गठबंधन को झटका : भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर (रावण) ने दिया कांग्रेस को समर्थन, जानिए क्या है वजह

नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : बहुजन समाज पार्टी को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, दलित संगठन भीम आर्मी ने समुदाय के सदस्यों से सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस के उम्मीदवार को वोट देने के लिए अपील की है। कांग्रेस ने यहां से इमरान मसूद को चुनावी मैदान पर उतारा है। भीम आर्मी के इस कदम से बसपा-सपा-रालोद गठबंधन को झटका लग सकता है।

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आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही बसपा अध्यक्ष मायावती ने भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद को भाजपा का ‘एजेंट’ करार दिया था और उन पर दलित वोटों को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।
चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण का जन्म उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के चटमलपुर में हुआ। रावण ने कानून पढ़ाई की और उसने भीम आर्मी बनाई, जो कि दलितों के लिए पढ़ाई और अन्य सेवाएं मुहैया करवाती है।

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मायावती ने मुस्लिमों से गठबंधन के लिए मांगे थे वोट

बता दें कि बीएसपी-एसपी-आरएलडी गठबंधन ने सहारनपुर से फजुलर्रहमान को उम्मीदवार बनाया है। यहां से बीजेपी सांसद राघव लखनपाल दोबारा सांसद बनने की मशक्कत में लगे हैं। देवबंद में रविवार को एक संयुक्त रैली में मायावती ने मुस्लिम मतदाताओं से अपील की थी कि रहमान को एकजुट होकर वोट दें और उनका वोट बंटना नहीं चाहिए। वह मई 2017 में सहारनपुर में हुए जातीय संघर्ष के बाद दलित संगठन के सदस्यों के खिलाफ दर्ज पुलिस मामलों का जिक्र कर रहे थे।

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प्रियंका गांधी ने चंद्रशेखर से की थी मुलाकात

कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया गया। मसूद 2014 में सुर्खियों में रहे थे जब उन्होंने नरेंद्र मोदी के खिलाफ विवादास्पद बयान दिया था। बसपा-सपा-रालोद गठबंधन ने सहारनपुर से फैजुल रहमान को उम्मीदवार बनाया है। वहीं बीजेपी ने यहां से सांसद राघव लखनपाल दोबारा सांसद बनने की मशक्कत में लगे हैं। कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी ने पिछले महीने मेरठ के एक अस्पताल में चंद्रशेखर से मुलाकात की थी।

ये हैं आरोप

भीम आर्मी के एक नेता ने आरोप लगाया कि बीएसपी-एसपी कार्यकर्ताओं ने रैली में चंद्रशेखर की तस्वीर लेकर आए कुछ दलितों के साथ मारपीट की और उनके पोस्टर फाड़ दिये। उन्होंने कहा, ‘जब कोई भीम आर्मी के समर्थन में नहीं आया, तब मसूद ने उसकी मदद की थी।’ वह मई 2017 में सहारनपुर में हुए जातीय संघर्ष के बाद दलित संगठन के सदस्यों के खिलाफ दर्ज पुलिस मामलों का जिक्र कर रहे थे।