भगवान विष्णु की वजह से शिव जी को छोड़ना पड़ा था ”बद्रीनाथ” धाम, जाना पड़ा था केदारनाथ, जानिए क्या थी वजह

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देहरादून-न्यूज टुडे नेटवर्क : बद्रीनाथ में भगवान विष्णु भक्तों का कल्याण करते हैं तो केदारनाथ में भगवान शंकर अपने भक्तों पर कृपा करते हैं। बद्रीनाथ में भगवान विष्णु का प्राकट्य कैसे हुआ, शास्त्रों के अनुसार इसका अलौकिक सत्य कुछ और ही है। इस संबंध में एक रोचक कहानी आती है। भगवान भोलेनाथ और विष्णु एक ही शक्ति के 2 साकार स्वरूप हैं। शिव ही विष्णु हैं और विष्णु ही शिव है। दोनों में कोई अंतर नहीं। बद्रीनाथ में भगवान विष्णु भक्तों का कल्याण करतें हैं तो केदारनाथ में भोलेनाथ अपने भक्तों पर कृपा करते हंै। बद्रीनाथ में भगवान विष्णु प्राकट्य कैसे हुआ इस संबंध में एक रोचक कथा आती है।

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जानिए क्या है सच्चाई

कहते हैं बद्रीनाथ में कभी भगवान शिव माता पार्वती के साथ रमण करते थे। भगवान शिव अपने गणों और पार्वती के साथ बद्रीनाथ में रहा करते थे। यहां एक बेर का विशाल वन था। यहीं पर उनका वास था। यहां उनकी भरपूर कृपा बरसती थी परंतु भगवान विष्णु को यह स्थान बहुत अधिक पसंद था और उन्होंने इस जगह को पाने के लिए शिव जी से छल करने की सोची। एक दिन भगवान विष्णु बालक रूप धारण कर यहां आए। भगवान शिव यहां माता पर्वती के साथ विराजमान थे। विष्णु जी बालक के रूप में लीला करने लगे। माता पार्वती उस बालक को घर ले आई। बालक को जब भगवान शिव ने देखा तो वह तुरंत पहचान गए कि वह कोई और नहीं स्वयं भगवान विष्णु हैं। कहते हैं भगवान शिव और पर्वती ने वह स्थान भगवान विष्णु को दे दिया और स्वयं केदार नाथ धाम आ गए। तब से बद्रीनाथ में भगवान विष्णु और केदारनाथ में भोले नाथ का वास हो गया।

Kedarnath-Dham

जब भगवान विष्णु बालक रूप धारण किया

भगवान विष्णु ने एक दिव्य सुंदर बालक का रूप धारण किया और बद्रीनाथ मंदिर के सामने पहुंचकर रोने लेगे। जब माता पार्वती ने इस बालक को रोते हुए देखा तो उनसे रहा नहीं गया और उस बालक को गोद में उठा लिया। इसके बाद उस बालक को माता पार्वती अपने निवास स्थान में लेकर आ गईं। जब कुछ देर के बाद शिव और पार्वती किसी कारणवश कहीं बाहर गए। तो उन दोनों के बाहर निकलते ही विष्णु रूप में आए इस बालक ने झट से कपाट बंद कर दिया और कहा कि आप इस जगह से दूसरी जगह चले जाएं। देवाधिदेव तो पहले से ही सब कुछ जानते थे। इसलिए उन्होंने माता पार्वती से कहा अब हमें केदारनाथ में ही अपना निवास स्थान बनाना होगा। कहते हैं कि तभी से भगवान शिव केदारनाथ में और भगवान विष्णु बद्रीनाथ में निवास करते आ रहे हैं।

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