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हल्द्वानी-निकाय चुनाव में हिन्दी गानों पर भारी पड़े कुमाऊंनी और गढ़वाली गीत, इन गीतों ने प्रचार में मचाई धूम

हल्द्वानी-न्यूज टुडे नेटवर्क-(जीवन राज)- प्रदेश में चल रहे निकाय चुनाव में चुनावी रंग जोर-शोर से बोल रहा है। ऐसे में प्रत्याशियों ने प्रचार-प्रसार के लिए कुमाऊंनी और गढ़वाली गानों का जबरदस्त इस्तेमाल किया है। निकाय चुनाव में प्रदेशभर में प्रचार वाहन सबसे ज्यादा कुमाऊंनी और गढ़वाली गानों का इस्तेमाल किया गया है। हल्द्वानी नगर निगम चुनाव में सबसे ज्यादा कुमाऊंनी गानों का इस्तेमाल किया है। जाहिर से बात है यहां की अधिकांश जनता पहाड़ी क्षेत्रों से है। जिससे प्रत्याशियों को लोक भाषा में इस्तेमाल करने का मौका मिला है। ऐसे में हल्द्वानी में अधिकांश प्रत्याशियों ने कुमाऊंनी गीतों की जरिये वोटरों को लुभाने की कोशिश की हैं।

चुनाव प्रचार में इन गानों ने मचाई धूम

नगर निगम चुनाव में इस बार वार्डो की संख्या अधिक होने से प्रत्याशी भी इसका तोड़ निकाल लाये है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर प्रचार के वाहनों में कुमाऊंनी गाने बच रहे है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कुमाऊंनी गीतों का बोलबाला ज्यादा है। जबकि हिन्दी गीतों का कम इस्तेमाल किया गया है। पहाड़ी गीतों में ओ माया तू बैठी रेछे म्योरो दिलमा, हिट दगडि़ कमला, अल्माड़ म्योरो बंगला, टक टका टक कमला के अलावा फ्यो लडिय़ा और चैता की चैत्वाला गीतों ने खूब धूम मचा रखी है। वही हिन्दी गीतों में ये देश है वीर जवानों का, दिल दिया है जान भी देंगे आदि गानों का इस्तेमाल किया गया है। प्रचार के दौरान हिन्दी में भाषण के बाद कुमाऊंनी व गढ़वाली गानों को सुनाकर वोटरों को अपनी ओर आकर्षित करने प्रत्याशी कोई मौका नहीं छोड़ रहे है।

ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव को लेकर ज्यादा उत्साह

निकाय चुनाव को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह नगर निगम शामिल हुए ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। ऐसे में प्रत्याशी भी उन्हें लुभाने की हर कोशिश कर रहे है। चुनावी वादों से लेकर हिन्दी और कुमाऊंनी और गढ़वाली गीतों से उन्हें अपना प्रचार सुनने को मजबूर कर है। इस बार प्रत्याशी सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय है। यही ग्रामीण क्षेत्र मेयर से लेकर पार्षद तक का तरूप का इक्का साबित होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों पार्टियों का गणित बिगाडऩे में सबसे आगे है। इसलिए हर दल ग्रामीण क्षेत्रों में पैठ जमाने की कोशिश कर रहा है।

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