मृत शरीर का पोस्टमॉर्टम दिन में ही क्यों होता है रात में क्यों नहीं?, वजह जान उड़ जाएंगे होश

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पोस्टमॉर्टम- मेडिकल साइंस में पोस्टमॉर्टम एक बेहद ही अहम प्रतिक्रिया है, जिससे व्यक्ति की मौत की असली वजह का पता चलता है। हालांकि व्यक्ति की मौत की सटीक वजह जानने के लिए पोस्टमॉर्टम 10 घंटे के भीतर कर लिया जाना चाहिए। लोगों के दिमाग में पोस्टमॉर्टम को लेकर कई तरह के सवाल चलते रहते हैं, जिनका जवाब मिलना काफी मुश्किल है लेकिन असंभव नहीं है। शव का परीक्षण इसलिए किया जाता है, ताकि व्यक्ति की मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके। पोस्टमॉर्टम के लिए मृतक के सगे-संबंधियों की सहमति अनिवार्य होती है। हालांकि कुछ मामलों में पुलिस अधिकारी भी पोस्टमॉर्टम की इजाजत दे देते हैं, जैसे की हत्या।

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दिन में ही क्यों किया जाता है पोस्टमॉर्टम

  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्यक्ति की मौत के बाद 6 से 10 घंटे के अंदर ही पोस्टमॉर्टम किया जाता है, क्योंकि जैसे-जैसे समय ज्यादा बीतता जाएगा मृत शरीर के अंदर प्राकृतिक परिवर्तन नजर आने लगेंगे जैसे कि शरीर टाइट होने लगेगा, उसमें ऐंठन होने लगती हैं।

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  • शवों का पोस्टमॉर्टम करने का समय सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक का ही होता है। इसके पीछे वजह ये है कि रात में ट्यूबलाइट या एलईडी की कृत्रिम रोशनी में चोट का रंग लाल के बजाए बैंगनी दिखाई देता है और फॉरेंसिक साइंस में बैंगनी रंग की चोट का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
  • रात में पोस्टमॉर्टम नहीं कराने के पीछे एक धार्मिक कारण भी बताया जाता है। चूंकि कई धर्मों में रात को अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है, इसलिए कई लोग मृतक का पोस्टमॉर्टम रात को नहीं करवाते हैं।
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