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कुंभ मेले का अतीत, जानिएं किसने किया था इस मेले का शुभारम्भ

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कुंभ मेला पिछले कई सालों लगता आ रहा है। इसी कारण कुंभ मेले का काफी लम्बा इतिहास है। जोकि कम से कम 850 साल पुराना है। ऐसा बताया जाता कि सबसे पहले इस मेले का आयोजन शंकराचार्य ने करवाया था। लेकिन इसके बारे में कुछ कथाओं के माध्यम यह भी बताया गया है कि इसकी शुरूआत आदिकाल से ही हो चुकी थी। जिसका आरम्भ समुद्र मंथन ने किया था।


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यह मेला हर तीन साल में एक बार लगता है। कुम्भ मेला केवल चार स्थानों पर लगता है हरिद्वार, इलाहबाद, उज्जैन और नासिक कुम्भ मेला इन स्थानों पर विशेष तौर पर इसलिए लगता है क्योंकि यहां पर मंथन में निकले अमृत का कलश गिरा था। कुंभ मेले के आयोजन का प्रावधान कब से है इस बारे में विद्वानों में अनेक भ्रांतियाँ हैं। वैदिक और पौराणिक काल में कुंभ तथा अर्धकुंभ स्नान में आज जैसी प्रशासनिक व्यवस्था का स्वरूप नहीं था। कुछ विद्वान गुप्त काल में कुंभ के सुव्यवस्थित होने की बात करते हैं। परन्तु प्रमाणित तथ्य सम्राट शिलादित्य हर्षवर्धन 617-647 ई. के समय से प्राप्त होते हैं। बाद में श्रीमद आघ जगतगुरु शंकराचार्य तथा उनके शिष्य सुरेश्वराचार्य ने दसनामी संन्यासी अखाड़ों के लिए संगम तट पर स्नान की व्यवस्था की। इस मेले के बारे में कुछ दस्तावेजों का कहना है कि मेला 525 बीसी में शुरू हुआ था। 12 साल बाद यह मेला अपने पहले स्थान पर वापस पहुंचता है।

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