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रक्षाबंधन 2019- कब है रक्षाबंधन, जानिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

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रक्षाबंधन 2019- केवल धागों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्यार, विश्वास और रिश्तों की गरिमा बनाए रखने वाला पर्व है। हर साल सावन के आखिरी दिन रक्षा बंधन का त्योहार मनाने की मान्यता है। भाई-बहनों के बीच प्यार को दर्शाने वाला यह त्योहार इस साल 15 अगस्त को पड़ रहा है। दरअसल, सावन-2019 इस बार 17 जुलाई को शुरू हुआ था और इस बार यह 30 दिनों का है। ऐसे में यह 15 अगस्त को खत्म हो रहा है। खास बात ये है कि 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस का भी मौका होगा। रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उनसे अपनी रक्षा का वचन लेती हैं। इस दिन भाई की ओर से बहन को उपहार भी देने की परंपरा है। आइए  जानते हैं रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और रक्षाबंधन से जुड़ी पूजा विधि।

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इस बार रक्षाबंधन 2019 का शुभ मुहूर्त क्या है ?

रक्षाबंधन के पर्व को भद्रा की नजर लगने पर राखी बांधने के समय में फेरबदल करना पड़ता है। भद्रा रहित काल में ही राखी बांधने का विधान शास्त्रसम्मत माना जाता है। सौभाग्य से इस बार इस पावन पर्व को भद्गा की नजर नहीं लग रही है। इस बार राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 49 मिनट से शुरू होगा और शाम 6.01 बजे तक बहनें अपने भाई को राखी बांध सकती हैं। खास बात ये भी है कि इस बार श्रावण शुक्ल पूर्णिमा 14 अगस्त को ही दोपहर 3 बजकर 45 मिनट से शुरू हो जाएगा।

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कैसे मनाएं रक्षाबंधन का त्यौहार ?

  • थाल में रोली, चन्दन, अक्षत, दही, रक्षासूत्र, और मिठाई रखें।
  • घी का एक दीपक भी रखें , जिससे भाई की आरती करें।
  • रक्षा सूत्र और पूजा की थाल सबसे पहले भगवान को समर्पित करें।
  • इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करवाकर बैठाएं।
  • पहले भाई को तिलक लगायें ,दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र बांधें और आरती करें।
  • फिर मिठाई खिलाकर भाई की मंगल कामना करें।
  • रक्षासूत्र बंधने के समय भाई तथा बहन का सर खुला नहीं होना चाहिए।
  • रक्षा बंधवाने के बाद माता-पिता और गुरु का आशीर्वाद लें तत्पश्चात बहन को सामथ्र्य के अनुसार उपहार दें।
  • उपहार मैं ऐसी वस्तुएं दें, जो दोनों के लिए मंगलकारी हो, काले वस्त्र तथा तीखा या नमकीन खाद्य न दें।

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रक्षासूत्र या राखी कैसी होनी चाहिए ?

  • रक्षासूत्र तीन धागों का होना चाहिए।
  • लाल पीला और सफेद
  • अन्यथा लाल और पीला धागा तो होना ही चाहिए।
  • रक्षासूत्र में चन्दन लगा हो तो बेहद शुभ होगा।
  • कुछ न होने पर कलावा भी श्रद्धा पूर्वक बांध सकते हैं।

दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधने का महत्व

क्या आपने सोचा है कि राखी को कलाई पर ही क्यों बांधते हैं? दरअसल इसके पीछे आध्यात्मिक, आयुर्वेदिक और मनोवैज्ञानिक कारण हैं। आध्यात्मिक कारणों की बात करें तो माना जाता है कि कलाई पर राखी बांधने से ब्रह्म, विष्णु और महेश की कृपा प्राप्त होती है। मां दुर्गा के रूपों का भी आशीर्वाद मिलता है जिससे ज्ञान, धन और शक्ति की प्राप्ति होती है।

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ऐतिहासिक संदर्भ के मुताबिक

रक्षा बंधन का ऐतिहासिक महत्व रक्षाबंधन का जिक्र महाभारत में भी मिलता है। महाभारत की लड़ाई से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने शिशुपाल के खिलाफ सुदर्शन चक्र उठाया था। इस दौरान उनके हाथ में चोट लग गई और क्त बहने लगा, यह देख द्रोपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़ कर उनकी उंगली पर बांध दिया। बदले में श्रीकृष्ण ने द्रोपदी को भविष्य में आने वाली हर मुसीबत से रक्षा करने की वचन दिया। माना जाता है कि इस दिन भी श्रावा मास की पूर्णिमा ही थी। ऐसे में इस दिन की महत्ता बढ़ गई।

धन सृमद्धि के लिए रक्षा बंधन पर करें यह काम

रक्षाबंधन के दिन भगवान विष्णु के एक अवतार हयग्रीव का भी जन्मदिन है। इसलिए राखी के दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष शुभ फलदायी है। भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार के पीछे देवी लक्ष्मी का भी योगदान था इसलिए भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा करना धन और समृद्धिदायक रहेगा। इस दिन भाई-बहन दोनों मिलकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें। ऐसा करने से आपके जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं रहेगी।

पड़ता है मनोवैज्ञानिक असर

आयुर्वेद के अनुसार, कलाई पर राखी बांधने से वात, पित्त, कफ संतुलित रहता है जिससे स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है। राखी चूंकि रक्षा के बंधन को दर्शाती है, ऐसे में व्यक्ति खुद में शक्ति के संचार को महसूस करता है। इससे आत्मविश्वा बढऩे के साथ ही सकारात्मक सोच भी बढ़ती है।