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मुक्तेश्वर है मोक्ष का धाम, यहां प्रकृति का नजारा है बेहद खूबसूरत, एक बार जरूर बनाएं यहां का प्लान…

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मुक्तेश्वर-न्यूज टुडे नेटवर्क : मुक्तेश्वर उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है। समुद्र तल से लगभग 2286 मीटर की ऊंचाई पर बसे इस छोटे से कस्बे (हिल स्टेशन )का श्रृंगार मानो प्रकृति ने अपने हाथों से किया है । शहर की दौड़भाग व तनाव भरी जिंदगी से दूर प्रकृति की सुंदरता को देखने व सुकून के चंद पलों को प्रकृति की गोद में बिताने के लिए यहां पर हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक यहां आकर अपना सब कुछ भूलकर इन हरी-भरी वादियों में खो जाते हैं। भगवान शिव को समर्पित यह पवित्र धार्मिक स्थल यहां के पहाड़ों पर बसा है, जो श्रद्धालुओं के साथ-साथ दूर-दराज से पर्यटकों को भी बहुत ही ज्यादा प्रभावित करता है। जिन लोगों साहसिक ट्रेकिंग का शौक है वो यहां आ सकते हैं। पहाड़ी के ऊपर बने मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढय़िा भी बनी हैं। पौरामिक किवदंती के अनुसार इस स्थल पर भगवान शिव ने किसी दानव का वध किया था, जिसे बाद में भोलेनाथ द्वारा ही मोक्ष प्राप्त हुआ। मोक्ष यानी मुक्ति, इसलिए यहां श्रद्धालु मोक्ष की कामना करने के लिए इस पवित्र स्थल पर आते हैं। यहां का प्राकृतिक नजारा बेहद खूबसूरत है, जहां आप कुदरती आकर्षणों का आनंद ले सकते हैं।

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मुक्तेश्वर महादेव मंदिर

10 वीं सदी में बने मुक्तेश्वर महादेव मंदिर को कत्यूरी वंश के राजाओं ने बनवाया था। ऐसा माना जाता है कि यह पूरा मंदिर एक ही रात्रि में तैयार किया गया था। इस मंदिर के नाम से ही इस जगह का नाम भी मुक्तेश्वर पड़ा । सुंदर प्राकृतिक दृश्यों तथा ऊंचे-ऊंचे देवदार व बांज के पेड़ों के बीच बने इस मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 100 सीढिय़ां चढऩी पड़ती हैं। यहां पर भोलेनाथ के साथ-साथ देवी पार्वती तथा राम दरबार मंदिर भी स्थित है जिसमें राम,लक्ष्मण, सीता व हनुमान जी की मूर्तियां स्थापित हैं। साथ ही साथ भगवान विष्णु के भावी अवतार कल्कि भी यहां पर विराजमान है। इस मंदिर में एक अजीब सी शक्ति, शांति और सुकून का अनुभव होता है। भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने यूं तो यहां पर श्रद्धालु हर रोज बड़ी तादात में आते हैं। लेकिन विशेष अवसरों में यहां पर श्रद्धालुओं का मेला लगा रहता है। यहां पर लोग भोलेनाथ से मन्नत मांगते हैं। व पूरी होने पर भगवान का धन्यवाद करने हेतु मंदिर में घंटियां भेंट करते हैं। मुक्तेश्वर एक खूबसूरत पिकनिक पर्यटन स्थल के साथ-साथ एक धार्मिक पर्यटन स्थल भी है।

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चौली की जाली की है विशेष मान्यता

धनाचुली भ्रमण की शुरूआत आप यहां के चुनिंदा खूबसूरत स्थलों में शामिल ‘चौली की जाली’ से कर सकते हैं। चौली की जाली प्रसिद्ध मुक्तेश्वर मंदिर से पीछे ही स्थित है। इन्हीं चट्टानों में से एक चट्टान के बीचों बीच एक बड़ा सा छेद है । जहां से आर-पार जाया जा सकता है । ऐसा माना जाता है कि अगर कोई निसंतान महिला इस छेद से होकर आर-पार गुजरे तो उसको निश्चित रूप से ही संतान की प्राप्ति होती है। यह यहां के मुख्य आकर्षणों में गिना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार चौली का मतलब पत्थर होता है और जाली शब्द का अर्थ कोई सुराग। ऐसा माना जाता है कि यहां कभी देवताओं और राक्षसो के बीच युद्ध हुआ था। साक्ष्य के रूप में यहां से बहुत ही चीजों प्राप्त की गई हैं,जैसे हाथी का दांत, तलवार की छाप आदि। यह स्थल खूबसूरत पहाडय़िों से भरा है, जहां का प्राकृतिक नजारा सैलानियों को बहुत ही ज्यादा पसंद आता है।

