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पाकिस्तान में 11 महीने पहले में रची गई थी पुलवामा हमले की साजिश, कुछ इस तरह तैयार किया गया था पूरा प्लान

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नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस आतंकी हमले की साजिश बहुत गहरी बनाई थी। पुलवामा के लेथपुरा में हुए आत्मघाती आतंकी हमले में हो रही जांच से पता चला है कि इस हमले में करीब 80 किलो आरडीएक्स इस्तेमाल किया गया था। इसमें अमोनियम नाइट्रेट और दूसरे केमिकल का इस्तेमाल किया गया। यह आरडीएक्स पाकिस्तान से पुंछ के रस्ते से घुसपैठ किये 13 आतंकियों के ग्रुप ने 2018 मार्च के महीने सीमा के इस पार लाया था। फिर धीरे धीरे कर इसे दक्षिणी कश्मीर के शोपियां पहुंचाया गया। शोपियां से इसे गैस सिलेंडरों और कोयले की थैलियों में पुलवामा के त्राल के मिडोरा गावों में पहुंचाया गया था।

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12वीं कक्षा के छात्र आदिल का किया गया ब्रेन वॉश

सूत्रों के मुताबिक इन जैश के 13 आतंकियों में कामरान और रशीद गाजी भी शामिल थे, जो आईईडी एक्सपर्ट थे। कामरान पहले उत्तरी कश्मीर गया और रशीद दक्षिणी कश्मीर में रहा। दोनों जगहों पर ऐसे आतंकी की तलाश शुरू हुई जो आत्मघाती बनने के लिए तैयार हो। फिर रशीद गाजी की संपर्क में आया आदिल डार. आदिल के मिलते ही आतंकी कामरान वापस दक्षिणी कश्मीर के मिडोरा गांव पहुंचा। यहां पाकिस्तानी आतंकी रशीद गाजी और कामरान आदिल को तैयार करने में लगे। कई महीनों तक 12वीं कक्षा के छात्र आदिल का ब्रेन वॉश किया गया। जब आदिल आत्मघाती हमले के लिए तैयार हुआ तो हमले की योजना काम शुरू हुआ।

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आतंकी ट्रेनिंग कैंपों में प्रशिक्षिण

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आरडीएक्स को कथित तौर पर पाक सीमा से लाया गया है। पाकिस्तान की सीमा में चल रहे आतंकी ट्रेनिंग कैंपों में प्रशिक्षित आतंकवादियों को जब भारतीय सीमा में धकेला जाता है तो उन्हें आरडीएक्स की बहुत छोटी मात्रा बारीक कोयले के बीच रखकर थमा दी जाती है।

सुरक्षा एजेंसियों ने जारी किया था अलर्ट

वहीं खफिया एजेंसियों ने भी इस बावत अलर्ट जारी कर आगाह किया था। खुफिया एजेंसियों ने सडक़ किनारे खड़ी गाड़ी में ब्लास्ट होने की बात की थी। साथ ही इलाके में जाने से पहले पूरी पड़ताल कर जाने का एलान किया था। 5 फरवरी को पाकिस्तान के कराची में जैश-ए-मोहम्मद की रैली में हुई थी। जिसमें भारत को दहलाने की साजिश रची गई थी। रैली के बाद आतंकियों की 7 टीमें भारत रवाना की गई थी। रैली में जैश-ए- मोहम्मद की रैली मेें मौलाना मसूद अजहर के छोटे भाई और जैश के सरगना मौलाना अब्दुल रऊफ असगर ने भारत के अन्य हिस्सों में दहलाने का ऐलान किया था।

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2017 में आतंकी हमला हुआ था विफल

सूत्रों के मुताबिक त्राल मिडोरा में रची ये साजिश जब फाइनल हुई तो सही मौका तलाशने की प्रक्रिया शुरू हुई। यह तय हुआ कि हमला बड़ा करना है तो ऐसी जगह हो जहां सुरक्षाबलों को बड़ा नुकसान हो। इसलिए सुरक्षाबलों को कैंपों में निशाना बनाने के बजाए खुले में हमला करने की योजना शुरू की गई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वर्ष 2017 दिसम्बर महीने में लेथपुरा के ही सीआरपीएफ कैंप पर जैश का आत्मघाती हमला विफल हुआ था। फिर तय हुआ कि सुरक्षाबलों पर यह हमला जम्मू कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग पर किया जाए क्योंकि कि यह वह रास्ता है, जिस पर सैकड़ों सुरक्षाबलों की गाडिय़ां हर दिन काफिले के रूप में चलती हैं

घटना को कुछ इस तरह दिया गया अंजाम

फिर जब कश्मीर में भीषण बर्फबारी के कारण जम्मू कश्मीर राजमार्ग कई दिनों तक बंद रहने के बाद खोला गया और सीआरपीएफ का काफिला दोगुनी तादाद में कश्मीर की तरफ चल पड़ा। आतंकियों को अपने ओवर ग्राउंड वर्करों से यह पता चला तो 14 फरवरी का दिन हमले के लिए चुना गया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 14 फरवरी की सुबह ही मिंडोरा गांवों में आतंकी कामरान और रशीद गाजी ने तैयार किये गए इस विस्फोटक को गाड़ी में फिट किया और दोहपहार बाद आदिल इस गाड़ी को लेकर लेथपुरा के लिंक रोड से हाईवे पर पहुंचा। करीब 3.20 मिनट पर सीआरपीएफ का काफिला इस जगह पहुंचा और आदिल ने सीआरपीएफ की बस को देखते ही गाड़ी को कानवाय के बीच धकेल दिया और इस हमले को अंजाम दिया।

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मास्टरमाइंड गाजी भी मारा गया

इस हमले में 40 सीआरपीएफ के जवान शहीद हुए और 5 घायल अभी भी अस्पताल में हैं। इस हमले की जद में सीआरपीएफ की दो बस आयी थीं। सुरक्षाबलों को हमले के दिन ही यह लीड मिली थी की इस में कौन शामिल है करीब 19 लोगों को हमले के बाद उसी रात हिरासत में लिया गया और पूछताछ की गई और पता चला कि आदिल को तैयार करने वाले मास्टरमाइंड कामरान और रशीद गाजी है और उनकी तलाश शुरू की गई, कल हुई मुठभेड़ से पहले इन दोनो को चार बार घेरे में लिया गया था मगर यह निकलने में सफल रहे थे मगर कल पांचवी बार इन दोनो को पिंगलिन गावों में घेर लिया गया और आखिकार इनको ढेर कर दिया गया।