर जीओसाइंस में प्रक्राशित था। इसमें चंद्रमा पर आने वाले भूकंपों का अध्ययन किया गया था।