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घोड़ाखाल गोलू देवता का मंदिर

यहां के धार्मिक स्थलों में आप प्रसिद्ध घोड़ाखाल गोलू देवता के मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर यहां के पवित्र धार्मिक स्थलों में गिना जाता है जो यहां के स्थानीय गोलू देवता को समर्पित है। इस मंदिर को घंटियों का मंदिर भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गोल देवता भगवान शिव का ही अवतार हैं। यह एक अद्बुत मंदिर है क्योंकि यहां एक अजीबगरीब रिवाज का अनुसरण किया जाता है। यहां श्रद्धालु मनकामना पूर्ति के लिए स्टैप पेपर पर अपनी मन्नत लिखते हैं, मंदिर में रखते हैं। गोलू देवता को न्याय का देवता भी कहा जाता है। यह पवित्र मंदिर धनाचुली से लगभग 13 किमी की दूरी पर स्थित है।

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रामगढ़ प्रसिद्ध फल मंडी

मुक्तेश्वर के आसपास अनेक सुंदर जगह हैं । जहां पर बड़ी आसानी से पहुंचा जा सकता है । मुक्तेश्वर से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर शीतला गांव या शीतला स्टेट पड़ता है जहां पर अक्सर पर्यटक ट्रैकिंग व पक्षियों को निहारने व उनकी फोटोग्राफी के लिए जाते हैं । यहां पर अनेक तरह की पक्षियों को आप आसानी से देख सकते हैं । इसीलिए इस जगह पर अक्सर पक्षी प्रेमी अपना समय पक्षियों को निहारते हुए व्यतीत करते हैं । पैराग्लाइडिंग हाइकिंग, कैंपिंग (कैंप लगाने के लिए) जैसे एडवेंचर के शौकीनों के लिए सरगाखेत सबसे उपयुक्त जगह है। यहां से कुछ किलोमीटर की दूरी में रामगढ़ स्थित है। जहां पर मुक्तेश्वर से आसानी से पहुंचा जा सकता है । रामगढ़ फल मंडी के लिए प्रसिद्ध है । यहां पर आडू ,सेव ,खुमानी ,पूलम का बहुत अधिक मात्रा में उत्पादन होता है। नोबेल पुरस्कार विजेता गुरु रवींद्रनाथ टैगोर ने गीतांजलि की रचना यही पर की थी । इसीलिए उस जगह को टैगोर टाप नाम से पहचान मिली है। प्रसिद्ध कवियत्री महादेवी वर्मा भी रामगढ़ में रही थी उनकी स्मृति में महादेवी वर्मा सृजनपीठ है।

कैसे पहुंचे मुक्तेश्वर

काठगोदाम से मुक्तेश्वर की दूरी 75 किमी. है, यहां आपको एक से एक सुंदर नजारे देखने को मिल जाएंगे । यहां की सर्पीली सडक़ें तो कहीं ऊंचे-ऊंचे पहाड़, तो कहीं घने जंगल , बुरास के फूलों से लदे हुए पेड़ ,तो कहीं आडू,खुमानी जैसे फलों के बगीचे , कहीं रोड के किनारे बैठ कर स्थानीय फलों को बेचते हुए स्थानीय लोग। और साथ ही साथ छोटे-छोटे ढाबों में पहाड़ी व्यंजनों का मजा लीजिए खासकर आलू के गुटके, पहाड़ी रायता व पकौडय़िां चाय के साथ आदि का।

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कहां से कितनी है दूरी

दिल्ली से (मोटर मार्ग) – 350 किलोमीटर ।
पंतनगर हवाई अड्डा( एकमात्र ) से – 96 किलोमीटर।
अल्मोड़ा से (मोटर मार्ग) -36 किलोमीटर।
काठगोदाम से (मोटर मार्ग) -75 किलोमीटर।
नैनीताल से (मोटर मार्ग)- 52 किलोमीटर।

मनोरंजन के लिए क्या करें

फोटोग्राफी, पैराग्लाइडिंग,कैंपिंग, हाईकिंग, ट्रेकिंग और हिल स्पोर्ट्स का मजा लीजिए और सुंदर प्राकृतिक जगह को निहारिए।

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कब आए

  • वर्ष के किसी भी महीने में आप मुक्तेश्वर आ सकते हैं। बर्फबारी का मजा लेना हो तो जनवरी से मार्च के बीच में लीजिए।
  • दोस्तों संग मौज मस्ती, परिवार संग पिकनिक तथा नवविवाहित जोड़े या अकेले भी प्रकृति की गोद में कुछ पल बिताने के लिए।
  • जाड़ों में ऊनी एवं गर्म कपड़े तथा गर्मियों में भी हल्के गर्म कपड़े क्योंकि यहां मौसम हर वक्त अपने नए नए रंग दिखलाता है।